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इंटर कास्ट मैरिज पर महाराष्ट्र सरकार दे रही 3 लाख की मदद, जानिए क्या हैं शर्तें और आवेदन प्रक्रिया

Maharashtra: महाराष्ट्र सरकार की यह योजना सिर्फ पैसे देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की उस पुरानी सोच को बदलने की कोशिश है, जो आज भी शादी को जाति के दायरे में बांधकर देखती है.

Image Source: Social Media

InterCaste Marriage Scheme: हम चाहे कितनी भी तरक्की कर लें, लेकिन शादी के नाम पर आज भी समाज में सबसे बड़ी रुकावट जाति बन जाती है. जब दो बालिग लड़का-लड़की एक-दूसरे से प्यार करके शादी करना चाहते हैं, तो सबसे पहले परिवार और समाज जाति पूछता है. कई बार लड़के-लड़की की सोच, पढ़ाई और समझ एक जैसी होती है, फिर भी सिर्फ इसलिए शादी नहीं हो पाती क्योंकि दोनों अलग-अलग जाति से होते हैं. हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में आज भी अपनी ही जाति में शादी करने का दबाव बहुत ज्यादा देखा जाता है.

जब प्यार की कीमत जान से चुकानी पड़ती है

कई इलाकों में जाति से बाहर शादी करना इतना बड़ा “अपराध” मान लिया जाता है कि इसका अंजाम बेहद खतरनाक हो जाता है. इसी सोच की वजह से ऑनर किलिंग जैसी घटनाएं सामने आती हैं, जहां लड़का-लड़की को अपनी जान तक गंवानी पड़ती है. समाज की इसी कठोर मानसिकता को बदलने और इंटर कास्ट मैरिज को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारें खास योजनाएं चला रही हैं. इन योजनाओं के जरिए ऐसे दंपतियों को आर्थिक मदद दी जाती है, ताकि वे बिना डर के अपनी जिंदगी की शुरुआत कर सकें.

महाराष्ट्र सरकार की खास योजना क्या है


महाराष्ट्र सरकार ने भी इसी सोच के तहत एक खास योजना शुरू की है, जिसका नाम है “इंसेंटिव टू एनकरेज इंटर-कास्ट मैरिज”. इस योजना का मकसद साफ है, जातिगत भेदभाव को कम करना और समाज में बराबरी और एकता को बढ़ावा देना. सरकार चाहती है कि लोग जाति से ऊपर उठकर शादी करें और नई सोच के साथ आगे बढ़ें.

शादी करने वाले कपल को मिलती है 3 लाख रुपये की मदद


इस योजना के तहत इंटर कास्ट मैरिज करने वाले कपल को कुल 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. इसमें से 50 हजार रुपये महाराष्ट्र सरकार देती है और 2.50 लाख रुपये डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर फाउंडेशन की ओर से दिए जाते हैं. यह पूरी राशि सीधे पति-पत्नी के जॉइंट बैंक अकाउंट में भेजी जाती है, ताकि वे अपनी नई जिंदगी की शुरुआत बिना किसी आर्थिक चिंता के कर सकें.

कौन ले सकता है इस योजना का लाभ


इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें रखी गई हैं. दंपति में से एक व्यक्ति सामान्य वर्ग से और दूसरा अनुसूचित जाति (SC) से होना चाहिए. दोनों पति-पत्नी महाराष्ट्र के मूल निवासी होने चाहिए. शादी के समय महिला की उम्र 18 साल से ज्यादा और पुरुष की उम्र 21 साल से ज्यादा होनी चाहिए. साथ ही दोनों की उम्र 35 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए.

आय और शादी से जुड़ी जरूरी शर्तें


इस योजना का लाभ उन्हीं दंपतियों को मिलेगा जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय 2.5 लाख रुपये से ज्यादा न हो. किसी भी आवेदक का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए. शादी का रजिस्ट्रेशन हिंदू विवाह अधिनियम 1955 या विशेष विवाह अधिनियम 1954 के तहत होना जरूरी है. इसके अलावा दंपति को राज्य या केंद्र सरकार की किसी दूसरी समान योजना का लाभ नहीं मिला होना चाहिए.

सिर्फ पहली शादी पर ही मिलेगा फायदा


यह योजना केवल पहली शादी के लिए है. पुनर्विवाह के मामलों में इसका लाभ नहीं मिलता. अगर कोई पुरुष किसी विधवा महिला से शादी करता है, तो यह उसकी पहली शादी होनी चाहिए . शादी दोनों की पूरी सहमति से, बिना किसी दबाव के हुई होनी चाहिए.

आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए


इस योजना में आवेदन करते समय कई जरूरी दस्तावेज लगाने होते है. इनमें मैरिज रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, कास्ट सर्टिफिकेट, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं की मार्कशीट, आधार कार्ड, भामाशाह कार्ड, जॉइंट बैंक अकाउंट की डिटेल, पैन कार्ड, इनकम सर्टिफिकेट, दंपति की शादी की एक फोटो, और अगर लागू हो तो पहले पति या पत्नी का मृत्यु प्रमाण पत्र शामिल है. इसके अलावा स्टैंप पेपर पर लिखा हुआ सेल्फ डिक्लेयरेशन भी देना होता है.

सोच बदलेगी, तभी समाज आगे बढ़ेगा


महाराष्ट्र सरकार की यह योजना सिर्फ पैसे देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की उस पुरानी सोच को बदलने की कोशिश है, जो आज भी शादी को जाति के दायरे में बांधकर देखती है. अगर ऐसी योजनाओं को सही तरीके से अपनाया जाए, तो आने वाले समय में जाति से ऊपर उठकर रिश्ते बनने लगेंगे और समाज सच में आगे बढ़ सकेगा.

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