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40 सालों से मस्जिद में विराजते हैं भगवान गणपति... मुस्लिम लोग करते हैं पूजा-पाठ और विसर्जन, हिंदुओं के त्यौहार पर नहीं खाते नॉनवेज

महाराष्ट्र के सांगली जिले के गोटखिंडी गांव में पिछले 40 सालों से एक मस्जिद में गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित की जाती है, जहां मूर्ति को 10 दिन के उत्सव के लिए मस्जिद में रखा जाता है. हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग एक साथ मिलकर गणपति बप्पा की पूजा-पाठ करते हैं. उसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन उत्सव के समापन पर स्थानीय जलाशय में विसर्जन किया जाता है.

40 सालों से मस्जिद में विराजते हैं भगवान गणपति... मुस्लिम लोग करते हैं पूजा-पाठ और विसर्जन, हिंदुओं के त्यौहार पर नहीं खाते नॉनवेज
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महाराष्ट्र के एक गांव में पिछले 4 दशकों के अंदर गंगा-जमुनी तहजीब का एक अनोखा मिसाल देखने को मिल रहा है. इस गांव में 40 सालों से हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय मिलकर गणेश उत्सव मनाते हैं. यही नहीं मूर्ति विसर्जन से लेकर उनकी स्थापना और भंडारे तक में भी दोनों ही समुदाय आपस में मिल-जुलकर हर एक कार्य करते हैं. इस गांव की कुल आबादी करीब 15,000 के आसपास है. इनमें 100 से ज्यादा मुस्लिम परिवार के लोग रहते हैं. प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी यह गांव सौहार्द की अनोखी मिसाल पेश कर रहा है. 

मस्जिद में स्थापित होती है गणपति बप्पा की मूर्ति

बता दें कि महाराष्ट्र के सांगली जिले के गोटखिंडी गांव में पिछले 40 सालों से एक मस्जिद में गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित की जाती है, जहां मूर्ति को 10 दिन के उत्सव के लिए मस्जिद में रखा जाता है. उसके बाद अनंत चतुर्दशी के दिन उत्सव के समापन पर स्थानीय जलाशय में विसर्जन किया जाता है.  गणेश मंडल के संस्थापक अशोक पाटिल ने बताया कि दूसरी जगहों पर धार्मिक तनाव का सांगली के इस गांव पर किसी भी तरह का कोई भी असर नहीं पड़ा है.

प्रसाद बनाने व पूजा में भी सहयोग करते हैं मुस्लिम

खबरों के मुताबिक, इस गांव की आबादी करीब 15,000 हजार है, जिसमें मुस्लिम समुदाय के 100 परिवार भी शामिल हैं. इनमें सभी मुस्लिम परिवार मिलकर प्रसाद बनाने, पूजा अर्चना करने और उत्सव की तैयारियों में बड़ा सहयोग करते हैं.

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1980 में शुरू हुई थी यह परंपरा

गणेश मंडल के संस्थापक अशोक पाटिल ने बताया कि '4 दशकों से भगवान गणेश का यह पर्व दोनों ही समुदाय मिलकर मनाते हैं. इसकी शुरुआत साल 1980 में हुई थी, जब भारी बारिश के कारण हिंदू और मुस्लिम समुदायों के सदस्यों ने सांगली जिले के गोटखिंडी गांव में एक मस्जिद के अंदर गणपति की मूर्ति को ले जाने का फैसला किया था. तब से ही यह अनोखी परंपरा शांतिपूर्वक चल रही है. इसमें मुस्लिम समुदाय की सक्रिय भागीदारी है. 1980 में ही गांव के झुंझार चौक पर न्यू गणेश तरुण मंडल की स्थापना भी हुई थी.'

हिंदू त्यौहारों पर मांस नहीं खाते मुस्लिम 

अशोक पाटिल ने आगे बताया कि 'जब भी किसी हिंदू समुदाय का कोई त्यौहार पड़ता है, तो कोई भी मुस्लिम परिवार मांस नहीं खाता है. वह त्यौहार जितने दिन भी रहता है, उतने दिन तक सभी लोग इससे परहेज रखते हैं. इस बार बकरीद और गणेश चतुर्थी की तारीखें एक साथ पड़ीं, तो मुसलमानों ने अपना त्यौहार केवल नमाज अदा करके और कुर्बानी न देकर मनाया था. पूरे देश को यहां के सामाजिक और धार्मिक सद्भाव के वातावरण से प्रेरणा लेनी चाहिए.'

27 अगस्त से शुरू हुआ गणेश उत्सव का कार्यक्रम

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गणेश उत्सव का पावन पर्व देश भर में मनाया जा रहा है. प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी गांव में गणेश मूर्ति की स्थापना हुई है. इसको लेकर अशोक पाटिल ने बताया कि गणेश मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए स्थानीय पुलिस और तहसीलदार को आमंत्रित किया जाता है. इस बार 10 दिवसीय गणपति उत्सव की शुरुआत 27 अगस्त से हुई है, जो 5 सितंबर तक चलेगा.

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