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ईरान-अमेरिका तनाव के बीच एक्टिव हुआ भारत, रूस में अजित डोभाल ने पाकिस्तान को लताड़ा, बोले- आतंकियों को पनाह देने वाले...
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच भारत के NSA अजित डोभाल रूस पहुंचे, जहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच पर आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख दुनिया के सामने रखा.
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अमेरिका और ईरान के बीच भले ही सीजफायर लागू हो चुका हो, लेकिन बीते दो दिनों में दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले किए हैं. इसके चलते मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ने और युद्ध की चिंगारी भड़कने की आशंका तेज हो गई है. दोनों देश शांति वार्ता की कोशिशों में जुटे हैं, लेकिन कुछ अहम शर्तों के कारण बातचीत अभी अंतिम नतीजे तक नहीं पहुंच पाई है. इसी बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल रूस के दौरे पर पहुंचे हैं.
बिना नाम लिया पाकिस्तान को दिया सख्त संदेश
दरअसल, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने मॉस्को में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मंच में हिस्सा लिया, जहां उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का सख्त रुख दुनिया के सामने रखा. एनएसए ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना साफ कहा कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में दोहरे मापदंड स्वीकार नहीं किए जा सकते. उन्होंने संकेतों में उन देशों पर निशाना साधा जो आतंकियों को संरक्षण देते हैं और कहा कि ऐसे देशों को तय करना होगा कि वे आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसके साथ खड़े हैं. रूस दौरे के दौरान अजित डोभाल ने रूसी सुरक्षा सलाहकार सर्गेई शोइगु से भी अहम मुलाकात की. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा, व्यापार और आर्थिक सहयोग से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई और द्विपक्षीय संबंधों की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गई.
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किन मुद्दों पर हुई चर्चा
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अजित डोभाल और रूस के सुरक्षा सलाहकार सर्गेई शोइगु के बीच हुई बातचीत में ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की अगली बैठक को लेकर भी मंथन हुआ. यह अहम बैठक नई दिल्ली में आयोजित की जानी है, हालांकि इसकी तारीखों की आधिकारिक घोषणा अब तक नहीं की गई है. जानकारी देते चलें कि डोभाल का यह दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा हुआ है और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा को लेकर कई देशों की चिंता गहराती जा रही है.
बड़े देशों के बीच बढ़ रहा मुकाबला
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दुनिया की बड़ी शक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल को बेहद संवेदनशील बना दिया है. खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर जैसे अहम समुद्री मार्गों पर बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ी चिंता बन गया है. बीते कुछ महीनों से होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक बाजार पर दबाव बढ़ा है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से तक तेल और व्यापारिक सामान इसी रास्ते से पहुंचते हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि इन मार्गों में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और कीमतों पर पड़ सकता है. वहीं, रूस-यूक्रेन युद्ध ने भी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक संतुलन को गहराई से प्रभावित किया है. चार साल बाद भी रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ है. इस संघर्ष के कारण ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ा है, जबकि दुनिया भर में सुरक्षा व्यवस्था और वैश्विक रणनीति को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.
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बताते चलें कि बीते 27 मई को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साइप्रस दौरे के दौरान यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से मुलाकात की थी. दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में क्षेत्रीय हालात और शांति बहाली के प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की गई. बैठक के बाद एंड्री सिबिहा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि भारत की सकारात्मक भूमिका और उसके सुझावों का यूक्रेन स्वागत करता है.