Advertisement
'अगर मैं मुस्लिम होता तो…' अभिजीत दिपके के बयान से छिड़ा सियासी बवाल
CJP: प्रदर्शन के दौरान दिए गए एक इंटरव्यू में अभिजीत दिपके ने ऐसा बयान दिया, जिसकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है. इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं.
Advertisement
CJP Protest: शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर इन दिनों जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन जारी है. इस आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके कर रहे हैं. उनकी मांग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें और छात्रों से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय की जाए. इस आंदोलन को कई सामाजिक संगठनों, युवाओं और छात्रों का समर्थन मिल रहा है. वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक भी इस प्रदर्शन के समर्थन में पहुंचे हैं. उन्होंने छात्रों की समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू कर दी है....
अभिजीत दिपके के एक बयान ने बढ़ाई राजनीतिक बहस
प्रदर्शन के दौरान दिए गए एक इंटरव्यू में अभिजीत दिपके ने ऐसा बयान दिया, जिसकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है. उन्होंने कहा, "अगर मैं खालिद होता या मुसलमान होता, तो अब तक मैं जेल में होता. इसकी मुझे पूरी समझ है." उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं. कई लोगों ने इसे दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद के मामले से जोड़कर देखा, जो पिछले कई वर्षों से जेल में हैं और जिन्हें अब तक जमानत नहीं मिल सकी है. वहीं, कुछ लोगों ने दिपके के बयान का समर्थन किया, जबकि कई लोगों ने इसकी आलोचना भी की. कुल मिलाकर यह बयान एक नई राजनीतिक और सामाजिक बहस का कारण बन गया है..
Advertisement
'इटली किसी के आगे नहीं झुकता', ट्रंप पर जमकर भड़की मेलोनी, जानें क्यों कहा ऐसा?
Advertisement
NEET, NTA और पेपर लीक के मुद्दों पर आंदोलन
अभिजीत दिपके का कहना है कि उनका आंदोलन केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है. वे NEET पेपर लीक, NTA की कार्यप्रणाली, SSC परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और अन्य भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों को लेकर आवाज उठा रहे हैं. बताया जा रहा है कि वह इन मुद्दों को उठाने के लिए अमेरिका से भारत लौटे हैं और लगातार छात्रों के साथ मिलकर प्रदर्शन कर रहे हैं. उनके आंदोलन में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और कई विपक्षी दलों के प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं. इसके अलावा उन छात्रों के परिवार भी जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं, जिन्होंने परीक्षा से जुड़े तनाव या विवादों के बाद अपने बच्चों को खो दिया.
Advertisement
Abhijeet Dipke Controversial Statement by Naming Umar Khalid: कॉकरोच जनता पार्टी (cockroach janata party) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली दंगा (Delhi riots) के आरोपी उमर खालिद (Umar Khalid) का नाम लेकर विवादित बयान दिया है। अभिजीत दिपके के विवादित बयान के बाद बवाल मच गया है।… pic.twitter.com/sraH3irUOn
— Lallu Ram (@lalluram_news) ?ref_src=twsrc%5Etfw">June 30, 2026
सरकार पर पीड़ित परिवारों की अनदेखी का आरोप
अभिजीत दिपके ने अपने बयान में उन छात्रों का भी जिक्र किया, जिनकी मौत के बाद उनके परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं. उन्होंने दीप मेघवाल, आकांक्षा चतुर्वेदी, अमायरा कुमार और कहान पटेल जैसे छात्रों के नाम लेते हुए कहा कि इन परिवारों को अपने बच्चों के लिए न्याय मांगने की स्थिति में अकेला छोड़ दिया गया है. उनका आरोप है कि सरकार की ओर से किसी भी जिम्मेदार प्रतिनिधि ने इन परिवारों से संपर्क नहीं किया और न ही उनके दुख में शामिल होने की कोशिश की. उनके मुताबिक, यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि संवेदनहीनता भी दिखाता है.
Advertisement
दिपके बोले- कम से कम परिवारों से मिलकर दुख तो जताइए
यह भी पढ़ें
अभिजीत दिपके ने कहा कि सरकार भले ही उन परिवारों के बच्चों को वापस नहीं ला सकती, लेकिन कम से कम उनके घर जाकर दुख साझा कर सकती है और संवेदना व्यक्त कर सकती है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पीड़ित परिवारों से मिलकर उनका हालचाल पूछना और उनके दुख में शामिल होना भी इतना मुश्किल है. उनके अनुसार, किसी भी सरकार की जिम्मेदारी सिर्फ नीतियां बनाना नहीं होती, बल्कि मुश्किल समय में अपने नागरिकों के साथ खड़े होना भी होती है. दिपके का कहना है कि जब तक छात्रों को निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था और पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.