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संपत्ति विवरण नहीं दिया तो सरकारी कर्मचारियों की सैलरी बंद, योगी सरकार का बड़ा एक्शन

UP: सरकार ने साफ कहा है कि जब तक कर्मचारी अपनी संपत्ति की पूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज नहीं करेंगे, तब तक उनका वेतन जारी नहीं किया जाएगा. यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत लिया गया है, जिसका मकसद सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार पर रोक लगाना है.

Image Source: Social Media
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CM Yogi: उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी नीति को और कड़ा करते हुए एक बड़ा कदम उठाया है. राज्य सरकार ने 68,236 सरकारी कर्मचारियों का वेतन रोक दिया है. वजह यह है कि इन कर्मचारियों ने तय समय सीमा तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल और अचल संपत्ति का विवरण अपलोड नहीं किया. सरकार ने साफ कहा है कि जब तक कर्मचारी अपनी संपत्ति की पूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज नहीं करेंगे, तब तक उनका वेतन जारी नहीं किया जाएगा. यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत लिया गया है, जिसका मकसद सरकारी तंत्र में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार पर रोक लगाना है.

क्या है पूरा मामला और क्यों लिया गया यह निर्णय

दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले साल ही आदेश जारी किया था कि राज्य के सभी सरकारी कर्मचारी, चाहे वे अधिकारी हों या चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी, सभी को मानव संपदा पोर्टल पर अपनी संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य होगा. इसमें घर, जमीन, गाड़ी, बैंक बैलेंस जैसी सभी चल-अचल संपत्तियों की जानकारी शामिल है. सरकार ने इसके लिए 31 जनवरी 2026 तक की अंतिम तारीख तय की थी. लेकिन तय समय सीमा खत्म होने के बाद भी 68,236 कर्मचारियों ने यह जानकारी पोर्टल पर दर्ज नहीं की. इसके बाद सरकार ने जनवरी महीने का वेतन रोकने का फैसला लिया.

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कितने और किस स्तर के कर्मचारियों का वेतन रुका

राज्य में कुल लगभग 8.66 लाख सरकारी कर्मचारी हैं .इनमें से 68 हजार से ज्यादा कर्मचारियों पर यह कार्रवाई की गई है. सबसे ज्यादा संख्या तृतीय श्रेणी कर्मचारियों की है, जिनकी संख्या करीब 34,926 है. इसके बाद 22,624 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। वहीं 7,204 द्वितीय श्रेणी और 2,628 प्रथम श्रेणी के अधिकारी भी इस कार्रवाई की जद में आए हैं. इससे साफ है कि यह कदम केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े अधिकारी भी इसमें शामिल हैं.

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सिर्फ वेतन रोकना ही नहीं, आगे और कार्रवाई भी संभव

सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यह कार्रवाई यहीं खत्म नहीं होती. अगर कर्मचारी आगे भी संपत्ति विवरण नहीं देते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है. इसमें सेवा से जुड़ी सज़ाएं, वेतन वृद्धि रोकना या विभागीय जांच जैसे कदम शामिल हो सकते हैं. सरकार का कहना है कि नियम सभी के लिए बराबर हैं और किसी को भी लापरवाही की छूट नहीं दी जाएगी.

भ्रष्टाचार के खिलाफ योगी सरकार की सख़्त नीति

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार शुरू से ही भ्रष्टाचार के खिलाफ सख़्त रुख अपनाए हुए है. सरकार का मानना है कि जब सरकारी कर्मचारी अपनी संपत्ति का खुलासा करेंगे, तो अवैध तरीके से संपत्ति जमा करने और बेनामी लेन-देन पर रोक लगेगी. इससे सरकारी कामकाज में ईमानदारी और पारदर्शिता बढ़ेगी. यही कारण है कि लोक निर्माण, राजस्व, शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण जैसे कई बड़े विभागों के कर्मचारी भी इस नियम के दायरे में लाए गए हैं.

विभागों की जिम्मेदारी और अधिकारियों को चेतावनी

सरकार ने सभी विभागों के ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (DDO) और नोडल अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी थी कि वे सुनिश्चित करें कि उनके विभाग के सभी कर्मचारी समय पर संपत्ति विवरण अपलोड करें. लेकिन कई विभागों में इस नियम का ठीक से पालन नहीं हुआ. इसके बाद सरकार ने विभागीय प्रमुखों को भी जिम्मेदार ठहराया है. संकेत मिले हैं कि आगे से ऐसी लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है.

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कर्मचारियों की परेशानी और उनकी मांग

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वेतन रोके जाने से प्रभावित कर्मचारियों का कहना है कि कई बार तकनीकी कारणों से पोर्टल ठीक से काम नहीं करता, जिससे विवरण अपलोड नहीं हो पाया. कुछ कर्मचारियों ने यह भी कहा कि जिनके पास ज्यादा संपत्ति है, उनके लिए पूरी जानकारी अपलोड करना थोड़ा मुश्किल हो गया. कर्मचारियों ने सरकार से थोड़ी और मोहलत देने की मांग की है. उनका कहना है कि वेतन रुकने से घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो सकता है, खासकर उन कर्मचारियों के लिए जिनकी आमदनी का यही एकमात्र जरिया है.

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