'करना पड़ा संविधान संशोधन', CDS बोले- ऑपरेशन सिंदूर ने मचाई ऐसी तबाही, पूरा सिस्टम बदलने पर मजबूर हुआ पाकिस्तान
CDS जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दबाव में पाकिस्तान को संविधान संशोधन करने पड़े, जो उसकी सैन्य व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है.
10 Jan 2026
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Updated:
10 Jan 2026
09:39 AM
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CDS Anil Chauhan (File Photo)
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भारत के प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (CDS) जनरल अनिल चौहान ने पाकिस्तान को लेकर एक अहम और दूरगामी संकेत देने वाला बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने पाकिस्तान को अपने संविधान में संशोधन करने के लिए मजबूर कर दिया, जो इस बात की साफ स्वीकारोक्ति है कि उस ऑपरेशन के दौरान पड़ोसी देश की सैन्य और प्रशासनिक व्यवस्था में गंभीर खामियां सामने आईं. पुणे पब्लिक पॉलिसी फेस्टिवल को संबोधित करते हुए जनरल चौहान ने कहा कि पाकिस्तान में हाल ही में जल्दबाजी में किए गए संवैधानिक बदलाव इस बात का प्रमाण हैं कि वहां सब कुछ ठीक नहीं रहा.
ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है
जनरल चौहान ने स्पष्ट किया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि फिलहाल केवल थमा है. उनके इस बयान को रणनीतिक हलकों में बेहद अहम माना जा रहा है. उन्होंने कहा कि किसी भी देश का संविधान उसकी सैन्य और राजनीतिक सोच को दर्शाता है और पाकिस्तान द्वारा किए गए बदलाव उसकी आंतरिक अस्थिरता की ओर इशारा करते हैं.सीडीएस ने पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 243 में किए गए संशोधनों पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने ‘जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी’ के अध्यक्ष का पद समाप्त कर दिया है और उसकी जगह ‘चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस’ यानी सीडीएफ का नया पद बनाया गया है. खास बात यह है कि यह पद केवल थल सेना प्रमुख यानी सीओएएस के पास ही रहेगा. जनरल चौहान के अनुसार यह संयुक्त कमान के मूल सिद्धांत के बिल्कुल खिलाफ है, क्योंकि इससे सभी सैन्य शक्तियां एक ही हाथ में सिमट जाती हैं.
पाकिस्तान की मंशा आई सबके सामने
जनरल अनिल चौहान ने आगे कहा कि पाकिस्तान ने ‘नेशनल स्ट्रेटजी’ कमान और ‘आर्मी रॉकेट फोर्स’ कमान बनाकर शक्तियों का और अधिक केंद्रीकरण कर दिया है. अब पाकिस्तान का थल सेना प्रमुख न केवल जमीनी सैन्य अभियानों के लिए, बल्कि संयुक्त सैन्य कार्रवाइयों और परमाणु मामलों के लिए भी जिम्मेदार होगा. यह व्यवस्था संतुलन के बजाय नियंत्रण पर ज्यादा जोर देती है. जनरल चौहान के मुताबिक, ये सभी बदलाव पाकिस्तान की उस मानसिकता को दर्शाते हैं, जिसमें केवल थल सेना को प्राथमिकता दी जाती है और बाकी संस्थाओं की भूमिका सीमित कर दी जाती है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का केंद्रीकरण लंबे समय में किसी भी देश की सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर कर सकता है.
बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत की ओर से सिंधु जल संधि को लेकर भी सख्त रुख अपनाया गया है. पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि यह संधि फिलहाल स्थगित है और तब तक स्थगित रहेगी, जब तक पाकिस्तान विश्वसनीय तरीके से सीमा पार आतंकवाद को बंद नहीं करता. बता दें जनरल अनिल चौहान का बयान यह संकेत देता है कि भारत न केवल सैन्य मोर्चे पर सतर्क है, बल्कि रणनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर भी पाकिस्तान की हर गतिविधि पर गहरी नजर बनाए हुए है.
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