UP में ब्लड बैंकों का बनेगा नेटवर्क, जरूरतमंदों को समय पर मिलेगा हर ग्रुप का रक्त

UP: अधिक से अधिक लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करने हेतु विभिन्न स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे. यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे उत्तर प्रदेश में लागू किया जाएगा, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा.

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06 Jan 2026
( Updated: 06 Jan 2026
03:57 AM )
UP में ब्लड बैंकों का बनेगा नेटवर्क, जरूरतमंदों को समय पर मिलेगा हर ग्रुप का रक्त
Image Source: Social Media

Blood Banks will be Established in UP: उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के सभी मंडलों में ब्लड बैंकों का एक मजबूत और समन्वित नेटवर्क तैयार करने जा रही है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि थैलेसीमिया, हीमोफीलिया जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों के साथ-साथ अन्य जरूरतमंदों को भी समय पर और आसानी से हर रक्त समूह का ब्लड उपलब्ध कराया जा सके. नेटवर्क बनने के बाद किसी एक ब्लड बैंक में रक्त की कमी और दूसरे में रक्त के एक्सपायर होने जैसी समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी. इससे रक्त का बेहतर उपयोग होगा और मरीजों को अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा.

प्रदेश में ब्लड बैंकों की मौजूदा स्थिति


प्रदेश में इस समय लगभग 400 ब्लड बैंक कार्यरत हैं, जिनमें से 105 सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में संचालित हो रहे हैं. उत्तर प्रदेश में हर साल करीब 25 लाख यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है. इसमें से लगभग 30 प्रतिशत रक्त स्वैच्छिक रक्तदान के माध्यम से प्राप्त होता है, जबकि शेष रक्त मरीजों के परिजन या परिचितों द्वारा डोनेट किया जाता है. इसके अलावा प्रदेश में करीब 36 थैलेसीमिया और हीमोफीलिया उपचार केंद्र भी हैं, जहां इन बीमारियों से पीड़ित मरीजों को औसतन हर 21 दिन में एक यूनिट रक्त चढ़ाना पड़ता है.

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रक्त की कमी और बर्बादी की समस्या


अभी की व्यवस्था में यह देखा गया है कि कई ब्लड बैंकों में कुछ विशेष रक्त समूहों का रक्त जरूरत से ज्यादा जमा हो जाता है, जो समय पर उपयोग न होने के कारण एक्सपायर होकर नष्ट करना पड़ता है. वहीं दूसरी ओर, कई ब्लड बैंकों में निगेटिव ब्लड ग्रुप जैसे दुर्लभ समूहों की लगातार कमी बनी रहती है. इसी असंतुलन को दूर करने और रक्त की बर्बादी रोकने के लिए ब्लड बैंकों को आपस में जोड़ने का निर्णय लिया गया है, ताकि जरूरत के अनुसार एक ब्लड बैंक से दूसरे ब्लड बैंक तक रक्त आसानी से पहुंचाया जा सके.

लखनऊ मंडल से होगी शुरुआत

इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत पहले चरण में लखनऊ मंडल से की जा रही है. लखनऊ मंडल के अंतर्गत आने वाले हरदोई, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, सीतापुर और उन्नाव जिलों के सभी ब्लड बैंकों को इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा. इस पूरे कार्य के लिए राम सागर मिश्र संयुक्त चिकित्सालय, साढ़ामऊ के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके शर्मा को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है. डॉ. शर्मा इससे पहले डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के ब्लड बैंक के प्रभारी भी रह चुके हैं, जिससे उनके अनुभव का लाभ इस योजना को मिलेगा.

बेहतर समन्वय और जागरूकता पर जोर


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अपर निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता के अनुसार, इस नए प्रयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर मरीज को उसके ही जिले में आसानी से आवश्यक रक्त उपलब्ध हो सके. इसके लिए नोडल अधिकारी ब्लड बैंकों की कार्यप्रणाली में सुधार करेंगे और उनके बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेंगे. साथ ही, अधिक से अधिक लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करने हेतु विभिन्न स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे. यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे उत्तर प्रदेश में लागू किया जाएगा, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा.

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