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पूर्वोत्तानासन से मजबूत बनेंगे हाथ-कंधे और कमर, जानें इसके फायदे और नुकसान
पूर्वोत्तानासन का अभ्यास करने से पेट में दबाव पड़ता है, जिससे पेट की मांसपेशियां मजबूत बनती है और पेट के आसपास जमी चर्बी भी कम होने लगती है. इसी के साथ ही, पूर्वोत्तानासन शरीर के लचीलेपन को बढ़ाता है, जिससे ऊर्जा का संचार होता है.
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योग शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने का रामबाण उपाय है. यह शरीर को स्ट्रेच करके सभी तरह की शारीरिक समस्याओं से निजात पाने में मदद भी करता है. इन्हीं आसनों में एक पूर्वोत्तानास भी है, जो बाजुओं, कंधों, कमर और पैरों को मजबूत बनाने के साथ-साथ आत्मविश्वास भी बढ़ाता है.
क्या है पूर्वोत्तानासन?
पूर्वोतानासन का नाम दो शब्दों के मेल से बना है 'पूर्व', और 'उत्तान'. 'पूर्व' यानी 'पूर्व दिशा' या 'शरीर का अगला हिस्सा', और 'उत्तान' का मतलब है 'खिंचा हुआ'. इस आसन से आपका स्वास्थ्य अच्छा होता है और तनाव से भी मुक्त रहते हैं.
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हाथों और कंधों को बनाता है मजबूत
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आयुष मंत्रालय ने इसे एक महत्वपूर्ण योगासन बताया है. उनके अनुसार, यह एक ऐसा योगासन है, जो शरीर के पूरे भार को हाथों और पैरों पर संतुलित करके, मुख्य रूप से हाथों, कलाई, पीठ, जांघों और कंधों की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है. यह आसन शरीर में ऊर्जा का संचार, रीढ़ की हड्डी में लचीलापन और पेट की मांसपेशियों को बेहतर बनाता है.
रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन में मदद
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पूर्वोत्तानासन का अभ्यास करने से पेट में दबाव पड़ता है, जिससे पेट की मांसपेशियां मजबूत बनती है और पेट के आसपास जमी चर्बी भी कम होने लगती है. इसी के साथ ही, पूर्वोत्तानासन शरीर के लचीलेपन को बढ़ाता है, जिससे ऊर्जा का संचार होता है.
इसके रोजाना अभ्यास करने से पीठ दर्द और सिरदर्द में आराम मिलता है, पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और कमर दर्द में राहत बनी रहती है. साथ ही, ब्लड सर्कुलेशन की वजह से सिरदर्द भी कम होता है.
पीठ और कमर को मिल सकती है मजबूती
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आयुर्वेद के अनुसार, यह शरीर में लचीलापन बढ़ाता है. साथ ही, यह शरीर की मांसपेशियों में भी लचीलापन लाता है और शरीर में ऊर्जा का संचार भरता है, तथा दिमाग भी तेज चलता है.
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आसन को करने के दौरान शरीर का भार हाथों और कलाइयों पर होता है. इसलिए कलाई में चोट वाले लोगों को इस आसन से बचना चाहिए. इसके अलावा, गर्दन की किसी भी चोट से पीड़ित लोगों को या तो इस आसन को करने से पूरी तरह बचना चाहिए या आसन का अभ्यास करते समय कुर्सी का सहारा लेना चाहिए.