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हर वक्त थका हुआ महसूस करती हैं? इसे सामान्य कमज़ोरी ना समझें, ये हो सकते हैं असली कारण

किसी भी समस्या के शुरूआती लक्षण छोटे छोटे होते हैं जिनपर अक्सर हमारा ध्यान नहीं जाता। इन्हें हम सामान्य कमजोरी या काम का तनाव मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की माने तो ये कोई आम थकान नहीं, एनीमिया या थायरॉइड विकार भी हो सकता है जो शरीर में पोषक तत्वों की कमी की वजह से होता है।

Image Credit: ChatGPT
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पूरी रात आराम से सोने के बावजूद ऐसा लगता है की नींद पूरी नहीं हुई? दिनभर थका हुआ महसूस करती हैं? सिर में दर्द, जोड़ों में हल्का दर्द, आलस, रोजमर्रा के कामकाज भी बोझ जैसा लगना, अगर आपके साथ लगभग रोज़ ऐसा हो रहा है तो सावधान जाइए। ये लक्षण आपके जीवनशैली को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। 

मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है हमारे शरीर के अंदर चल रही समस्याओं के चलते ऐसे बाहरी लक्षण दिखाई देते हैं। किसी भी समस्या के शुरूआती लक्षण छोटे छोटे होते हैं जिनपर अक्सर हमारा ध्यान नहीं जाता। इन्हें हम सामान्य कमजोरी या काम का तनाव मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों की माने तो ये कोई आम थकान नहीं, एनीमिया या थायरॉइड विकार भी हो सकता है जो शरीर में पोषक तत्वों की कमी की वजह से होता है। 

छोटी छोटी तकलीफों को सामान्य समझकर न टालें 

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महिलाएं अक्सर ऐसी छोटी छोटी तकलीफों को 'सामान्य' मानकर टाल देती हैं। लेकिन यहीं अनदेखी आगे चलकर किसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है। हाल ही में बेल्जियम की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी की रिसर्च में पाया गया की महिलाओं की Immunity पुरुषों के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत होती है। इसके बावजूद वो जीवन भर क्रोनिक और पीड़ादायक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझती रहती हैं। 

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कमर के निचले हिस्से का दर्द दुनियाभर की महिलाओं को बहुत बड़े स्तर पर प्रभावित कर रहा है। आमतौर पर इसे दिनभर काम करने की थकान मान लिया जाता है लेकिन इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे हड्डियों का कमज़ोर होना, रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव और शरीर को सही पोषण और आराम न मिलना। 

वर्कप्लेस में सपोर्ट ना मिलने पर बर्नआउट का खतरा 50 प्रतिशत अधिक

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राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़े कहते हैं की भारत में 57 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। ये महिलाएं 15 से 49 वर्ष तक की उम्र में आती हैं, जो प्रजनन काल होता है। इस समस्या का एक कारण समय पर उचित चिकित्सीय सहायता नहीं मिलना भी है। आजकल की महिलाएं घर भी संभाल रही हैं और बाहर का काम भी। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन कहता है की जिन महिलाओं को वर्कप्लेस में सपोर्ट नहीं मिलता, उनमें बर्नआउट का खतरा 50 प्रतिशत अधिक रहता है।

अपने लिए समय निकालें 

आज की व्यस्त ज़िंदगी में अपने लिए समय निकालना बहुत ज़रूरी है। अपनी सेहत को प्राथमिकता दें, एक्सरसाइज, योग या वॉक को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। कसरत करने से रक्तसंचार और ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है, पाचन तंत्र में सुधार होता है, प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार होता है और मानसिक सेहत को भी बेहतर बनाता है। 

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इसके अलावा जंक फूड या बाहर के खाने की आदत को बदलें। हरी सब्जियां, फल, दालें, दूध, नट्स को अपने आहार में शामिल करें। अपने खाने का समय 
निर्धारित करें और कंट्रोल्ड पोरशन में ही खाना खाएं। आपका खाना पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए। 

अगर नियमित रूप से कसरत करने की या टहलने की आदत डालेंगे तो रात को नींद भी अच्छी आएगी। बिस्तर पर लेटने के बाद भी देर रात तक मोबाइल स्क्रीन या टीवी पर लगे रहने की आदत से भी दूरी बना लें। अच्छी और गहरी नींद के लिए यह बेहद जरूरी है कि सोने से एक घंटे पहले गैजेट्स का इस्तेमाल बंद कर दें। 

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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और जागरूकता के उद्देश्य से है. प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं. इसलिए, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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