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सुप्रीम कोर्ट में किसने लगाए शेम-शेम के नारे? जजों ने लगा दी फटकार, प्रदर्शनकारियों की हिरासत से जुड़ा मामला
जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने मामले में सुनवाई की. इस दौरान उन्होंने वकीलों की नारेबाजी पर कड़ा ऐतराज जताया.
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR से जुड़े मामले को लेकर रविवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों और वकीलों को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ शीर्ष अदालत ने सुनवाई की. जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को विशेष परिस्थितियों के तहत छुट्टी के दिन सुनवाई की.
कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकीलों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए. इस दौरान अदालत में उस वक्त संसद जैसी स्थिति बन गई जब वकीलों ने शेम-शेम के नारे लगाए. हालांकि जजों ने वकीलों के इस व्यवहार पर नाराजगी जताई और उनसे अनुशासन बनाए रखने की अपील की.
जजों ने याद दिलाई मामले की गंभीरता
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जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने मामले में सुनवाई की. इस दौरान उन्होंने वकीलों की नारेबाजी पर कड़ा ऐतराज जताया. बेंच ने कहा, अदालत रविवार को विशेष परिस्थितियों में बैठी है और वकीलों को मामले की गंभीरता समझनी चाहिए.
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वकीलों ने मांगी माफी
दरअसल, अदालत की कार्यवाही के दौरान कुछ वकीलों ने जल्दबाजी में अपनी बात रखनी चाहिए. उन्होंने बिना अपनी बारी आए ही बोलने की कोशिश की. ऐसा करने पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने उन्हें टोका, जिसके बाद वकील शेम-शेम के नारे लगाने पड़े. वकीलों के इस रुख पर जजों ने नाराजगी जताई को साथी और सीनियर वकीलों ने उनकी तरफ से माफी मांगी.
वकीलों ने जंतर-मंतर पर पुलिस हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई पर सवाल उठाए. इस दौरान उन्होंने दिल्ली में लगी पाबंदियों पर भी सवाल उठाए.
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वकीलों के साथ मारपीट के आरोप
सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रख रहे वकीलों ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने शीर्ष अदालत से लोगों की आवाजाही को फिर से सामान्य करने के लिए बैरिकेड हटाने की मांग की. वकीलों ने यह भी कहा कि प्रदर्शन स्थल के आस-पास बिना बैज वाले पुलिसकर्मियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाए. इस दौरान वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने आरोप लगाए कि उनके साथी वकील के साथ थाने में मारपीट की गई है. इस पर बेंच ने कहा कि वे इन बातों पर विचार करेंगे.
वहीं, एक महिला वकील के शांतिपूर्ण मार्च के दौरान हिरासत में लिए जाने का मामला भी कोर्ट में आया. वकील राजेश खन्ना ने कहा कि दिल्ली के बाहर से आए आम लोगों को हिरासत में लिया गया. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए जरूरत से ज्यादा कदम उठाए गए.
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शांतिपूर्ण विरोध मौलिक अधिकार- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में मेट्रो और रेलवे सेवाओं के सामान्य संचालन, इंटरनेट कनेक्टिविटी की बहाली और नागरिकों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. अदालत ने यह भी साफ किया कि वकीलों को उनके पेशेवर कार्यों के निर्वहन में किसी तरह की बाधा नहीं पहुंचाई जानी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने न्यायपालिका के प्रति आभार जताया. उन्होंने कहा कि इस आदेश से देश के लोगों और पेशेवरों का न्याय व्यवस्था में भरोसा फिर से कायम हुआ है.
सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई अदालत के आदेश का कथित उल्लंघन करते हुए मेट्रो स्टेशन बंद करने और ट्रेनों को रद्द किए जाने के आरोपों से जुड़ी अवमानना याचिका पर हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने विभिन्न सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित करने और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के संबंध में निर्देश जारी किए. कपिल सिब्बल ने कहा,
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‘हम भारत के सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के लिए बहुत आभारी हैं. जिसने देश के लोगों और पेशेवरों का देश की न्याय व्यवस्था में भरोसा फिर से कायम किया है.’
ट्रेनों का संचालन होगा सामान्य
दिल्ली के बाहर से आने वाली ट्रेनों को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर सामान्य रूप से रुकने देने के संबंध में भी निर्देश दिए गए हैं. अदालत ने दिल्ली में नागरिकों की आवाजाही पर लगाई गई पाबंदियों को हटाने के निर्देश भी दिए. आवाजाही पर लगी इन पाबंदियों के कारण लोगों को शहर में आने-जाने में परेशानी हो रही थी.
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कैलाश मोरे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को नागरिकों का मौलिक अधिकार माना है. उन्होंने बताया कि लोग बिना हथियार के और कानून के दायरे में रहकर विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं.
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उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को कानून में निर्धारित उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना हिरासत में नहीं लिया जा सकता. उनके अनुसार, अदालत ने हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई के संबंध में भी निर्देश दिए हैं.