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'मुस्लिम-सिख धर्म पर भी बनाकर दिखाओ ऐसी फिल्म', मुकेश खन्ना का फिल्ममेकर्स पर तीखा हमला
Mukesh Khanna: केश खन्ना धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक कहानियों को नए अंदाज में दिखाने के नाम पर उनमें बदलाव किए जाने से बिल्कुल खुश नहीं हैं. उनका मानना है कि दर्शकों, खासकर आज की युवा पीढ़ी को पसंद आने के लिए रामायण और महाभारत जैसी कहानियों का असली रूप बदलना सही नहीं है.
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Mukesh Khanna: बॉलीवुड के जाने-माने एक्टर और 'शक्तिमान' के नाम से घर-घर में पहचान बनाने वाले मुकेश खन्ना एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं... इस बार उन्होंने फिल्म 'आदिपुरुष' के निर्देशक ओम राउत के साथ-साथ फिल्म के लेखक पर भी निशाना साधा है... मुकेश खन्ना धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक कहानियों को नए अंदाज में दिखाने के नाम पर उनमें बदलाव किए जाने से बिल्कुल खुश नहीं हैं....उनका मानना है कि दर्शकों, खासकर आज की युवा पीढ़ी को पसंद आने के लिए रामायण और महाभारत जैसी कहानियों का असली रूप बदलना सही नहीं है... उन्होंने फिल्म बनाने वालों से सवाल किया है कि आखिर आधुनिकता के नाम पर हमारी पुरानी कहानियों और इतिहास के साथ कब तक बदलाव किए जाते रहेंगे....?
'आज के बच्चों के लिए क्या महाभारत बदल देंगे?'
मुकेश खन्ना ने 'आदिपुरुष' के मेकर्स की सोच पर सवाल उठाते हुए कहा उन्होंने फिल्म को आज के बच्चों और लोगों के लिए बनाने की बात कही थी. लेकिन एक्टर का सवाल है कि क्या दर्शकों को पसंद आने के लिए महाभारत और इतिहास को बदल देना सही है?
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उन्होंने कहा, "मैं आदिपुरुष के निर्देशक ही नहीं, बल्कि उसके लेखक की भी बहुत आलोचना करूंगा. उन्होंने खुद को समझाने की बहुत कोशिश की कि वह फिल्म आज के बच्चों के लिए बना रहे हैं. लेकिन क्या आज के लोगों के लिए महाभारत बदल जाएगी?"
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अपनी बात समझाने के लिए उन्होंने परिवार का उदाहरण भी दिया. मुकेश खन्ना के मुताबिक, अगर उनके परदादा टोपी या हैट पहनते थे और उनका रहन-सहन अलग था, तो क्या आज की पीढ़ी को पसंद आने के लिए वह अपने परदादा का पूरा व्यक्तित्व बदल देंगे? उनके कहने का मतलब साफ है कि पुरानी चीजों को नए तरीके से दिखाया जा सकता है, लेकिन उनकी असल पहचान के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए.
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अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर बदलाव पर उठाए सवाल
मुकेश खन्ना ने फिल्मकारों के अभिव्यक्ति की आजादी वाले तर्क पर भी नाराजगी जताई. मुकेश खन्ना ने कहा कि हिंदू धर्म के ग्रंथों और धार्मिक कहानियों के साथ इस तरह की छेड़छाड़ करना बहुत आसान समझ लिया गया है. वह पहले भी कई बार इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं.
उनका कहना है कि जब कोई इस तरह के बदलावों पर सवाल उठाता है, तो फिल्म बनाने वाले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देने लगते हैं. मुकेश खन्ना ने इस तर्क पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आस्था से जुड़े विषयों पर बात करते समय जिम्मेदारी भी होनी चाहिए; मुकेश खन्ना ने आगे कहते हुए बोले- वे हमेशा अपनी बात का बचाव करने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सहारा लेते हैं. मैं कहता हूं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता गई भाड़ में, अगर आपको अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, तो मुस्लिम धर्म के खिलाफ भी ऐसा करके दिखाइए. सिख धर्म का मजाक उड़ाकर दिखाइए, ईसाई धर्म का मजाक उड़ाकर दिखाइए, वहां ऐसा करने पर आपकी गर्दनें कटने का डर होता है, इसलिए आप ऐसा नहीं करते, लेकिन हिंदू धर्म के मामले में आपको लगता है कि कोई कुछ नहीं करेगा.
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करणी सेना को फिल्म दिखाने की भी दी सलाह
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मुकेश खन्ना ने इस दौरान फिल्म 'पद्मावती' को लेकर हुए विवाद का भी जिक्र किया. उनका सुझाव है कि किसी फिल्म को लेकर विवाद होने की आशंका हो, तो रिलीज से पहले करणी सेना जैसे विरोध करने वाले संगठनों को फिल्म दिखाकर बातचीत करनी चाहिए. इससे गलतफहमियां दूर हो सकती हैं और विवाद को बढ़ने से रोका जा सकता है.
एक्टर का यह भी मानना है कि कई बार फिल्मों को लेकर खूब बहस और विरोध होता है, लेकिन आखिर में फिल्म रिलीज हो जाती है। इस पूरी बहस से फिल्म को मुफ्त में प्रचार भी मिल जाता है. इसलिए अब वह फिल्मों पर ज्यादा बोलने से बचना चाहते हैं.