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आज शाम 6 बजे से आरंभ होगी विश्व की सबसे कठोर साधना, आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज लेंगे मौन व्रत
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज आज शाम कठोर मौन व्रत लेंगे. इस दौरान साधना काल में आचार्य जी पूर्णतः निर्जल और निराहार रहेंगे.
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भगवान भोलेनाथ के प्रिय सावन मास की शुरुआत हो गई है. देश भर के लोगों ने पूरी श्रद्धा के साथ श्रावण के पवित्र महीने का स्वागत किया. इस अत्यंत आध्यात्मिक अवसर पर बाबा के अनन्य भक्त आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की विश्व की अत्यंत कठोर साधनाओं में से एक मानी जाने वाली तपस्या का शुभारंभ आज शाम 6 बजे से दक्षिण काली मंदिर में होगा.
हरिद्वार के दक्षिण काली मंदिर में होगी सबसे कठोर साधना
आपको बताएं कि साधना प्रारंभ होते ही महाराज श्री मौन व्रत धारण करेंगे और संपूर्ण साधना अवधि में पूर्णतः निर्जल एवं निराहार रहकर भगवान शिव की अखंड उपासना में लीन रहेंगे.
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यह तपस्या राष्ट्र की सुख-समृद्धि, विश्व शांति, सनातन धर्म की उन्नति तथा समस्त मानवता के कल्याण के लिए समर्पित है. कठोर तप, अटूट संकल्प और अनुशासन का यह अद्वितीय स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आस्था और प्रेरणा का केंद्र बनेगा.
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आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज लेंगे कठोर मौन व्रत
साधना के शुभारंभ के अवसर पर बड़ी संख्या में संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं के उपस्थित रहने की संभावना है. आयोजन समिति ने सभी भक्तों से निर्धारित व्यवस्था एवं अनुशासन का पालन करते हुए इस दिव्य तपस्या के साक्षी बनने का आग्रह किया है.
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सावन के पवित्र महीने की हुई शुरुआत
इस बीच सावन के पवित्र महीने का स्वागत करने के लिए शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है.
गुरुवार को देश भर के लोगों ने पूरी श्रद्धा के साथ सावन के पवित्र महीने का स्वागत किया. सुबह से ही हजारों भक्त भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने और उनका आशीर्वाद लेने के लिए शिव मंदिरों में जमा हुए.
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क्या है श्रावण मास की मान्यता?
सावन को श्रावण मास भी कहा जाता है. यह हिंदू पंचांग का पांचवां महीना है और पूरी तरह भगवान शिव की आराधना को समर्पित माना जाता है. मानसून के समय जुलाई और अगस्त में पड़ने वाला यह पवित्र महीना हिंदू धर्म में सबसे शुभ समयों में से एक है.
देश भर में लाखों भक्त व्रत रखकर, विशेष पूजा-अर्चना करके, मंदिरों में जाकर और तीर्थयात्रा करके इस महीने को मनाते हैं.
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मंदिरों में देखी जा रही हैं कतारें!
सावन की सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिव मंदिरों में पूजा-अर्चना और अनुष्ठान करते हुए देखे गए. कई प्रमुख मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं, जहां लोग पूरे उत्साह और आस्था के साथ धार्मिक समारोहों में शामिल हुए.
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावन के महीने में ही समुद्र मंथन हुआ था. मंथन के दौरान विष निकला, जिससे पूरी सृष्टि के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा.
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माना जाता है कि भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए उस विष को पी लिया और उसे अपने गले में ही रोक लिया, जिससे उनका गला नीला पड़ गया और उन्हें 'नीलकंठ' नाम मिला.
माता गौरी ने सावन महीने में ही भगवान भोलेनाथ के लिए की थी कठोर तपस्या!
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए सावन के महीने में ही कठोर तपस्या की थी. इसलिए, समृद्धि, वैवाहिक सुख और आध्यात्मिक कल्याण के लिए आशीर्वाद चाहने वाले भक्तों के लिए यह समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है.
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हर सोमवार को पूरे सावन व्रत रखते हैं श्रद्धालु
पूरे महीने भक्त भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए हर सोमवार को व्रत रखते हैं. ये व्रत इस विश्वास के साथ रखे जाते हैं कि सावन के दौरान की गई सच्ची प्रार्थनाओं से शांति, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है.
इस महीने में वार्षिक कांवड़ यात्रा भी होती है, जिसके दौरान कांवड़िये गंगा से पवित्र जल लेने के लिए लंबी पैदल यात्रा करते हैं और उसे वापस लाकर भगवान शिव के मंदिरों में शिवलिंग पर अर्पित करते हैं. सावन के दौरान भक्त नियमित रूप से शिव मंदिरों में जाकर शिवलिंग का पारंपरिक 'अभिषेक' करते हैं. इसके लिए दूध, शहद, दही, घी, जल और पवित्र बेलपत्र का इस्तेमाल किया जाता है, जिनका शिव पूजा में विशेष महत्व है.
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कई भक्त इस पवित्र महीने के दौरान वे शाकाहारी भोजन करते हैं और मांसाहारी भोजन से दूर रहते हैं.