कहां है महादेव और नंदी का ये रहस्यमयी मंदिर, यहां गायब हो जाता है भोलेनाथ को चढ़ाया जल, पाताल लोक से जुड़ा है कनेक्शन
महादेव का यह मंदिर 7वीं सदी का है और अपनी अनोखी वास्तुकला तथा रहस्यमयी घटनाओं के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है. यहां भक्तों द्वारा शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल गायब हो जाता है.
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कहते हैं कि भक्ति भाव से भगवान को तुलसी दल समर्पित करो या केवल जल वह जरूर से स्वीकार करते हैं. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में भी महादेव और उनके नंदी को समर्पित ऐसा ही एक प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर है, जहां मान्यता है कि शिवलिंग पर चढ़ाए जल को महादेव स्वीकार कर लेते हैं, इसी वजह से जल दिखता भी नहीं है.
क्यों भक्तों द्वारा शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल गायब हो जाता है
महादेव का यह मंदिर 7वीं सदी का है और अपनी अनोखी वास्तुकला तथा रहस्यमयी घटनाओं के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है. यहां भक्तों द्वारा शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल गायब हो जाता है. मान्यता है कि वह जल सीधे पाताल लोक में समा जाता है. इस वजह से इस मंदिर को पातालेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है.
पातालेश्वर महादेव मंदिर सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की प्राचीन सभ्यता, वास्तुकला और आध्यात्मिकता का जीवंत प्रमाण है.
मंदिर में भगवान शिव के साथ नंदी की प्रतिमा भी स्थापित है
यह मंदिर एक ही विशाल बेसाल्ट चट्टान को तराशकर बनाया गया है. मंदिर की दीवारें, खंभे और छत पर बेहद महीन नक्काशी और सुंदर वास्तुकला देखी जा सकती है. कल्चुरी काल में सोमराज नामक ब्राह्मण द्वारा इस मंदिर का निर्माण करवाया गया था. यह राष्ट्रकूट राजवंश के शासनकाल की उत्कृष्ट कृति मानी जाती है. मंदिर में भगवान शिव के साथ नंदी की प्रतिमा भी स्थापित है, जो इसकी खासियत है.
इस मंदिर को पाताल लोक का प्रतीक क्यों माना जाता है
सबसे बड़ा आकर्षण यहां का जलाभिषेक है. भक्त शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं, लेकिन वह जल नीचे नहीं गिरता और कहीं गायब हो जाता है. स्थानीय लोगों और भक्तों की मान्यता है कि यह जल पाताल लोक में पहुंच जाता है. यही वजह है कि इस मंदिर को पाताल लोक का प्रतीक भी माना जाता है. पातालेश्वर महादेव मंदिर शिव भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है.
कब यहां भक्तों की बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ती है
विशेष रूप से सावन मास और महाशिवरात्रि के दौरान यहां भक्तों की बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ती है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से जलाभिषेक करने और भोलेनाथ के आशीर्वाद लेने आते हैं. मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला का भी उत्कृष्ट नमूना है.
पातालेश्वर मंदिर के अलावा यहां कई अन्य स्थानों पर भी जा सकते
बिलासपुर घूमने आने वाले पर्यटक पातालेश्वर मंदिर के साथ-साथ आसपास के कई अन्य स्थानों पर भी जा सकते हैं. खुटाघाट बांध हरे-भरे वातावरण और शांत जल के लिए प्रसिद्ध है, जहां प्रकृति की गोद में शांति का अनुभव होता है. रतनपुर किला प्राचीन इतिहास और किंवदंतियों से भरा हुआ है. पास के बाजार क्षेत्र में स्थानीय हस्तशिल्प की वस्तुएं, स्मृतियां और पारंपरिक सामान खरीदे जा सकते हैं.
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