Advertisement

Loading Ad...

कहां है मां बगदाई मंदिर, यहां नारियल या फूल नहीं, भोग में मां को चढ़ते हैं 5 पत्थर, जानें क्या करने पूरी होती हैं मनोकामनाएं

मंदिर पहले जंगल में हुआ करता था और 100 साल से भी अधिक पहले एक चरवाहे को मां की जागृत प्रतिमा मिली थी. मां ने चरवाहे के सपने में दर्शन देकर प्रतिमा को स्थापित करने के लिए कहा था.

Image Credits:Maa Baghdai Temple/ facebook/Kiran Sahu
Loading Ad...

देशभर के देवी मंदिरों में माता रानी को फूल और फल अर्पित किए जाते हैं. ज्यादातर मंदिरों में नारियल और कुछ मंदिरों में बलि प्रथा आज भी चलती है, लेकिन क्या आप ऐसे देवी मंदिर के बारे में जानते हैं कि जहां मां को प्रसाद के रूप में पत्थर चढ़ाए जाते हैं, वो भी गिनती के पांच पत्थर?  

मंदिर में पांच पत्थर और एक फूल चढ़ाने की परंपरा 

आपको सुनकर हैरानी हो रही होगी, लेकिन यह सच है. मंदिर में मां की प्रतिमा के पास आपको ढेर सारे पत्थर देखने को मिल जाएंगे.छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में मां बगदाई मंदिर एक प्रसिद्ध और चमत्कारी मंदिर है. मंदिर छोटा है, लेकिन भक्तों के मन में मंदिर को लेकर आस्था बड़ी है. अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए भक्त दूर-दूर से दर्शन के लिए आते हैं. मंदिर में मां को नारियल नहीं, बल्कि पांच पत्थर और एक फूल चढ़ाने की परंपरा है, और इस परंपरा का पालन सदियों से होता आया है. माना जाता है कि मां बगदाई मंदिर वन की जागृत देवी है, जो सालों से वन और आस-पास रहने वाले लोगों की रक्षा कर रही है.

Loading Ad...

5 पत्थर चढ़ाने के पीछे क्या कहानी है?

Loading Ad...

स्थानीय लोक कथाओं के मुताबिक, मंदिर पहले जंगल में हुआ करता था और 100 साल से भी अधिक पहले एक चरवाहे को मां की जागृत प्रतिमा मिली थी. मां ने चरवाहे के सपने में दर्शन देकर प्रतिमा को स्थापित करने के लिए कहा था. चरवाहे ने मां को जंगल में एक जगह पर स्थापित किया और छोटा सा मंदिर बनवा दिया, लेकिन चरवाहे के पास मां को अर्पित करने के लिए कुछ नहीं था. उसने मां से रोते हुए अपनी दुविधा बताई और कहा, "मां, मेरे पास आपको भोग लगाने के लिए कुछ नहीं है." तब मां ने अवतरित होकर चरवाहे को 5 पत्थर चढ़ाने के लिए कहा था.

क्या करने से मां मनोकामना करती हैं पूरी 

Loading Ad...

मां ने चरवाहे से कहा कि वह किसी भोग की भूखी नहीं है, बल्कि भक्त के प्यार की भूखी है. यही कारण है कि तब से लेकर आज तक मंदिर में मां को पत्थरों का भोज लगता है. स्थानीय मान्यता है कि अगर कोई भी भक्त सच्चे मन से मां को पांच पत्थर और एक फूल अर्पित करता है और उसकी मनोकामना पूरी होती है, तो भक्त को दोबारा मंदिर में आकर 5 पत्थर और फूल अर्पित करने होते हैं.

कब मंदिर में भक्तों की भीड़ मिलती है

यह भी पढ़ें

मंदिर आज भी घने जंगलों के बीच है, जहां अध्यात्म और प्रकृति का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. चैत्र और शारदीय नवरात्रि में मां के मंदिर में हजारों की संख्या में भक्त पहुंचे हैं और नौ दिनों तक मां का भव्य शृंगार भी किया जाता है.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...