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कहां है गौमुख कुंड महादेव मंदिर, जहां प्रकृति निरंतर करती है शिवलिंग का जलाभिषेक
गौमुख कुंड महादेव मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है यहां का शिवलिंग, जिस पर साल के पूरे 12 महीने लगातार जलाभिषेक होता रहता है. यह जल किसी व्यक्ति द्वारा नहीं चढ़ाया जाता, बल्कि एक पत्थर की संरचना से निकलता है जिसका आकार गाय के मुख जैसा है.
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राजस्थान की धरती अपने इतिहास, किलों और वीरता की कहानियों के लिए जितनी मशहूर है, उतनी ही यहां की आस्था और रहस्यमयी धार्मिक जगहों के लिए भी जानी जाती है. इन्हीं में से एक बेहद खास और लोगों को आकर्षित करने वाली जगह है चित्तौड़गढ़ किले में स्थित गौमुख कुंड महादेव मंदिर. यह मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ का स्थान नहीं है, बल्कि ऐसा अनुभव देता है जहां आस्था, प्रकृति और रहस्य एक साथ मिलते हैं.
‘इस मंदिर की ओर बढ़ते हैं, तो माहौल धीरे-धीरे बदलने लगता है’
चित्तौड़गढ़ किला वैसे ही भारत के सबसे बड़े और ऐतिहासिक किलों में से एक माना जाता है. इसकी दीवारों में कई युद्धों, बलिदानों और शौर्य की कहानियां छिपी हुई हैं. लेकिन इसी किले के भीतर एक ऐसा स्थान भी है, जो पूरी तरह अलग अनुभव देता है. जब आप किले के अंदर गहराई में स्थित इस मंदिर की ओर बढ़ते हैं, तो माहौल धीरे-धीरे बदलने लगता है. शोर-शराबा पीछे छूट जाता है और एक शांत, ठंडी और रहस्यमयी हवा आपका स्वागत करती है.
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गौमुख कुंड महादेव मंदिर की सबसे बड़ी खासियत
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गौमुख कुंड महादेव मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है यहां का शिवलिंग, जिस पर साल के पूरे 12 महीने लगातार जलाभिषेक होता रहता है. यह जल किसी व्यक्ति द्वारा नहीं चढ़ाया जाता, बल्कि एक पत्थर की संरचना से निकलता है जिसका आकार गाय के मुख जैसा है. इसी वजह से इसे गौमुख कहा जाता है. इस पत्थर के मुख से पानी की एक पतली लेकिन लगातार बहती धारा सीधे शिवलिंग पर गिरती रहती है.
यहां जल किसी भूमिगत स्रोत से आता है
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कहा जाता है कि यह जलधारा कभी रुकती नहीं है. चाहे गर्मी हो, सर्दी हो या बारिश, यह पानी लगातार बहता रहता है. इसी कारण लोग इसे सिर्फ एक प्राकृतिक घटना नहीं मानते, बल्कि इसे आस्था और चमत्कार से जोड़कर देखते हैं. हालांकि, कई लोग कहते हैं कि यह जल किसी भूमिगत स्रोत से आता है, लेकिन आज तक यह पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है कि यह पानी आखिर लगातार आता कहां से है और कैसे बहता रहता है.
आप किसी और ही दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं
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मंदिर तक पहुंचने के लिए किले के अंदर कुछ सीढ़ियां और संकरी राहें पार करनी पड़ती हैं. यह रास्ता थोड़ा कठिन जरूर है, लेकिन जैसे-जैसे आप नीचे उतरते हैं, वैसे-वैसे आपको लगता है कि आप किसी और ही दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं. ऊपर की दुनिया की भागदौड़ और शोर धीरे-धीरे पीछे छूट जाता है और एक गहरी शांति आपके आसपास फैल जाती है.