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महाकुंभ हादसे के बाद योगी को सत्ता से हटाने की साजिश का सच ?

अब जब विपक्षी नेताओं से लेकर ख़ुद देश के शंकराचार्य योगी से उनके इस्तीफ़ा की माँग कर रहे हैं, तो ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या योगी को सत्ता से हटाए जाने की साज़िश रची जा रही है…सच क्या है , देखिये इस पर हमारी ये ख़ास रिपोर्ट

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नव्य, भव्य और दिव्य महाकुंभ में प्रसन्नता की जगह आँखों में आंसू होंगे, इस कल्पना से परे आज प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सवालों के घेरे में हैं। मौनी अमवस्या पर हुए भगदड़ में मारे गए लोगों की सूचना जैसे ही मुख्यमंत्री योगी ने दी, पूरी दुनिया ने उनके आँखों में आंसू देखे। जिस भावुकता से योगी ने महाकुंभ मेले में हुए हादसे की जानकारी दी, वह किसी से छिपी नहीं है। लेकिन अब जब विपक्षी नेताओं से लेकर ख़ुद देश के शंकराचार्य योगी से उनके इस्तीफे की माँग कर रहे हैं, तो ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या योगी को सत्ता से हटाए जाने की साज़िश रची जा रही है? सच क्या है, देखिए इस पर हमारी यह ख़ास रिपोर्ट।

महाकुंभ हादसे का मास्टर माइंड कौन?

विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक ग्लोबल इवेंट, सनातन की सबसे बड़ी पहचान, साधु-संतों का सबसे बड़ा जमावड़ा और मठाधीश से मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ की नेतृत्व शक्ति। महाकुंभ, जिसके आयोजन को लेकर पिछले साल से तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही थी। देश-दुनिया से 40 करोड़ लोगों के आने की उम्मीद की जा रही थी। डे वन से न सिर्फ योगी बाबा, बल्कि प्रशासन एक्शन मोड में काम कर रहा था, लेकिन मौनी अमावस्या के मौके पर आंधी रात में हुई भगदड़ में मारे गए लोगों के चलते योगी की पूरी सरकार सवालों के घेरे में आ गई। हालांकि ख़ुद सामने आए योगी बाबा ने यह जरूर कहा कि हमारे ऊपर सवाल उठेंगे, लेकिन हमारी सरकार और प्रशासन की ओर से इस हादसे से निपटने की कोशिश की गई है।

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हादसे को दो दिन बीत चुके हैं, योगी सरकार की तरफ़ से मुआवज़े का ऐलान हो चुका है, न्यायिक जांच के आदेश दिये जा चुके हैं। अब आगे इस तरह की भयावह स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए और भी ज़्यादा इंतज़ाम किए जा चुके हैं। फिर भी हादसे को लेकर योगी सरकार विपक्ष से लेकर देश के शंकराचार्य के निशाने पर है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बिना नाम लिए इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। बक़ायदा यह बयान दिया है:

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"जो लोग झूठा दावा कर रहे थे, उन्हें नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए अपना पद त्याग देना चाहिए। महाकुंभ का प्रबंधन तत्काल सेना को सौंप देना चाहिए।"

महाकुंभ हादसे में योगी सरकार को घेरने में अखिलेश यादव अकेले नहीं हैं, बल्कि अब ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने योगी सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। भगदड़ की घटना से नाराज़ शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि आपने 40 करोड़ की व्यवस्था की है और फिर घटना घटी, तो फिर विचार का विषय है। इतना ही नहीं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज सीएम योगी पर धोखाधड़ी का भी आरोप लगा रहे हैं। ये तक कह रहे हैं कि…

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"मुख्यमंत्री ने हमें धोखे में रखा कि घटना में कोई मौत नहीं हुई है।" उन्होंने कहा, "हिंदू धर्म में यह नियम है कि जब परिवार में किसी की मौत हो जाती है, विशेष रूप से इस तरह की परिस्थितियों में तो कोई भोजन नहीं करता है।"

हालांकि शंकराचार्य ने भावुकता में यह भी कहा कि

"आपने हमें ऐसा आभास करा दिया कि अफवाह चल रही है, कोई मौत नहीं हुई है। यह बहुत बड़ा धोखा है, संतों, सनातनियों और हम लोगों के साथ धोखा है। देश के सामने इतना बड़ा झूठ क्यों बोला, झूठा मुख्यमंत्री। उन्हें पद से इस्तीफा देना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा किसी भी योग्य व्यक्ति को योगी आदित्यनाथ की जगह मुख्यमंत्री बनाएं।"

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सौ बात की एक बात यह है कि महाकुंभ हादसे के बाद शंकराचार्य का ग़ुस्सा प्रशासन पर फूटा है और समय पर जानकारी न मिलने की वजह से भी वह क्रोधित हैं। लेकिन कुछ धर्माचार्य ऐसे हैं, जो हादसे के बाद भी योगी सरकार के साथ खड़े हैं। निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महा मंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी महाराज ने विपक्ष को सद्बुद्धि मिले, यह कहते हुए योगी सरकार का समर्थन करते हुए यह कहा है कि

"विपक्ष को यह ज्ञान होना चाहिए कि यह हादसा नहीं है, यह प्राकृतिक हादसा है। इस हादसे के बाद जो साधु संतों ने एकता और सहजता दिखाई है, यूपी सरकार और केंद्र सरकार के लिए, इसलिए विपक्ष को यह ज्ञान हो जाना चाहिए कि भारत के साधु संत सनातनी सरकार के साथ हैं।"

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सौ बात की एक बात यह है कि महाकुंभ हादसे के बाद देश का संत समाज दो धड़ों में बंट चुका है। अब यह आप पर है कि आप किनकी बातों का अनुसरण करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सवालों के कठघरे में खड़ा करते हैं या फिर योगी सरकार के साथ खड़े रहते हैं।

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