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19 जून 2026 का पंचांग: जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और स्कन्द षष्ठी का महत्व

धार्मिक दृष्टि से यह दिन इसलिए भी खास है क्योंकि शुक्रवार माता लक्ष्मी और संतोषी माता की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से पूजा-पाठ और दान-पुण्य करने से सुख-समृद्धि और परिवार में खुशहाली बनी रहती है.

Image Credits: AI generated
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हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है और बहुत से लोग किसी भी शुभ कार्य, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ से पहले पंचांग जरूर देखते हैं. ऐसे में 19 जून 2026 (शुक्रवार) का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से काफी खास माना जा रहा है. इस दिन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है, जो शाम 5:01 बजे तक रहेगी. इसके बाद षष्ठी तिथि शुरू हो जाएगी, जिसे स्कन्द षष्ठी के रूप में मनाया जाता है. 

19 जून का पंचांग

इस दिन सूर्योदय सुबह 5:09 बजे और सूर्यास्त शाम 6:52 बजे होगा. वहीं चंद्रमा का उदय सुबह 9:28 बजे और चंद्रास्त रात 10:42 बजे होगा. पंचांग के अनुसार इस दिन अश्लेषा नक्षत्र सुबह 10:08 बजे तक रहेगा. इसके बाद दूसरा नक्षत्र प्रभावी होगा.

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वहीं, हर्षण योग दोपहर 2:53 बजे तक रहेगा. इस योग को शुभ माना जाता है और मान्यता है कि इस दौरान किए गए कार्यों में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं. वहीं बव करण सुबह 5:54 बजे तक रहेगा. करण और योग को भी दैनिक जीवन और कार्यों की सफलता से जोड़कर देखा जाता है.

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जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और स्कन्द षष्ठी का महत्व

धार्मिक दृष्टि से यह दिन इसलिए भी खास है क्योंकि शुक्रवार माता लक्ष्मी और संतोषी माता की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से पूजा-पाठ और दान-पुण्य करने से सुख-समृद्धि और परिवार में खुशहाली बनी रहती है. इस दिन स्कन्द षष्ठी होने से कार्तिकेय की पूजा का भी विशेष महत्व है. भक्त इस दिन साहस, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा की कामना करते हैं.

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यदि आप किसी महत्वपूर्ण कार्य की योजना बना रहे हैं तो अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:33 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक रहेगा, जिसे शुभ माना जाता है. वहीं राहुकाल सुबह 10:17 बजे से 12:00 बजे तक, गुलिक काल सुबह 6:52 बजे से 8:34 बजे तक और यमघण्टकाल दोपहर 3:26 बजे से शाम 5:09 बजे तक रहेगा. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए.

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वहीं, इस दिन सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में विराजमान हैं. साथ ही दिशाशूल पश्चिम दिशा में रहेगा, इसलिए इस दिशा में यात्रा करते समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है.

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