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ज्योतिष पीठ शंकराचार्य महाकुंभ से लौटे अब, क्या पीएम मोदी से युद्ध करेंगे ?

प्रयागराज आकर योगी बाबा ने देश के चारों शंकराचार्य पर चुप्पी क्या तोड़ी, शंकराचार्य द्वारा पीएम मोदी को चेतावनी मिलनी शुरु हो गई। आख़िर किस बात को लेकर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पीएम मोदी को 2 हफ़्तों का अल्टीमेटम दे रहे हैं ? अब क्या शंकराचार्य बनाम प्रधानमंत्री की जंग होने जा रही है ?

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याचना नहीं अब रण होगा, संग्राम महाभीषण होगा, जगत गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के यही अल्फ़ाज दुनिया के कानों में उस वक़्त गूंजे, जब तिरुपति के लड्डू प्रसादम में सुअर की चर्बी मिलाए जाने की बात सामने आई। इस पूरे विवाद को लेकर देश का संत समाज आक्रोशित नज़र आया, लेकिन अब जब महाकुंभ संपन्न हो चुका है। संगम नगरी से संतों की वापसी हो चुकी है..ऐसे में युद्ध की रणभेरी बजने की तैयारी क्यों ? प्रयागराज आकर योगी बाबा ने देश के चारों शंकराचार्य पर चुप्पी क्या तोड़ी, शंकराचार्य द्वारा पीएम मोदी को चेतावनी मिलनी शुरु हो गई। आख़िर किस बात को लेकर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पीएम मोदी को 2 हफ़्तों का अल्टीमेटम दे रहे हैं ? अब क्या शंकराचार्य बनाम प्रधानमंत्री की जंग होने जा रही है ? 

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इस पूरे महाकुंभ में ज्योतिष पीठ शंकराचार्य ने डे वन से योगी सरकार को आगाह किया। सबसे पहले त्रिवेणी के जल पर सवाल उठाए। पूछा क्या गंगा आचमन और स्नान करने लायक़ है ? फिर मौनी अमावस्या पर हुए हादसे को लेकर योगी सरकार पर मृतकों का आँकड़ा छुपाये जाने का आरोप लगाया। प्रशासनिक व्यवस्थाओं से इस कदर क्रोधित हुए कि सीधे योगी को गद्दी से हटाए जाने की माँग कर डाली। ये भी कहा कि अपना किया भोगना पड़ेगा, 2027 में योगी आदित्यनाथ को नहीं जिताएंगे। और जब पूर्णिमा बीत गई, उसके बाद के महाकुंभ को सरकारी महाकुंभ बता दिया। मतलब साफ़ है कि इस पूरे महाकुंभ में योगी बाबा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के निशाने पर रहे लेकिन अब जब महाकुंभ ख़त्म हो चुका है, अविमुक्तेश्वरानंद महाराज अपने धाम लौटे गये है। तो एक बार फिर युद्ध की चिंगारी भड़क रही है..इस बार मुक़ाबला किसी और से नहीं, बल्कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हैं। गौ माता की ढाल बने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज एक्शन में हैं। पिछले साल राजधानी दिल्ली में गौ सांसदों की संसद आयोजित कीगो हत्या पर हमेशा के लिए प्रतिबंध लगाने के लिए गौ माता को पशु की श्रेणी से निकालकर राष्ट्रीय माता का दर्जा दिलाने के लिए भारत भ्रमण किये शंकराचार्य ने गौ प्रतिष्ठा आंदोलन का नेतृत्व किया। पिछले डेढ़-जो सालों से ज्योतिष पीठ शंकराचार्य गौ माता के अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं और अब जब मोदी सरकार की तरफ़ से कही कोई रिस्पांस नहीं है। बीफ़ बैन को लेकर सरकार की अस्पष्ट स्थिति है, ऐसे में एक्शन मोड़ में आए शंकराचार्य को 15 दिनों के ख़त्म होने का इंतज़ार है।  दरअसल गो हत्या पर प्रतिबंध और गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने पर फैसला लेने के लिए शंकराचार्य सरकार को 30 दिनों का समय दिये हुए हैं, जिसमें अब बस 15 दिनों का समय बाक़ी है। इन 15 दिनों में अगर शंकराचार्य की मार्गों पर सरकार की तरफ़ से कोई रिस्पोंस नहीं आता है, तो फिर सरकार के ख़िलाफ़ शंकराचार्य का रण दिखेगा। गोहत्या को लेकर सरकार को अल्टीमेटम दे चुके स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज खुलकर बोल चुके हैं।

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज  ने कहा "हम पिछले डेढ़ साल से गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने के लिए आंदोलन चला रहे हैं। अब हमने निर्णय लिया है कि हम 33 दिनों की पदयात्रा निकालेंगे। यह यात्रा 17 मार्च को दिल्ली जाकर खत्म होगी। ऐसे में केंद्र सरकार के पास फैसला लेने के लिए 33 दिनों का समय है। अगर वह कोई फैसला नहीं लेती है तो हम 17 मार्च को शाम पांच बजे के बाद कोई कड़ा निर्णय लेंगे।हम मान लेंगे की सरकार गौहत्या जारी रखना चाहती है।" 

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इन 15 दिनों में अगर सरकार द्वारा कोई फ़ैसला नहीं लिया जाता है, तो फिर एक्शन में आए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज क्या पीएम मोदी से युद्ध करते हुए नज़र आएँगे। शंकराचार्य के पद पर आसीन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती किस प्रकार से मोदी सरकार को गो हत्या पर रोक लगाने के लिए मजबूर कर सकती है..?

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