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कामदा एकादशी व्रत: भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए करें ये काम, नोट कर लें शुभ-अशुभ समय
चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी के रूप में जाना जाता है. इस दिन को अमलकी एकादशी भी कहा जाता है, जो अत्यंत शुभ और नारायण के आराधना के लिए उत्तम माना जाता है.
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सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है. इसके पांच अंगों तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वारके आधार पर ही दिन की शुरुआत की जाती है. साथ ही शुभ-अशुभ समय का निर्धारण किया जाता है. 29 मार्च को रविवार के दिन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है.
कब रखा जाएगा एकादशी व्रत
रविवार को एकादशी तिथि सुबह 7 बजकर 46 मिनट तक रहेगी. इसके बाद द्वादशी तिथि शुरू हो जाएगी. हालांकि, उदयातिथि (सूर्य उदय के समय जो तिथि हो) के अनुसार पूरे दिन एकादशी तिथि का ही मान होगा. चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी के रूप में जाना जाता है. इस दिन को अमलकी एकादशी भी कहा जाता है, जो अत्यंत शुभ और नारायण के आराधना के लिए उत्तम माना जाता है.
29 मार्च को कौनसा नक्षत्र रहेगा
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29 मार्च को सूर्योदय 6 बजकर 14 मिनट पर होगा जबकि सूर्यास्त 6 बजकर 37 मिनट पर होगा. पंचांग के अनुसार नक्षत्र अश्लेषा दोपहर 2 बजकर 38 मिनट तक रहेगा, उसके बाद मघा नक्षत्र शुरू होगा. योग धृति शाम 6 बजकर 20 मिनट तक रहेगा. करण विष्टि सुबह 7 बजकर 46 मिनट तक रहेगा.
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जानें शुभ मुहूर्त
इस दिन कई महत्वपूर्ण मुहूर्त हैं. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 42 मिनट से 5 बजकर 28 मिनट तक रहेगा. अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 1 मिनट से 12 बजकर 51 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 19 मिनट तक रहेगा. गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 36 मिनट से 6 बजकर 59 मिनट तक और सायाह्न संध्या 6 बजकर 37 मिनट से 7 बजकर 47 मिनट तक होगी. वहीं, अमृत काल दोपहर 1 बजकर 2 मिनट से 2 बजकर 38 मिनट तक रहेगा.
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जानें अशुभ मुहूर्त
अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल शाम 5 बजकर 4 मिनट से 6 बजकर 37 मिनट तक रहेगा, इसलिए इस समय किसी भी शुभ कार्य से बचना चाहिए. यमगंड दोपहर 12 बजकर 26 मिनट से 1 बजकर 59 मिनट तक, गुलिक काल शाम 3 बजकर 32 मिनट से 5 बजकर 4 मिनट तक रहेगा. दुर्मुहूर्त शाम 4 बजकर 58 मिनट से 5 बजकर 48 मिनट तक होगा. भद्रा सुबह 6 बजकर 15 मिनट से 7 बजकर 46 मिनट तक रहेगी. गंड मूल पूरे दिन रहेगा.
जानें कामदा एकादशी पर भगवान विष्णु को कैसे प्रसन्न करें
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कामदा एकादशी (29 मार्च 2026) पर भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए सुबह जल्दी स्नान कर, पीले वस्त्र पहनें और विष्णु-लक्ष्मी की पूजा करें. भगवान को पीले फूल, तुलसी दल, और केसरिया मिठाई का भोग लगाएं. 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का 108 बार जाप करें, तुलसी माता के सामने 11 दीपक जलाएं और कथा अवश्य सुनें.