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PM मोदी के शपथग्रहण के 48 घंटे बाद एक्शन में आ जाएंगे देश के चारों शंकराचार्य होगी बड़ी धर्म सभा
धर्म सभा से संसद तक शंकराचार्य से पीठाधीश्वर तक गौ माता से राष्ट्रीय माता तक साधु-संतों का उमड़ेगा सैलाब PM मोदी के 48 घंटे बाद एक बड़ा परिवर्तन करने की तैयारी में संत समाज।
इसमें कोई शक नहीं है कि लोकसभा के नतीजों ने पूरी दुनिया को चौंकाया है क्योंकि भाजपा को उम्मीद से कम सीटें मिली लेकिन विपक्षी पार्टियाँ एक साथ होकर भी सीटों के मामले में भाजपा की बराबरी नहीं कर पाई। विपक्षी अपनी हार को लेकर आत्मचिंतन वाली स्थिति में नहीं है, बल्कि इस बात से उत्साहित है कि मोदी सरकार 400 के आँकड़े को छू नहीं पाई। इन सबके बीच अब एक मज़बूत गठबंधन के साथ देश में एनडीए की सरकार बन रही है। जिसके सरदार कोई और नहीं बल्कि मोदी जी है। 9 जून के शपथग्रहण समारोह में मोदी जी तीसरी बार शपथ लेंगे लेकिन क्या आप जानते हैं, उनके शपथ लेते ही देश का संत समाज अपने एक्शन मोड़ में होगा। 9 जून के दो दिन दिन बाद यानी 11 जून को गुजरात के राजकोट में एक धर्म सभा का आयोजन होने जा रहा है। सनातन संस्थान सेवा ट्रस्ट द्नारा इस सम्मेलन में लगभग 5 हजार से ऊपर साधु-संत शामिल होंगे।
देश के चारों शंकराचार्य गोवर्द्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती शृंगेरी मठ से शंकराचार्य जगद्गुरु भारती तीर्थ ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज और शारदा मठ के सदानंद सरस्वती इन चारों शंकराचार्यों के साथ-साथ चार पीठाधीश, महामंडलेश्वर , कथावाचक और तमाम साधु-संत इस धर्म सभा में उपस्थित रहेंगे और इन सबकी की मौजूदगी में गाय को राष्ट्रीय माता का दर्जा दिलाने की माँग उठेगी। इस पर मंथन होगा, जो 3 घटों तक चलेगा। जिसका लाइव प्रसारण पूरी दुनिया देखेगी।इसके अलावा धर्म रक्षा से जुड़े जिन आठ मुद्दों पर भी गहन चर्चा होगी। उसमें सनातन धर्म का रक्षण और विकास, धर्म के विपरीत कार्यों पर प्रतिबंध लगाना, संतों की एकता, धर्म के साथ ज्यादा से ज्यादा लोगों को कैसे जोडा जाए, जहां पर भी अशांत धारा लागू हो ऐसे स्थान पर धर्म का प्रचार करना, नए मंदिरों का निर्माण करना, पुराने खंडित मंदिरों का पुनः निर्माण करना ये सब शामिल हैं। इसमें कोई शक नहीं, धर्म सभा से उठी आवाज़ संसद तक सुनाई देगीलेकिन ये देखना दिलचस्प होगा कि क्या आवाज़ मोदी जी के कानों तक पहुँचेगी अगर ऐसा होता है, तो तीसरी बार प्रधानमंत्री बनते ही मोदी जी संतों के इसी संकल्प को साकार कर सकते हैं।
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