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भगवान शिव के नटराज स्वरूप को समर्पित 10वीं शताब्दी का अद्भुत मंदिर, पर्यटकों का भी पसंदीदा स्थल

बरोली मंदिर परिसर गुर्जर-प्रतिहार काल की उत्कृष्ट कृति माना जाता है. इस पूरे परिसर में 9 मंदिर हैं, जिनमें मुख्य मंदिर घाटेश्वर महादेव को समर्पित है. यहां भगवान शिव नटराज रूप में विराजमान हैं.

भगवान शिव के नटराज स्वरूप को समर्पित 10वीं शताब्दी का अद्भुत मंदिर, पर्यटकों का भी पसंदीदा स्थल
Image Credits:IANS
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देश के कोने-कोने में देवाधिदेव महादेव के कई भव्य व दिव्य मंदिर स्थित हैं. राजस्थान राज्य में भी कई मंदिर हैं, जिनकी खूबसूरती के साथ ही निर्माण की कथा भी हैरत में डालती है. ऐसा ही एक भव्य मंदिर शिव के नटराज स्वरूप को समर्पित है, जिसका निर्माण 10वीं शताब्दी में हुआ था. 

महादेव के किस स्वरूप को समर्पित है ये मंदिर 

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित बरोली मंदिर परिसर (बड़ोली मंदिर) महादेव के नटराज स्वरूप को समर्पित एक प्राचीन और अद्भुत धार्मिक स्थल है. 10वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर न सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी शानदार वास्तुकला, नक्काशी और प्राचीन इतिहास के कारण पर्यटकों को भी आकर्षित करता है.

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इस पूरे परिसर में कितने मंदिर हैं

बरोली मंदिर परिसर गुर्जर-प्रतिहार काल की उत्कृष्ट कृति माना जाता है. इस पूरे परिसर में 9 मंदिर हैं, जिनमें मुख्य मंदिर घाटेश्वर महादेव को समर्पित है. यहां भगवान शिव नटराज रूप में विराजमान हैं. मंदिर की दीवारों पर देवी-देवताओं, पौराणिक कथाओं और रोजमर्रा के जीवन के दृश्यों को बारीक नक्काशी के साथ उकेरा गया है. ऊंचे शिखर, नक्काशीदार खंभे और जटिल मूर्तियां देखने वाले हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देती हैं.

भगवान शिव को कितने मंदिर समर्पित हैं

बरोली में कुल 9 मंदिर हैं. इनमें चार मंदिर भगवान शिव को समर्पित हैं, दो देवी दुर्गा को, जबकि बाकी मंदिर त्रिमूर्ति, विष्णु, गणेश और अन्य देवी-देवताओं को समर्पित हैं. परिसर में घाटेश्वर मंदिर, वामनावतार मंदिर, गणेश मंदिर, त्रिमूर्ति मंदिर, अष्टमाता मंदिर और शेषशयन मंदिर प्रमुख हैं. इन मंदिरों का निर्माण तीन अलग-अलग कालखंडों में हुआ था.

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कब भगवान नटराज की मूर्ति चोरी हो गई थी

ये मंदिर पत्थर की नक्काशी और वास्तुकला की दृष्टि से बेहद समृद्ध हैं. परिसर में प्रवेश करते ही प्राचीन काल की दिव्य ऊर्जा और शांति का अनुभव होता है. यहां की खुशबू और मंत्रोच्चार की ध्वनि वातावरण को और भी पवित्र बना देती है. खास बात है कि साल 1998 में बरोली मंदिर से भगवान नटराज की एक सुंदर पत्थर की मूर्ति चोरी हो गई थी, जो बाद में लंदन से बरामद की गई. यह घटना हैरत में डालती है.

फोटोग्राफी के शौकीन लोगों के लिए यह जगह खास है

बरोली मंदिर केवल तीर्थ स्थल ही नहीं, बल्कि पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित हो रहा है. यहां आने वाले पर्यटक प्राचीन वास्तुकला, शिल्पकला और शांत वातावरण का आनंद लेते हैं. फोटोग्राफी के शौकीन लोगों के लिए यह जगह और भी खास है. पुरानी पत्थर की दीवारों पर पड़ती रोशनी और परछाइयों का खेल बेहद खूबसूरत नजारा पेश करता है.

बरोली मंदिर घूमने का सबसे अच्छा समय क्या है

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मंदिर के आस-पास के आकर्षण की बात करें तो बरोली मंदिर चित्तौड़गढ़ किले, मीरा मंदिर और भैंसरोड़गढ़ वन्यजीव अभयारण्य के पास स्थित है. पर्यटक एक ही यात्रा में इतिहास, आस्था और प्रकृति का आनंद ले सकते हैं. वहीं, बरोली मंदिर घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक है, जब मौसम सुहावना रहता है. गर्मियों (अप्रैल से जून) में यहां बहुत गर्मी पड़ती है, इसलिए इस दौरान यात्रा से बचना चाहिए. 

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