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नेवी को मिले 3 स्वदेशी वॉरशिप: अंडरवॉटर एक भी टार्गेट नहीं होगा मिस, समुद्री गहराई में बनेंगे रक्षा कवच, जानें खासियत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने INS दूनागिरी, INS संशोधक और एंटी-सबमरीन INS अग्रय भारतीय नौसेना को सौंपी हैं. ये तीनों वॉरशिप मेड इन इंडिया हैं जो अंडरवॉटर दुश्मन को चकमा देकर पानी में ही खत्म कर देंगी.

Image Source- IANS
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Navy Warships Commissioning: भारत ने संकल्प लिया था कि अब हथियारों के मामले में देश पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा. पिछले एक दशक में आत्मनिर्भरता अभियान को नई रफ्तार मिली है. सेना के तीनों अंगों में स्वदेशी हथियारों को शामिल करने को प्राथमिकता दी जा रही है. इस ओर भारतीय नौसेना सबसे आगे दिखाई देती है.  

21 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ही दिन में तीन वॉरशिप भारतीय नौसेना में शामिल किए. खास बात यह रही कि तीनों वॉरशिप को देश में ही डिजाइन किया और बनाया गया है. इनका निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने किया है.

तीन स्वदेशी वॉरशिप कौनसे हैं? 

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INS दूनागिरी
INS संशोधक 
एंटी-सबमरीन INS अग्रय 

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INS दूनागिरी के बारे में जानें 

भारतीय नौसेना में शामिल हुए एडवांस स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस दूनागिरी का नाम हिमालय के द्रोणागिरी पर्वत से लिया गया है. INS दूनागिरी प्रोजेक्ट-17A का 5वां स्टील्थ फ्रिगेट वॉरशिप है.

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इसे नेवी के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है. दूनागिरी दुश्मन के रडार को चकमा देकर सटीक हमला करने में सक्षम है.INS दूनागिरी ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस है और सर्फेस, एयर और सबमरीन, तीनों तरह के खतरों का मुकाबला कर सकता है. 

INS दूनागिरी के कमिशनिंग कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन दिव्य आलोक ने बताया, यह अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट बेहद कम रडार क्रॉस-सेक्शन के साथ डिजाइन किया गया है, जिससे दुश्मन के लिए इसकी पहचान करना कठिन हो जाता है. जहाज अत्याधुनिक सेंसर, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और इंटीग्रेटेड वेपन सिस्टम से लैस है. 

INS अग्रय के बारे में जानें 

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एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट INS अग्रय आधुनिक समुद्री युद्ध क्षमता को नई मजबूती देगा. एक ओर दूनागिरी दुश्मन के रडार को चकमा देकर सटीक हमला करने में सक्षम है, वहीं अग्रय पानी के भीतर मौजूद खतरों का पता लगाकर उन्हें नष्ट करने की क्षमता रखता है. ये दोनों युद्धपोत वॉर और अंडरवॉटर स्ट्राइक क्षमताओं के क्षेत्र में भारतीय नौसेना की ताकत को कई गुना बढ़ाएंगे. 

'अग्रय' आधुनिक हथियारों और उन्नत सेंसर प्रणालियों से पूरी तरह लैस है. इस युद्धपोत की अचूक और मारक क्षमता को देखते हुए ही इसका इंसिग्निया महाभारत के महान योद्धा अर्जुन के 'गांडीव' धनुष को चुना गया है. 

आकार में छोटा दिखने के बावजूद यह जहाज आधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस एक घातक प्लेटफॉर्म है. 

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यह पोत दुश्मन की किसी भी पनडुब्बी को सटीकता से निशाना बनाने और समुद्र की सतह पर 'एसिमेट्रिक वॉरफेयर' से निपटने में पूरी तरह सक्षम है. 

इसके रक्षा बेड़े में स्वदेशी सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, अत्याधुनिक रॉकेट लॉन्चर और टॉरपीडो ट्यूब शामिल हैं. 

यह दुश्मन के टॉरपीडो को हवा में ही नाकाम करने के लिए इसमें उन्नत डिकॉय सिस्टम और एसिमेट्रिक वॉरफेयर के दौरान सुरक्षा के लिए स्टेबलाइज्ड रिमोट-कंट्रोल्ड गन लगाई गई है. इसकी खासियत ये है कि यह कभी टार्गेट मिस नहीं करता है. वॉर के समय इसकी ये ही खासियत भारत की शक्ति में इजाफा करेगी. 

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इस क्राफ्ट की खासियत है कि यह एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन, हल-माउंटेड सोनार वेरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है. यह जहाज 25 नॉट की रफ्तार से चल सकता है और तकरीबन 3,300 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम है. तटीय क्षेत्रों में यह 100 से 150 नॉटिकल मील तक दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगा सकता है. 

INS संशोधक की खासियत 

INS संशोधक का काम युद्ध लड़ना नहीं, बल्कि समुद्र का सर्वे करना है. यह 3300 टन वजनी जहाज गहरे समुद्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वे, समुद्री डेटा कलेक्शन और डिफेंस-सिविल यूज के लिए बनाया गया है. साथ में बंदरगाहों और समंदर के रास्तों का सर्वे करना भी इसका मुख्य काम है. 

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यह आत्मनिर्भर भारत अभियान का बेहतरीन उदाहरण है. यह आधुनिक सेंसर, मल्टी-बीम इको साउंडर और अन्य हाइड्रोग्राफिक उपकरणों से लैस है जो गहरे समुद्र के सटीक सर्वेक्षण के लिए डिजाइन किए गए हैं.

यह भी पढ़ें- DRDO की बड़ी सफलता: हवा में ही ढेर होंगी दुश्मन की बैलेस्टिक मिसाइल, मल्टी लेयर्ड डिफेंस सिस्टम का सफल टेस्ट

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यह जहाज भारतीय नौसेना की समुद्री सर्वेक्षण क्षमताओं को काफी मजबूत करेगा, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में, INS संशोधक स्वदेशी तकनीक, उच्च क्षमता और रणनीतिक महत्व वाला जहाज है, जो नौसेना को मजबूत बनाने के साथ-साथ Blue Economy और maritime security को सपोर्ट करेगा. 

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