अब सिख छात्र कृपाण और महिलाएं मंगलसूत्र पहनकर दे सकेंगी परीक्षा, हरियाणा सरकार ने जारी किए नए नियम

Haryana: हरियाणा सरकार का यह फैसला एक संतुलित और संवेदनशील पहल है. इससे एक ओर जहां परीक्षाओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनी रहेगी, वहीं दूसरी ओर सिख विद्यार्थियों और विवाहित महिला अभ्यर्थियों को अपने धार्मिक और सामाजिक अधिकारों के साथ परीक्षा देने का भरोसा मिलेगा.

Author
21 Jan 2026
( Updated: 21 Jan 2026
01:24 PM )
अब सिख छात्र कृपाण और महिलाएं मंगलसूत्र पहनकर दे सकेंगी परीक्षा, हरियाणा सरकार ने जारी किए नए नियम
Image Source: Social Media

Haryana: हरियाणा सरकार ने राज्य में होने वाली परीक्षाओं के दौरान छात्रों और अभ्यर्थियों को होने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए एक अहम कदम उठाया है. यह फैसला खास तौर पर सिख विद्यार्थियों और विवाहित महिला अभ्यर्थियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. अक्सर देखा जाता है कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा जांच के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ी चीजों को लेकर विवाद या असुविधा हो जाती है. इसी समस्या को खत्म करने के लिए सरकार ने साफ और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि परीक्षाएं भी सुचारु रूप से हों और अभ्यर्थियों के अधिकारों का भी सम्मान किया जा सके.

सिख अभ्यर्थियों को कृपाण रखने की अनुमति


सरकार के नए निर्देशों के अनुसार, सिख विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों को परीक्षा के दौरान कृपाण साथ ले जाने की अनुमति दी गई है. हालांकि इसके लिए कुछ जरूरी नियम तय किए गए हैं, ताकि सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे. निर्देशों में कहा गया है कि कृपाण की कुल लंबाई 9 इंच से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, जबकि उसकी धार यानी ब्लेड की लंबाई 6 इंच से अधिक नहीं होनी चाहिए. इसके साथ ही सिख अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से कम से कम एक घंटा पहले पहुंचें, ताकि सुरक्षा जांच और अन्य औपचारिकताएं समय पर पूरी हो सकें और परीक्षा में कोई बाधा न आए.

विवाहित महिलाओं को मंगलसूत्र पहनने की छूट

हरियाणा सरकार ने विवाहित महिला अभ्यर्थियों को भी बड़ी राहत दी है. अब उन्हें परीक्षा के दौरान मंगलसूत्र पहनने की अनुमति होगी. पहले कई बार सुरक्षा जांच के दौरान इसे हटाने को लेकर असुविधा होती थी, जिससे महिलाओं को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता था. नए निर्देशों के तहत, विवाहित महिला अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर कम से कम 30 मिनट पहले पहुंचने को कहा गया है, ताकि जरूरी जांच प्रक्रिया आराम से पूरी हो सके और उन्हें किसी तरह की जल्दबाजी या परेशानी न हो.

अदालतों के निर्देशों के बाद लिया गया फैसला

यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है, बल्कि दिल्ली उच्च न्यायालय और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के विभिन्न फैसलों के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है. अदालतों ने अपने आदेशों में साफ कहा है कि परीक्षाओं का संचालन निष्पक्ष और व्यवस्थित होना चाहिए, लेकिन इसके साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों का सम्मान भी जरूरी है। सरकार ने इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए यह दिशा-निर्देश तैयार किए हैं.

सभी विभागों को दिए गए सख्त निर्देश

राज्य सरकार ने सभी प्रशासनिक सचिवों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने विभागों, बोर्डों, निगमों, विश्वविद्यालयों और भर्ती एजेंसियों तक इन आदेशों को तुरंत पहुंचाएं. इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि परीक्षा ड्यूटी पर तैनात अधिकारी, पर्यवेक्षक और सुरक्षा कर्मी इन नियमों की पूरी जानकारी रखें. सरकार का साफ कहना है कि किसी भी अभ्यर्थी को अज्ञानता या गलतफहमी की वजह से परेशानी नहीं होनी चाहिए.

सम्मान और व्यवस्था का संतुलन


हरियाणा सरकार का यह फैसला एक संतुलित और संवेदनशील पहल है. इससे एक ओर जहां परीक्षाओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनी रहेगी, वहीं दूसरी ओर सिख विद्यार्थियों और विवाहित महिला अभ्यर्थियों को अपने धार्मिक और सामाजिक अधिकारों के साथ परीक्षा देने का भरोसा मिलेगा. यह कदम छात्रों के लिए तनाव कम करने और परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा मानवीय बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

Tags

Advertisement

टिप्पणियाँ 0

Advertisement
Podcast video
Startup का सच बताकर Abhishek Kar ने दे दिया करोड़पति बनने का गुरु मंत्र!
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें