योगी सरकार के प्रयासों का असर, देश के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में उभरा उत्तर प्रदेश
योगी सरकार ने स्टार्टअप्स को 35 करोड़ रुपये से ज्यादा की वित्तीय सहायता दी है. 88 मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेटर्स नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं.
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को नौकरी तलाशने वाले के बजाय रोजगार सृजित करने वाला उद्यमी बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है. सरकार की प्रभावी नीतियों, वित्तीय प्रोत्साहन और संस्थागत सहयोग के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश आज देश के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है.
प्रदेश में भारत सरकार की ओर से पंजीकृत स्टार्टअप्स की संख्या 24 हजार से अधिक हो चुकी है. वहीं, 3,500 से अधिक स्टार्टअप 'स्टार्ट-इन-यूपी' के अंतर्गत पंजीकृत हैं. यह उपलब्धि प्रदेश में नवाचार, तकनीकी विकास और उद्यमशीलता के तेजी से बढ़ते वातावरण को दर्शाती है.
डीप-टेक और अत्याधुनिक तकनीक पर विशेष फोकस
योगी सरकार ने प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति को संस्थागत स्वरूप देने के लिए 15 जुलाई 2020 को उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2020 अधिसूचित की थी. इसके तहत 10 हजार स्टार्टअप का इकोसिस्टम तैयार करने और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में कम से कम 100 इन्क्यूबेटर्स का नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया. स्टार्टअप क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों और युवाओं की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए सरकार ने 9 नवंबर 2022 को नीति का प्रथम संशोधन भी अधिसूचित किया. इसका उद्देश्य नवाचार को प्रोत्साहित करने के साथ युवाओं को उद्यम स्थापित करने के लिए बेहतर सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराना था.
प्रदेश सरकार स्टार्टअप इकोसिस्टम को केवल संख्या तक सीमित रखने के बजाय अत्याधुनिक तकनीक और अनुसंधान आधारित उद्यमों को बढ़ावा दे रही है. इसी क्रम में आठ स्टेट ऑफ आर्ट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया. इसके अंतर्गत मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हेल्थ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आईआईटी कानपुर के नोएडा परिसर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित होकर संचालित हो रहे हैं.
इसके अतिरिक्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग, मेडिटेक, ड्रोन, 5जी/6जी, दूरसंचार, ब्लॉकचेन और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में सात अन्य सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को स्वीकृति प्रदान की गई है. इससे प्रदेश के युवाओं, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को नई तकनीकों पर आधारित उद्यम विकसित करने का अवसर मिलेगा.
नई स्टार्टअप नीति-2026 से मिलेगा उद्यमिता को नया विस्तार
स्टार्टअप नीति-2020 के पांच वर्ष पूर्ण होने के बाद योगी सरकार ने बदलती तकनीकी और औद्योगिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 10 जुलाई 2026 को नई स्टार्टअप नीति अधिसूचित की है. इसके साथ ही प्रदेश में स्टार्टअप, इन्क्यूबेशन और नवाचार गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन निदेशालय की स्थापना के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान की है. इसी क्रम में प्रदेश के डीप-टेक इकोसिस्टम को मजबूत बनाने और क्षेत्रीय विकास को गति देने के उद्देश्य से नोएडा एवं लखनऊ में 'यू-हब (डीप-टेक हब)' विकसित करने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट की स्वीकृति मिली है। ये हब तकनीकी नवाचार, अनुसंधान, निवेश और स्टार्टअप्स के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
स्टार्टअप्स को 35 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता
योगी सरकार की स्टार्टअप प्रोत्साहन योजनाओं के तहत प्रदेश में उद्यमियों और इन्क्यूबेटर्स को वित्तीय सहयोग भी उपलब्ध कराया जा रहा है. अब तक 150 स्टार्टअप्स को भरण-पोषण भत्ते के रूप में 123.14 लाख रुपये, 440 स्टार्टअप्स को सीड कैपिटल और विपणन सहायता के रूप में 1,457.425 लाख रुपये तथा 111 स्टार्टअप्स को प्रोटोटाइप विकास सहायता के रूप में 539.86 लाख रुपये वितरित किए गए हैं.
वहीं, 59 इन्क्यूबेटर्स को परिचालन व्यय सहायता के रूप में 1,347.54 लाख रुपये और 16 इन्क्यूबेटर्स को पूंजीगत अनुदान के रूप में 365.56 लाख रुपये की धनराशि प्रदान की गई है. इस तरह स्टार्टअप्स और इन्क्यूबेटर्स को कुल 3,833.525 लाख रुपये यानी लगभग 38.34 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई है. 27 अगस्त 2026 को आयोजित 'उत्तर प्रदेश स्टार्टअप इकोसिस्टम' कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 107 स्टार्टअप्स को 3.42 करोड़ रुपये से अधिक और नौ इन्क्यूबेटर्स को 1.79 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रोत्साहन वितरित किए. इसी अवसर पर 'यूपी स्टार्टअप मिशन' वेबसाइट का शुभारंभ भी किया गया, जिससे स्टार्टअप से जुड़ी योजनाओं और सुविधाओं तक पहुंच को और आसान बनाया जा सके.
महिला उद्यमिता को भी मिल रहा प्रोत्साहन
प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी है. डीपीआईआईटी द्वारा पंजीकृत स्टार्टअप्स में से 11 हजार से अधिक महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप हैं. यह प्रदेश में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, नवाचार और उद्यमशीलता के विस्तार का महत्वपूर्ण संकेत है. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के 48 स्टार्टअप्स को सिडबी द्वारा वित्तपोषित किया जा रहा है.
वर्तमान में प्रदेश में 88 सरकारी मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेटर्स कार्यरत हैं. ये सूचना प्रौद्योगिकी, फिनटेक, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि और सामाजिक प्रभाव जैसे क्षेत्रों में नए उद्यमों को मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और व्यावसायिक अवसर उपलब्ध करा रहे हैं.
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योगी सरकार की नीतिगत प्रतिबद्धता, वित्तीय सहायता, तकनीकी संस्थानों के साथ साझेदारी और नवाचार को प्रोत्साहित करने वाली पहलों ने उत्तर प्रदेश को स्टार्टअप के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है. डीपीआईआईटी की वार्षिक स्टार्टअप रैंकिंग में प्रदेश को 'टॉप परफॉर्मर' श्रेणी प्राप्त होना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. सरकार का लक्ष्य इस मजबूत आधार को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश को नवाचार, डीप-टेक और उद्यमशीलता का प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र बनाना है.