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दोस्ती हो तो ऐसी! संकट में भारत ने की थी मदद, अब 30 भारतीय मछुआरों को रिहा कर श्रीलंका ने चुकाया दोस्ती का कर्ज!

India Srilanka Relations: भारत और श्रीलंका के बीच निरंतर मानवीय सहयोग और कूटनीतिक प्रयासों के परिणामस्वरूप, अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा पार करने के कारण हिरासत में लिए गए 30 भारतीय मछुआरे सुरक्षित स्वदेश लौट आए हैं.

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07 Apr 2026
( Updated: 07 Apr 2026
04:15 PM )
दोस्ती हो तो ऐसी! संकट में भारत ने की थी मदद, अब 30 भारतीय मछुआरों को रिहा कर श्रीलंका ने चुकाया दोस्ती का कर्ज!
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श्रीलंका से 30 भारतीय मछुआरों को स्वदेश वापस भेज दिया गया. कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने मंगलवार को इस संबंध में जानकारी दी. सोशल मीडिया एक्स पर जानकारी देते हुए भारतीय दूतावास ने कहा, "आज श्रीलंका से 30 भारतीय मछुआरों को देश भेज दिया गया है और वे अपने घर लौट रहे हैं”.
 
समुद्री सीमा पार करने पर मछुआरे गिरफ्तार
 
श्रीलंकाई अधिकारियों द्वारा भारतीय मछुआरों को हिरासत में लेना एक आम समस्या रही है, जो अक्सर पाक खाड़ी और पाक जलडमरूमध्य क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा पार करने के कारण उत्पन्न होती है.
 
भारत सरकार की पहल से मछुआरे रिहा
 
यह मामला मछली पकड़ने से जुड़े विवादों के कारण लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ है. भारतीय अधिकारियों की नियमित राजनयिक पहल और तमिलनाडु सरकार की अपीलों के चलते समय-समय पर मछुआरों की रिहाई और स्वदेश वापसी संभव हो पाती है.
 
श्रीलंका से भारतीय मछुआरे सुरक्षित घर लौटे
 
इससे पहले, 14 मार्च को 14 भारतीय मछुआरों के एक समूह को श्रीलंका से चेन्नई लाया गया था. इन्हें श्रीलंकाई तटरक्षक बल ने समुद्री सीमा उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया था. भारतीय उच्चायोग के राजनयिक हस्तक्षेप से उनकी रिहाई संभव हो पाई थी. इसके बाद 7 मार्च को 3 और 20 मार्च को 9 भारतीय मछुआरों को वापस भेजा गया था.
 
8 भारतीय मछुआरों को कोर्ट ने किया था रिहा
 
मार्च की शुरुआत में श्रीलंका की एक अदालत ने रामेश्वरम के आठ मछुआरों को रिहा करने का आदेश दिया था, जिन्हें 13 जनवरी को आईएमबीएल (IMBL) के कथित उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. हालांकि, इसी मामले में दो अन्य को कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई, जबकि सात मछुआरों को स्वदेश वापसी तक एक विशेष शिविर में रखा गया.
 
स्टालिन की केंद्र से भारतीय मछुआरों की रिहाई की मांग
 
फरवरी में भी यह मुद्दा चर्चा में आया था, जब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने केंद्र सरकार से श्रीलंकाई अदालतों द्वारा रिहा किए गए भारतीय मछुआरों की वापसी में तेजी लाने का आग्रह किया था. सीएम ने मंडपम और मयिलादुथुराई के 12 मछुआरों को रिहा कराने की मांग की गई थी, जिन्हें 2025 के अंत और 2026 के प्रारंभ के बीच गिरफ्तार किया गया था. इनमें से कुछ को बाद में अदालती आदेशों के बाद नजरबंदी केंद्रों में भेज दिया गया था.
 
भारत-श्रीलंका- मछुआरों के मुद्दे पर मानवीय चर्चा
 
समुद्री सीमा पार करने वाले मछुआरों का मुद्दा भारत और श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय चर्चाओं में अक्सर उठाया जाता है, जिसमें दोनों पक्ष "मानवीय दृष्टिकोण" की आवश्यकता पर जोर देते हैं और साथ ही वैकल्पिक आजीविका विकल्पों और बेहतर सीमा प्रबंधन तंत्र जैसे दीर्घकालिक समाधानों पर भी विचार करते हैं.
 
संकट में श्रीलंका को भारत ने भेजा 38 हजार टन तेल
 
आपको बता दें कि ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के दौरान, भारत ने श्रीलंका की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए 38,000 मीट्रिक टन पेट्रोलियम उत्पादों की खेप भेजी. इसमें 20,000 मीट्रिक टन डीजल और 18,000 मीट्रिक टन पेट्रोल शामिल था, जिसके लिए श्रीलंकाई प्रशासन ने आभार व्यक्त किया.
 
2022 के संकट में भी श्रीलंका के लिए 'संकटमोचक' की भूमिका में रहा भारत
 
जब साल 2022 में श्रीलंका अपने सबसे भीषण आर्थिक दौर से गुजर रहा था, तब भारत उसकी मदद करने वाला पहला राष्ट्र बना. भारत ने कुल 4 बिलियन डॉलर (लगभग 33,000 करोड़ रुपये) की वित्तीय सहायता दी थी
 
भारत बना रहा श्रीलंका में 50 हजार नए घर
 
भारत वर्तमान में श्रीलंका में 50,000 घरों का निर्माण, सौर ऊर्जा के प्रोजेक्ट्स और त्रिनकोमाली व कोलंबो पोर्ट जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों के विकास में सक्रिय रूप से निवेश कर रहा है. भारत की यह सक्रियता न केवल व्यापारिक संबंधों को प्रगाढ़ कर रही है, बल्कि श्रीलंका को वैश्विक मंच पर एक विश्वसनीय आर्थिक इकाई के रूप में दोबारा स्थापित भी कर रही है.

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