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गरीब छात्रों को प्राइवेट स्कूल में दाखिला आसान, हरियाणा सरकार ने EWS  स्टूडेंट के लिए जारी किया 1.29 करोड़ का फंड

Haryana: यह राशि खासतौर पर उन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ( EWS ) के छात्रों के लिए दी जा रही है , जिन्हें इन स्कूलों में पढाई करने का मौका मिलता है.

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01 Apr 2026
( Updated: 01 Apr 2026
02:52 PM )
गरीब छात्रों को प्राइवेट स्कूल में दाखिला आसान, हरियाणा सरकार ने EWS  स्टूडेंट के लिए जारी किया 1.29 करोड़ का फंड
Image Source: Social Media
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Haryana: हरियाणा सरकार ने ने जिले के 36 निजी स्कूलों के लिए कुल 1, 29,10, 500 की फीस वापसी की घोषणा की है. यह राशि खासतौर पर उन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ( EWS )  के छात्रों के लिए दी जा रही है , जिन्हें इन स्कूलों में पढाई करने का मौका मिलता है. इसे शैक्षणिक सत्र (Academic Session ) सत्र 2015 -16 से 2024 -25 तक के बकाया भुगतान के रूप में स्कूलों को वितरित किया जाएगा. 

स्कूलों में वितरण का तरीका

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह राशि तय मानदंडों के अनुसार चारों ब्लॉकों में स्थित स्कूलों में बांटी जाएगी. फर्रुखनगर ब्लॉक के आठ स्कूलों को ₹37,45,500, पटौदी ब्लॉक के 11 स्कूलों को ₹68,23,700, सोहना ब्लॉक के छह स्कूलों को ₹13,15,800 और गुरुग्राम ब्लॉक के 11 स्कूलों को ₹10,25,100 की राशि मिलेगी. इस तरह यह सुनिश्चित किया गया है कि हर स्कूल को उनके छात्रों और उनके योगदान के अनुसार सही राशि मिले.

ग्रामीण और शहरी स्कूलों के लिए अलग-अलग दरें

शुरुआत में, यानी वर्ष 2015-16 से 2017-18 के लिए, ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में कक्षा 2 से 5 तक के छात्रों के लिए ₹200 और कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए ₹300 प्रति छात्र निर्धारित किया गया था। वहीं शहरी क्षेत्रों में ये दरें ₹300 और ₹400 थीं. जैसे-जैसे साल बीते, इन राशि में बढ़ोतरी की गई. 2021-22 से 2024-25 के लिए ग्रामीण स्कूलों में वापसी राशि ₹500 से ₹700 प्रति छात्र तय की गई, जबकि शहरी स्कूलों में यह ₹700 से ₹900 तक पहुंच गई.

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आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए मदद

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यह फैसला आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है. इससे न सिर्फ उनके स्कूल फीस का बोझ कम होगा, बल्कि वे बेहतर तरीके से पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे. शिक्षा विभाग का उद्देश्य यही है कि हर बच्चा, चाहे वह किसी भी आर्थिक पृष्ठभूमि का हो, अच्छी शिक्षा पा सके और स्कूल फीस के चलते कोई छात्र पीछे न छूटे.

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