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लेफ्ट के गढ़ में घुसकर बीजेपी ने दी मात, केरलम में भी खुला खाता, जानिए कैसे हुआ खेल?

बता दें कि पूर्व कांग्रेस नेता बी.बी. गोपाकुमार ने सीपीआई के आर. राजेंद्रन को 4,002 वोटों से हराकर केरलम में बीजेपी को 5 साल बाद वापसी करवाई है. यह परिणाम राज्य में भाजपा के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

लेफ्ट के गढ़ में घुसकर बीजेपी ने दी मात, केरलम में भी खुला खाता, जानिए कैसे हुआ खेल?
ImageSource/X/@RajeevRC_X
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पांच राज्यों की विधानसभा सीटों के नतीजों की काउंटिग जारी है. शाम 4 बजे तक लगभग सभी राज्यों की तस्वीरें साफ हो चुकी हैं. पश्चिम बंगाल में भाजपा ममता बनर्जी की टीएमसी को धूल चटाते हुए पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाती नजर आ रही है. इसके अलावा असम में भी बीजेपी की पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बन रही है, लेकिन इन सभी राज्यों में से बीजेपी को केरल की राजनीति में एंट्री मिल गई है. यह एक ऐसी जीत है, जिसपर पार्टी को भी यकीन नहीं हो रहा होगा. भाजपा ने अहम बदलाव के संकेत देते हुए केरलम में पांच साल बाद वापसी करते हुए चथन्नूर विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की है. 

केरलम में खुला बीजेपी का खाता 

बता दें कि पूर्व कांग्रेस नेता बी.बी. गोपाकुमार ने सीपीआई के आर. राजेंद्रन को 4,002 वोटों से हराकर केरलम में बीजेपी को 5 साल बाद वापसी करवाई है. यह परिणाम राज्य में भाजपा के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जहां लंबे समय से माकपा के नेतृत्व वाला एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ हावी रहे हैं. जानकारी के लिए बता दें कि इस सीट पर लेफ्ट को साल 2021 के चुनाव में 17,000 वोटों से जीत मिली थी. 

'पीएम मोदी और कार्यकर्ताओं को समर्पित यह जीत' 

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गोपाकुमार ने अपनी इस जीत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी कार्यकर्ताओं को समर्पित किया. उन्होंने कहा कि यह दोनों की मेहनत का नतीजा है. उन्होंने यह भी कहा कि 'जैसा प्रधानमंत्री कहते हैं कि वे एक साधारण कार्यकर्ता हैं, वैसे ही मैं भी जनता के बीच एक कार्यकर्ता के रूप में काम करता रहूंगा. यह जीत सिर्फ आंकड़ों के लिहाज से ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी अहम मानी जा रही है.' इससे पहले चथन्नूर सीट पर भाजपा पिछले दो चुनावों में दूसरे स्थान पर रही थी, लेकिन इस बार उसने रणनीतिक बढ़त हासिल की. 

भाजपा से कांग्रेस में आना भी बनी जीत की वजह 

गोपाकुमार का कांग्रेस से भाजपा में आना भी इस जीत में अहम कारक माना जा रहा है. इससे न सिर्फ एंटी-इंकम्बेंसी वोट एकजुट हुए, बल्कि यूडीएफ के पारंपरिक वोट बैंक में भी सेंध लगी. इस मुकाबले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थोप्पिल रवि के बेटे सूरज रवि तीसरे स्थान पर रहे, जिससे विपक्षी वोटों का बिखराव साफ दिखा और इसका फायदा भाजपा को मिला. 

तिरुवनंतपुरम भाजपा मुख्यालय में जीत का जश्न 

तिरुवनंतपुरम स्थित भाजपा मुख्यालय में चथन्नूर की जीत की पुष्टि होते ही जश्न का माहौल बन गया. वहीं नेमोम सीट पर भी कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जहां भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर करीब 2,000 वोटों की बढ़त के साथ आगे चल रहे थे. नेमोम सीट का भी खास महत्व है क्योंकि 2016 में यहीं से भाजपा ने पहली बार केरल विधानसभा में खाता खोला था, तब ओ. राजगोपाल ने जीत दर्ज की थी. हालांकि, 2021 में पार्टी यह सीट गंवा बैठी थी.

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कुल मिलाकर चथन्नूर की जीत और नेमोम में मजबूत प्रदर्शन यह संकेत देते हैं कि केरल में भाजपा संगठनात्मक स्तर पर नई रणनीति के साथ अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है. हालांकि, यह देखना बाकी है कि पार्टी इस बढ़त को कितनी दूर तक कायम रख पाती है. फिलहाल केरलम में कांग्रेस की गठबंधन वाली यूडीएफ 90 सीटों पर आगे चल रही है. 

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