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महिला आरक्षण लागू होते ही पलटेगा सियासी गणित, देश के इन 6 राज्यों में होंगी 400 से अधिक सीटें; जानें कैसे बदलेगा खेल

महिला आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने की तैयारी है, जिसके तहत सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती है. राज्यों में करीब 50 फीसदी सीटें बढ़ेंगी, लेकिन बड़े राज्यों का राजनीतिक प्रभाव बना रहेगा.

महिला आरक्षण लागू होते ही पलटेगा सियासी गणित, देश के इन 6 राज्यों में होंगी 400 से अधिक सीटें; जानें कैसे बदलेगा खेल
Image Source: IANS
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देश में महिला सशक्तिकरण को लेकर एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी तेज हो गई है. केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में काम कर रही है. इस बदलाव के साथ ही संसद की तस्वीर भी काफी बदलने वाली है, क्योंकि लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने की योजना सामने आई है. यह सिर्फ संख्या का खेल नहीं, बल्कि राजनीति की दिशा और दशा बदलने वाला फैसला माना जा रहा है.

सीटों में बढ़ोतरी, लेकिन संतुलन बरकरार

सरकार की योजना के मुताबिक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों की संख्या में करीब 50 फीसदी तक इजाफा किया जाएगा. हालांकि दिलचस्प बात यह है कि बड़े राज्यों का दबदबा पहले जैसा ही बना रहेगा. उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे राज्य अब भी सत्ता के समीकरण तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाएंगे.

बड़े राज्यों की बढ़ेगी ताकत

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अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश, जो हमेशा से राजनीति का केंद्र रहा है, वहां सांसदों की संख्या 80 से बढ़कर 120 हो सकती है. इसी तरह महाराष्ट्र में 48 से बढ़कर 72, पश्चिम बंगाल में 42 से 63 और बिहार में 40 से 60 सीटें होने का अनुमान है. मध्य प्रदेश में भी यह संख्या 29 से बढ़कर 44 तक पहुंच सकती है. इन छह राज्यों की कुल सीटें मिलाकर 418 तक पहुंच जाएंगी, जो किसी भी सरकार के गठन में निर्णायक साबित होंगी.

लखनऊ से ही तय होगा सत्ता का रास्ता

राजनीतिक गलियारों में अक्सर कहा जाता है कि लखनऊ से ही दिल्ली की सत्ता का रास्ता निकलता है. यह कहावत आने वाले समय में भी सही साबित होती नजर आ रही है. इसके साथ ही महाराष्ट्र, बंगाल, तमिलनाडु, बिहार और मध्य प्रदेश का प्रभाव भी पहले की तरह बरकरार रहेगा.

दक्षिण भारत की स्थिति भी मजबूत

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दक्षिण भारत के राज्यों को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट किया है कि उनके प्रभाव में कोई कमी नहीं आएगी. गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि कर्नाटक में सीटें 28 से बढ़कर 42 हो सकती हैं. आंध्र प्रदेश में 25 से 38 और केरल में 20 से बढ़कर 30 सीटें होने की संभावना है.

महिला आरक्षण लागू होने का तरीका

अब सबसे अहम सवाल है कि महिला आरक्षण लागू कैसे होगा. योजना के अनुसार, कुल सीटों में से एक तिहाई यानी 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी. इसका मतलब है कि उत्तर प्रदेश में 120 सीटों में से 40 सीटों पर महिला उम्मीदवार ही चुनाव लड़ेंगी. बिहार में यह संख्या 20 के करीब हो सकती है.

विपक्ष की आपत्तियां भी सामने

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यह आरक्षण रोटेशन प्रणाली के तहत लागू किया जाएगा, यानी हर चुनाव में अलग-अलग सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. साथ ही एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं को भी उनके आरक्षित कोटे में से 33 फीसदी हिस्सेदारी दी जाएगी. हालांकि विपक्ष इस मुद्दे पर सवाल उठा रहा है. उनका कहना है कि ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं के लिए भी अलग से प्रावधान किया जाना चाहिए, ताकि आरक्षण का लाभ सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंच सके.

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बहरहाल, 2029 का चुनाव सिर्फ सीटों की बढ़ोतरी या आरक्षण का मामला नहीं होगा, बल्कि यह भारतीय राजनीति में एक नए युग की शुरुआत भी साबित हो सकता है.

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