मायावती ने 4 दिन के अंदर लिए 3 ऐसे फैसले जिससे पूरे पार्टी हो गई बेचैन
बसपा प्रमुख ने 4 दिन के भीतर तीन ऐसे बड़े फैसले लिए है जो पार्टी को बेचैन करके रख दिया है। मायावती के इन फ़ैसलो पर पार्टी का कोई भी नेता फिलहाल कुछ भी बोलने को राजी नहीं हो रहा है।
16 Feb 2025
(
Updated:
07 Dec 2025
09:20 AM
)
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उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती हमेशा से ही सख्त फैसले लेने के लिए जानी जाती रही है। ऐसे में एक बाद फिर बसपा प्रमुख ने 4 दिन के भीतर तीन ऐसे बड़े फैसले लिए है जो पार्टी को बेचैन करके रख दिया है। मायावती के इन फ़ैसलो पर पार्टी का कोई भी नेता फिलहाल कुछ भी बोलने को राजी नहीं हो रहा है। मायावती ने रविवार को पार्टी के भविष्य को लेकर जो कुछ भी बोला है। उसने पार्टी के भविष्य के लिए बड़ा संकेत दिया है।
आकाश आनंद पर भी हुई थी कारवाई
दरअसल, बहुजन समाज पार्टी के अंदर जिस विषय को सबसे ज़्यादा निर्विवाद माना जा रहा था अब उसी पर बसपा प्रमुख ने मंथन के संकेत देकर तमाम सियासी चर्चाओं को जन्म दे दिया है। पिछले कई वर्षों से बसपा में मायावती के बाद पार्टी की कमान किसके हाथों में जाएगी। इसको लेकर तमाम क़यास लगाए जा रहे थे। हालाँकि उनके भतीजे आकाश आनंद को ही उनका अगला उत्तराधिकारी माना जा रहा था और मायावती भी उन्हें जगह-जगह प्रमोट कर रही थी। इस बीच लोकसभा चुनाव 2024 से पहले साल 2023 में बसपा प्रमुख ने आकाश आनंद को पार्टी का नेशनल कोआर्डिनेटर जैसा अहम पद दिया। इसके बाद जब लोकसभा का चुनाव आया तो आकाश आनंद के एक बयान के चलते मायावती ने उनपर कारवाई करते हुए इस पद से हटाते हुए यह तक कह डाला कि वो अभी परिपक्व नही हुए है।
समधी को किया पार्टी से बाहर
वही लोकसभा चुनाव के बाद कुछ ही दिनों के भीतर मायावती ने एक बार फिर अपने भतीजे को नेशनल कोआर्डिनेटर पद की ज़िम्मेदारी सौंपी। इसके बाद हरियाणा, दिल्ली के चुनाव की ज़िम्मेदारी भी आकाश आनंद को सौंपी हालाँकि चुनावी नतीजों में वो फेल रहे। अब एक बार फिर से मायावती ने कुछ ऐसे फैसले लिए है जो कुछ और ही संकेत दे रहे है। इन फ़ैसलों की शुरुआत 12 फरवरी से हुई। तीन फ़ैसलो में सबसे पहले उन्होंने अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निष्कासित कर दिया। उन पर पार्टी के भीतर गुटबाजी करने के आरोप लग रहे थे। इसी दिन उन्होंने नितिन सिंह को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया। जो अशोक सिद्धार्थ के करीबी माने जाते है। अशोक सिद्धार्थ को मायावती ने यूपी विधान परिषद् में भेजा और फिर वह साल 2022 तक राज्यसभा सांसद भी रहे। वही उनकी उनकी पत्नी बसपा सरकार में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष भी थीं।
रविवार को दिया सबसे बड़ा संकेत
मायावती कि सख़्त रवैय्या रविवार को भी सामने आया जब जब अपने उत्तराधिकारी को लेकर बड़ा एलान किया। जो यूपी के सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दिया है। दरअसल, अभी तक यह माना जा रहा था कि मायावती के भतीजे आकाश ही उनके उत्तराधिकारी होंगे। हालांकि मायावती ने रविवार को अपने सोशल मीडिया एक्स के एक पोस्ट से सबके अंदर एक बेचैनी को बढ़ा दिया है। सिलसिलेवार तरीके से किए गए तीन पोस्ट में से पहले में मायावती ने लिखा " बीएसपी, देश में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के कारवाँ को सत्ता तक पहुँचाने हेतु, मान्यवर श्री कांशीराम जी द्वारा सब कुछ त्यागकर स्थापित की गई पार्टी व मूवमेन्ट, जिसमें स्वार्थ, रिश्ते-नाते आदि महत्वहीन अर्थात बहुजन-हित सर्वोपरि है।" इसके अगले पोस्ट में उन्होंने लिखा "इसी क्रम में मान्यवर श्री कांशीराम जी की शिष्या व उत्तराधिकारी होने के नाते उनके पदचिन्हों पर चलते हुए मैं भी अपनी आखिरी सांस तक हर कुर्बानी देेकर संघर्ष जारी रखूंगी ताकि बहुजन समाज के लोग राजनीतिक गुलामी व सामाजिक लाचारी के जीवन से मुक्त होकर अपने पैरों पर खड़े हो सकें।" इसके बाद "अतः मान्यवर श्री कांशीराम जी की तरह ही मेरे जीतेजी भी पार्टी व मूवमेन्ट का कोई भी वास्तविक उत्तराधिकारी तभी जब वह भी, श्री कांशीराम जी के अन्तिम सांस तक उनकी शिष्या की तरह, पार्टी व मूवमेन्ट को हर दुःख-तकलीफ उठाकर, उसे आगे बढ़ाने में पूरे जी-जान से लगातार लगा रहे।" इसके आलवा 5वें और अंतिम पोस्ट में उन्होंने लिखा "इसी ज़िम्मेदारी के साथ ख़ासकर कैडर के बल पर, ज़मीनी स्तर पर पार्टी संगठन की मज़बूती व सर्वसमाज में जनाधार को बढ़ाने के साथ ही आगे भी हर चुनाव की तैयारी में पूरी दमदारी के साथ लगना है ताकि बहुजन समाज की एकमात्र आशा की किरण बीएसपी को अपेक्षित व प्रतीक्षित सफलता मिल सके।"
1. बीएसपी, देश में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के कारवाँ को सत्ता तक पहुँचाने हेतु, मान्यवर श्री कांशीराम जी द्वारा सब कुछ त्यागकर स्थापित की गई पार्टी व मूवमेन्ट, जिसमें स्वार्थ, रिश्ते-नाते आदि महत्वहीन अर्थात बहुजन-हित सर्वोपरि है।
— Mayawati (@Mayawati) February 16, 2025
मायावती ने इन पोस्ट को देखकर यह माना जा रहा है कि वो अभी अपने उत्तराधिकारी को लेकर आने वाले समय में मंथन कर सकती है। वही दूसरी तरफ इस बात की चर्चा भी चल रही है कि मायावती की पार्टी में सबकुछ ठीक नही चल रहा है। यह बात समझने के लिए आप अगर आकाश आनंद के सोशल मीडिया के एक्स प्लेटफ़ॉर्म पर नजर डालें तो बसपा चीफ के हर पोस्ट को या तो रिपोस्ट करते हैं या उस पर अपनी बात रखते हुए पोस्ट करते हैं लेकिन 12 फरवरी के जिस पोस्ट में मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को निष्कासित करने का ऐलान किया था, उसको आकाश ने रिपोस्ट तक नहीं किया है। यही वजह है कि अब सियासी हलकों बसपा के भविष्य पर नई चर्चा शुरू हो गई है।
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