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अगर आप नशा माफिया के खिलाफ खड़े नहीं हो सकते, तो 'आप' का हिस्सा न बनें, यह पार्टी लड़ने के लिए बनी है: मनीष सिसोदिया

मनीष सिसोदिया ने शिकायतों के लिए गोपनीय रिपोर्टिंग प्रणाली के बारे में बताते हुए कहा, "शिकायतों के लिए तैयार की गई ऐप पूरी तरह गोपनीयता सुनिश्चित करती है. यहां तक कि मंत्री, कमिश्नर या मुख्यमंत्री को भी यह पता नहीं चल सकता कि जानकारी किसने दी है.

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21 Mar 2026
( Updated: 21 Mar 2026
02:14 PM )
अगर आप नशा माफिया के खिलाफ खड़े नहीं हो सकते, तो 'आप' का हिस्सा न बनें, यह पार्टी लड़ने के लिए बनी है: मनीष सिसोदिया
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आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब प्रभारी और दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अमृतसर में 'युद्ध नशेआं विरुद्ध' मुहिम के तहत पार्टी नेताओं, विधायकों, ब्लॉक इंचार्ज और पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए विधायकों को पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी और हर गांव की रोजाना जवाबदेही पक्की करनी होगी. उन्होंने पूरे पंजाब में नशे के खिलाफ एक मजबूत और मिशन-मोड लड़ाई की अपील की, और इस बात पर जोर दिया कि 'आप' की नींव संघर्ष और कुर्बानी में है, न कि पावर या सुविधाओं में.

भारी सभा को संबोधित करते हुए, आप के सीनियर नेता मनीष सिसोदिया ने कहा, "आम आदमी पार्टी जंतर-मंतर पर अरविंद केजरीवाल जी, हम सभी और आप में से कई लोगों के सहयोग से 14 दिन की भूख हड़ताल से निकली है. यह पार्टी सत्ता का आनंद लेने या विधायक मंत्री बनने के लिए ड्राइंग रूम में नहीं बनी। यह संघर्ष से पैदा हुई पार्टी है और हमने कभी हिम्मत नहीं हारी है."

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दिल्ली के अनुभव और संघर्ष

दिल्ली सरकार के सामने आई चुनौतियों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली में सरकार बनने के बाद पहला हमला केंद्र सरकार द्वारा किया. जब अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने, तो हमने तहसीलदार से लेकर एसडीएम तक, सभी लेवल पर भ्रष्टाचार के खिलाफ 'ज़ीरो टॉलरेंस' की पॉलिसी अपनाई. केंद्र को खतरा महसूस हुआ और उसने दिल्ली सरकार से एंटी-करप्शन ब्रांच (एसीबी) छीन ली. बाद में आईएएस अधिकारियों से लेकर शिक्षकों और सेवादारों तक के ट्रांसफर की पावर भी छीन ली गई. सभी पावर छीन लेने के बावजूद, हमने काम करना जारी रखा और नतीजे दिए.

उन्होंने आगे कहा कि सत्ता जाने के बाद भी, हमने ऐसे स्कूल और अस्पताल बनाए जो भारत में पहले कभी नहीं देखे गए। हमने बिजली और पानी पर ऐसी नीतियां लागू कीं जो एक मिसाल बन गईं. अरविंद केजरीवाल कह सकते थे कि वह शक्तियों के बिना काम नहीं कर सकते, लेकिन उन्होंने करके दिखाया. यही वजह है कि दिल्ली के लोगों ने उन्हें 2020 में 70 में से 62 सीटें दीं."

आप नेताओं को राजनीति तौर पर निशाना बनाने के बारे में मनीष सिसोदिया ने कहा कि ईमानदारी की इस इमेज को तोड़ने के लिए नरेंद्र मोदी जी ने अरविंद केजरीवाल को भ्रष्ट साबित करने की कोशिश की. सत्येंद्र जैन को झूठे केस में गिरफ्तार किया गया. मुझ पर भी कथित शराब घोटाले का आरोप लगाया गया. पहले उन्होंने 10,000 करोड़ कहा, फिर 1,000 करोड़, फिर 100 करोड़ और कोर्ट में यह ज़ीरो हो गया। कोर्ट ने कहा कि कोई केस नहीं है.

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पंजाब में नशा मुक्ति के लिए रणनीति

हिम्मत बनाए रखने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि आपमें हिम्मत होनी चाहिए. यह एक दिन की लड़ाई नहीं है. यह एक लंबी लड़ाई है. आप गुरुओं और शहीदों की धरती पर पैदा हुए हैं. आपको वहीं से ताकत लेनी चाहिए. आज हम अपने लिए नहीं बल्कि अपने बच्चों के लिए लड़ रहे हैं. क्या आप गारंटी दे सकते हैं कि 10 साल बाद आपका बच्चा नशे में नहीं पड़ेगा? गारंटी बस यही है कि हम सब मिलकर पंजाब को नशा मुक्त बनाएं.

विधायकों और लोकल लीडरशिप को सीधे संबोधित करते हुए पंजाब आप प्रभारी ने कहा कि अगर एक भी गांव या एक भी वार्ड में नशा बिक रहा है, तो आपको नींद नहीं आनी चाहिए. कोई विधायक अपने ब्लॉक इंचार्ज को फोन करके क्यों नहीं पूछता कि क्या हो रहा है? विधायक खुद गांव क्यों नहीं जाता? ज़िम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता.

उन्होंने जवाबदेही और तालमेल की अहमियत पर जोर देते हुए कहा, "24 मार्च से 31 मार्च तक सभी ब्लॉकों में मीटिंगें की जाएंगी. हर VDC रिपोर्ट देगी कि उनका गांव नशा मुक्त है या नहीं और किस हद तक नशा अभी भी बाकी है. अगर नशा बिक रहा है तो जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए. विधायक और हलका इंचार्ज ब्लॉक इंचार्जों का पूरा साथ दें."

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गोपनीय शिकायत प्रणाली

इस मुहिम के सामूहिक स्वरूप के बारे में उन्होंने कहा, "पंजाब में पहली बार सरकार, पुलिस और जनता 'नशों के खिलाफ जंग' जैसी मुहिम में ईमानदारी से मिलकर काम कर रहे हैं. पहले ऐसा समय था जब मंत्री भी नशा तस्करी में शामिल होते थे और माफिया की बजाय ईमानदार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाती थी. आज अरविंद केजरीवाल जी और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की स्पष्ट हिदायत है कि नशों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा."

उन्होंने 'आप' की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को दोहराते हुए कहा, "अगर 'आप' का कोई दूर का कार्यकर्ता भी नशा तस्करी से जुड़ा पाया जाता है या नशा तस्करों से उसके संबंध पाए जाते हैं, तो उसे जेल भेजा जाना चाहिए. पार्टी और शासन दोनों में जीरो टॉलरेंस लागू होनी चाहिए."

मनीष सिसोदिया ने शिकायतों के लिए गोपनीय रिपोर्टिंग प्रणाली के बारे में बताते हुए कहा, "शिकायतों के लिए तैयार की गई ऐप पूरी तरह गोपनीयता सुनिश्चित करती है. यहां तक कि मंत्री, कमिश्नर या मुख्यमंत्री को भी यह पता नहीं चल सकता कि जानकारी किसने दी है. सिर्फ की गई कार्रवाई को ही ट्रैक किया जा सकता है. इसलिए लोग निडर होकर रिपोर्ट करें."

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मनीष सिसोदिया ने की भावुक अपील 

भावुक अपील करते हुए उन्होंने कहा, "अगर हम पंजाब के हर गांव और शहर को नशा मुक्त नहीं कर सकते, तो हमारा राजनीति में होना बेमानी है. अरविंद केजरीवाल इस बारे में बहुत गंभीर हैं और कहते हैं कि अगर हम असफल रहे तो हमें शर्म महसूस करनी चाहिए."

उन्होंने पंजाब की आध्यात्मिक और क्रांतिकारी विरासत का हवाला देते हुए कहा, "यह गुरु साहिबान की, सेवा और हिम्मत की धरती है. यह शहीद-ए-आजम भगत सिंह, ऊधम सिंह, करतार सिंह सराभा और मदन लाल ढींगरा की धरती है. उनसे प्रेरणा लो। अगर शहीद-ए-आजम भगत सिंह हिचकिचाते तो आज हम कहां होते? अगर जरूरत पड़े तो नशा तस्करों को 40 बार जेल भेजो, लेकिन रुको मत."

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पार्टी नेताओं को सख्त संदेश देते हुए उन्होंने कहा, "अगर आपमें नशा माफिया से टक्कर लेने की हिम्मत नहीं है, तो अरविंद केजरीवाल को शर्मिंदा मत करो. पार्टी छोड़ दो. यह पार्टी लड़ने के लिए बनी है."

मनीष सिसोदिया ने किया अपना निजी अनुभव साझा

अपना निजी अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा, "CBI ने मेरे घर छापा मारा, अलमारियां खंगालीं, यहां तक कि पैसों की तलाश में तकिए भी फाड़ दिए. मैंने तीन साल तक झूठे आरोपों का बोझ उठाया. मुझसे पार्टी छोड़ने और विधायकों को तोड़ने के लिए कहा गया. लेकिन अरविंद केजरीवाल को छोड़ने का मतलब है ईमानदारी और शिक्षा के जरिए राष्ट्र निर्माण के सपने को छोड़ना. मैंने नहीं छोड़ा और आपको भी नहीं छोड़ना चाहिए."

भविष्य की रणनीति की बात करते हुए मनीष सिसोदिया ने कहा कि 31 मार्च के बाद वह गांव-गांव की प्रगति का जायजा लेने के लिए निजी तौर पर ब्लॉक इंचार्जों और विधायकों से मिलेंगे. हर हलके को यह डेटा पेश करना होगा कि कितने गांव नशा मुक्त हो गए हैं और नशों को पूरी तरह खत्म करने के लिए समय-सीमा तय करनी होगी. यह लड़ाई सिर्फ लड़नी ही नहीं, बल्कि जीतनी भी है.

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उन्होंने भरोसा जताया कि पूरी टीम नए इरादे के साथ लौटेगी और सामूहिक कोशिशों तथा दृढ़ संकल्प के साथ नशा मुक्त पंजाब का निर्माण करेगी.

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