×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

अब बदलेंगे CAPF के नियम! अमित शाह राज्यसभा में पेश करेंगे बिल, CRPF-BSF में बड़ा सुधार तय

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सोमवार को राज्यसभा में CRPF से जुड़ा नया विधेयक पेश करेंगे, जिसका उद्देश्य अधिकारियों की भर्ती, प्रतिनियुक्ति और पदोन्नति को एक समान नियमों में लाना है. अभी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और सशस्त्र सीमा बल अलग-अलग कानूनों के तहत काम करते हैं.

अब बदलेंगे CAPF के नियम! अमित शाह राज्यसभा में पेश करेंगे बिल, CRPF-BSF में बड़ा सुधार तय
Amit Shah (File Photo)
Advertisement

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सोमवार को राज्यसभा में 'केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026' पेश करने जा रहे हैं. इस विधेयक का उद्देश्य देश के प्रमुख अर्धसैनिक बलों में भर्ती, प्रतिनियुक्ति और पदोन्नति की प्रक्रिया को एक समान और व्यवस्थित बनाना है.

अलग-अलग नियमों से बढ़ी चुनौतियां

जानकारी के अनुसार, देश के चार प्रमुख बल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और सशस्त्र सीमा बल अभी तक अपने-अपने अलग-अलग अधिनियमों के तहत संचालित होते रहे हैं. इन अलग नियमों के कारण कई बार सेवा शर्तों और प्रशासनिक फैसलों में असमानता देखने को मिलती है, जिससे अधिकारियों और कर्मचारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.

Advertisement

एकीकृत कानून की जरूरत क्यों पड़ी?

सूत्रों का कहना है कि समय के साथ इन बलों की जिम्मेदारियां और संरचना काफी बदल चुकी हैं. अलग-अलग नियमों के चलते एकीकृत नीति का अभाव रहा, जिससे कई मामलों में कानूनी विवाद भी बढ़े. यही कारण है कि अब एक ऐसा कानून लाने की जरूरत महसूस की गई, जो सभी सीएपीएफ के लिए समान दिशा-निर्देश तय कर सके. इस प्रस्तावित विधेयक में समूह ‘ए’ सामान्य ड्यूटी अधिकारियों और अन्य अधिकारियों की भर्ती और सेवा शर्तों को एक समान नियमों के तहत लाने की बात कही गई है. इसका सीधा असर न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर पड़ेगा, बल्कि अधिकारियों के करियर ग्रोथ और कार्यप्रणाली में भी स्पष्टता आएगी

आईपीएस प्रतिनियुक्ति पर खास फोकस

विधेयक का एक महत्वपूर्ण पहलू भारतीय पुलिस सेवा यानी भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से जुड़ा है. प्रस्ताव के मुताबिक, महानिरीक्षक स्तर पर 50 प्रतिशत पद प्रतिनियुक्ति से भरे जाएंगे, जबकि अतिरिक्त महानिदेशक स्तर पर यह आंकड़ा कम से कम 67 प्रतिशत होगा. वहीं विशेष महानिदेशक और महानिदेशक जैसे शीर्ष पद केवल प्रतिनियुक्ति के माध्यम से ही भरे जाएंगे. यह प्रावधान केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रखा गया है.

Advertisement

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बीच आया प्रस्ताव

गौर करने वाली बात यह है कि यह विधेयक ऐसे समय में लाया जा रहा है, जब उच्चतम न्यायालय ने पिछले वर्ष अक्टूबर में केंद्र सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति कम करने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई थी. अदालत ने अपने आदेश में कैडर समीक्षा करने और प्रतिनियुक्ति व्यवस्था में बदलाव का संकेत दिया था.

यह भी पढ़ें

बताते चलें ऐसे में सरकार का यह नया कदम प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने और मौजूदा व्यवस्था को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है. यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो यह देश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत, पारदर्शी और संगठित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें