ईरान-इजरायल जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर मुंबई पहुंचा तेल टैंकर, जहाज के इंडियन कैप्टन ने दिखाई थी सूझबूझ
Iran Israel War Live: मिडिल ईस्ट संकट के बीच ईरानी हमले के कारण बंद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर लाइबेरियाई झंडे वाला कच्चे तेल का कोई पहला टैंकर मुंबई पहुंच गया है. ये 1 फरवरी को सऊदी अरब से तेल लोड कर चला था.
Follow Us:
खाड़ी के देशों में लड़ाई के बीच आई भारत में तेल और गैस को लेकर महसूस की जा रही परेशानियों के बीच एक बड़ी खुशखबरी सामने आई गै. दरअसल सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर निकला लाइबेरियाई झंडे वाला टैंकर 'शेनलोंग सुएज़मैक्स' (Shenlong Suezmax) मुंबई पोर्ट पहुंच गया है.
शेनलोंग सुएज़मैक्स ईरान-अमेरिका संघर्ष शुरू होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को पार कर भारत आने वाला पहला जहाज बन गया है. इस टैंकर ने 1 मार्च को सऊदी अरब के रास तनुरा बंदरगाह पर कच्चा तेल लोड किया था और 3 मार्च को वहां से रवाना हुआ. समुद्री ट्रैकिंग डेटा के अनुसार ये टैंकर 8 मार्च को होर्मुज जलडमरूमध्य में मौजूद था, जिसके बाद यह अस्थायी रूप से ट्रैकिंग सिस्टम से गायब हो गया था.
कहा जा रहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के उच्च-खतरे वाले इलाके में नेविगेट (गुजरते) करते समय टैंकर ने अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) ट्रांसपॉन्डर बंद कर दिया था और 9 मार्च को ट्रैकिंग सिस्टम पर फिर से एक्टिव हो गया.
आपको बता दें कि ट्रांसपॉन्डर एक अनिवार्य समुद्री VHF रेडियो प्रणाली है जो टकराव को रोकने और नेविगेशन में सुधार के लिए पास के जहाजों और कोस्टल (तटवर्ती) स्टेशनों को जहाज की पहचान, स्थिति, गति और नेविगेशन को स्वचालित रूप से रेगुलेट करती है.
12 दिन बार सऊदी से मुंबई पहुंचा जहाज!
यह जहाज बुधवार दोपहर 1 बजे मुंबई बंदरगाह पर रुका और शाम 6:06 बजे जवाहर द्वीप (Jawahar Dweep) पर खड़ा किया जाना निश्चित किया गया है. खबर के मुताबकि यह 1,35,335 मीट्रिक टन कच्चा तेल ले जा रहा है, जिसे पूर्वी मुंबई के माहुल स्थित रिफाइनरियों को आपूर्ति की जाएगी.
36 घंटे में खाली होगा ये तेल टैंकर!
कच्चे तेल को उतारने की प्रक्रिया में लगभग 36 घंटे लगने की उम्मीद है. इस टैंकर का मालिकाना हक शेनलोंग शिपिंग लिमिटेड के पास है और इसका प्रबंधन एथेंस की डायनाकॉम टैंकर मैनेजमेंट लिमिटेड द्वारा किया जाता है. इस जहाज में भारतीय, पाकिस्तानी और फिलिपिनो नागरिकों सहित कुल 29 क्रू मेंबर हैं, जिसकी कमान एक भारतीय कैप्टन के हाथ में है.
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलने वाले जहाजों को दी वॉर्निंग!
इससे पहले, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना के कमांडर ने कहा था कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से यात्रा करने के इच्छुक जहाजों को ईरान की मंजूरी लेनी होगी; अन्यथा, वे ईरानी हमलों का निशाना बन सकते हैं. रियर एडमिरल अलीरेज़ा तंगसिरी ने कहा कि ईरान की चेतावनियों को नजरअंदाज करने वाले दो जहाजों को बुधवार को जलडमरूमध्य में निशाना बनाया गया था. ईरानी जनरल ने X पर एक पोस्ट में कहा, "क्या जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से सुरक्षित मार्ग का (ईरान की ओर से) आश्वासन दिया गया था? यह 'एक्सप्रेस रोम' और 'मयूरी नारी' के चालक दल से पूछा जाना चाहिए, जिन्होंने खाली वादों (अमेरिकी) पर भरोसा करते हुए ईरानी चेतावनियों को नजरअंदाज किया और पार करने का इरादा रखा, लेकिन पकड़े गए. गुजरने का इरादा रखने वाले किसी भी जहाज को ईरान से अनुमति लेनी होगी."
मिडिल ईस्ट संकट के बीच ईरानी हमले के कारण बंद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर पहली बार मुंबई पहुंचा कोई जहाज, इंडियन कैप्टन के हाथ में थी कमान.#IranIsraelWar #Iran #MumbaiPort #ShenlongSuezmax #StraitOfHormuz pic.twitter.com/ZOJ4PPq6ud
— NMF NEWS (@nmfnewsofficial) March 12, 2026
ईरानी स्टेट मीडिया के अनुसार, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से जहाजों के गुजरने पर अपने प्रतिबंध कड़े कर दिए हैं और तेहरान ने कहा है कि जो जहाज संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के हितों की सेवा नहीं कर रहे हैं, वे जलडमरूमध्य के माध्यम से सुरक्षित रूप से यात्रा कर सकते हैं.
क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
ईरानी तट को ओमान से अलग करने वाले इस संकरे चैनल से प्रतिदिन 20 मिलियन बैरल से अधिक कच्चा तेल गुजरता है. यह मात्रा वैश्विक तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा और सभी समुद्री तेल व्यापार का लगभग एक-चौथाई प्रतिनिधित्व करती है. दुनिया की तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भी इसी मार्ग से गुजरता है. जब वह प्रवाह थोड़े समय के लिए भी लड़खड़ाता है, तो उसका परिणाम दुनिया भर के वित्तीय बाजारों, आपूर्ति श्रृंखलाओं और घरेलू बजटों पर पड़ता है.
फारस की खाड़ी में अभी भी 28 जहाज!
यह भी पढ़ें
इस बीच, भारत की शिपिंग मिनिस्ट्री ने कहा कि वर्तमान में फारस की खाड़ी क्षेत्र में 28 भारतीय झंडे वाले जहाज संचालित हो रहे हैं. इनमें से 24 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में स्थित हैं जिनमें 677 भारतीय नाविक हैं, जबकि चार जहाज 101 भारतीय नाविकों के साथ जलडमरूमध्य के पूर्व में हैं. मंत्रालय ने कहा कि उनकी सुरक्षा और संरक्षा की सक्रिय रूप से निगरानी की जा रही है. घटनाक्रमों पर नजर रखने और सहायता के समन्वय के लिए 28 फरवरी 2026 से मंत्रालय और जहाजरानी महानिदेशालय में 24 घंटे का कंट्रोल रूम चालू है. अधिकारी, जहाज प्रबंधक और भर्ती एजेंसियां भारतीय दूतावासों और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर सुरक्षा सुनिश्चित करने और जहां कहीं भी आवश्यक हो भारतीय नाविकों को सहायता प्रदान करने के लिए समन्वय कर रही हैं.
कृपया Google से लॉग इन करें टिप्पणी पोस्ट करने के लिए
Google से लॉग इन करें