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राजस्थान के इस अनोखे मंदिर में रहते हैं 25 हजार चूहे, उन्हीं का खाया जूठा प्रसाद ग्रहण करते हैं भक्त, जानें क्यों

अपनी शाही संस्कृति के लिए मशहूर राजस्थान में एक ऐसा अनोखा मंदिर है जहां एक-दो नहीं 25 हजार चूहे रहते हैं. यहां पर चूहों के जूठे प्रसाद के बेहद पवित्र माना जाता है और भक्त उसे ही ग्रहण करते हैं. कहा जाता है कि अगर सफेद चूहा दिख जाए तो बहुत शुभ होता है.

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16 Mar 2026
( Updated: 16 Mar 2026
01:04 PM )
राजस्थान के इस अनोखे मंदिर में रहते हैं 25 हजार चूहे, उन्हीं का खाया जूठा प्रसाद ग्रहण करते हैं भक्त, जानें क्यों
करणी माता मंदिर, राजस्थान (फाइल फोटो)

भारत मंदिरों और सनातनी संस्कृति का देश है. यहां हर एक मंदिर की अपनी मान्यताएं हैं. ठीक ऐसा ही एक राज्य है राजस्थान, जो अपनी शाही संस्कृति, किलों और मंदिरों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. यहां एक ऐसा मंदिर भी है जो अपनी अनोखी परंपरा के कारण लोगों को हैरान कर देता है. यह मंदिर है बीकानेर से करीब 30 किलोमीटर दूर देशनोक नाम की जगह पर स्थित करणी माता मंदिर, जिसे स्थानीय लोग 'चूहों वाला मंदिर' भी कहते हैं. इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां हजारों चूहे खुलेआम घूमते हैं और इन्हीं चूहों का जूठा प्रसाद सबसे पवित्र माना जाता है. 

मंदिर में रहते हैं 25 हजार चूहे, पैर से गुजरना शुभ संकेत!

मंदिर के अंदर कदम रखते ही आपको एक अलग ही दुनिया देखने को मिलती है. यहां करीब 25 हजार से ज्यादा चूहे रहते हैं, जिन्हें स्थानीय लोग प्यार से 'काबा' कहते हैं. ये चूहे मंदिर के फर्श, दीवारों और हर कोने में आराम से घूमते नजर आते हैं. कई बार तो ये भक्तों के पैरों के ऊपर से भी गुजर जाते हैं. मान्यता है कि अगर कोई चूहा आपके पैर के ऊपर से गुजर जाए, तो इसे बहुत शुभ संकेत माना जाता है.

चूहों का जूठन प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं भक्त!

इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालु दूध, मिठाई और अनाज चूहों को खिलाते हैं. खास बात यह है कि जब चूहे इन चीजों को खा लेते हैं, तो वही बचा हुआ भोजन भक्त प्रसाद के रूप में भी ले जाते हैं. लोगों का विश्वास है कि इस प्रसाद को खाने से देवी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

बड़ी है करणी माता के मंदिर की मान्यता!

इस मंदिर की कहानी भी बेहद रोचक है. मान्यता के अनुसार, करणी माता को देवी दुर्गा का अवतार माना जाता है. कहा जाता है कि एक बार उनके सौतेले बेटे लक्ष्मण की पानी में डूबने से मृत्यु हो गई. तब करणी माता ने मृत्यु के देवता यमराज से प्रार्थना की कि उनके बेटे को वापस जीवित कर दिया जाए. पहले तो यमराज ने मना कर दिया, लेकिन करणी माता की भक्ति और इच्छाशक्ति से प्रभावित होकर उन्होंने लक्ष्मण समेत सभी नर बच्चों को चूहे के रूप में पुनर्जन्म दे दिया, तभी से यह माना जाता है कि इस मंदिर में रहने वाले चूहे करणी माता के वंशजों के ही रूप हैं.

सफेद चूहा दिखना बेहद शुभ संकेत!

मंदिर से जुड़ी एक और मान्यता है कि यहां अगर आपको सफेद चूहा दिख जाए तो इसे बहुत शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि सफेद चूहे खुद करणी माता और उनके बेटों का प्रतीक हैं. इसलिए भक्त उन्हें देखने की बड़ी कोशिश करते हैं.

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इस भव्य मंदिर का निर्माण बीकानेर के राजा महाराजा गंगा सिंह ने 20वीं सदी की शुरुआत में करवाया था. मंदिर संगमरमर से बना हुआ है और इसके दरवाजे चांदी के बने हैं, जिन पर देवी से जुड़ी कहानियों की सुंदर नक्काशी की गई है.

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