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महाकुंभ में ट्रम्प के आने से पहले जटाधारी बाबा को देखने के लिए लोगों में मची होड़

अबकी बार का महाकुंभ कई मायनों में यादगार और ऐतिहासिक रहने वाला है। परंतु इस वक़्त महाकुंभ से आई एक तस्वीर ने अमेरिका तक को महाकुंभ आने पर मजबूर कर दिया है। साधु-सन्यासियों की टोली से एक बाबा ऐसे हैं, जिनकी जटाओं में अगर ट्रंप फँस जाए, तो उनका निकल पाना Impossible समझिये..महाकुंभ के रास्ते जटाधारी बाबा एंड ट्रंप की कहानी क्या कहती है, आईये आपको बताते हैं।

महाकुंभ  में ट्रम्प के आने से पहले जटाधारी बाबा को देखने के लिए लोगों में मची होड़
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महाकुंभ की रौनक़, साधु-सन्यासियों का मेला और हिंदुओं का महा पर्व, एक ही समय में, एक ही जगह पर ये सब होगा। सनातन की भव्य तस्वीर देखने को मिलेगी, जिसकी साक्षी ये पूरी दुनिया बनेगी। इन दिनों संगम नगरी प्रयागराज में संतों का आना आरंभ हो चुका है। यूँ तो अबकी बार का महाकुंभ कई मायनों में यादगार और ऐतिहासिक रहने वाला है। परंतु इस वक़्त महाकुंभ से आई एक तस्वीर ने अमेरिका तक को महाकुंभ आने पर मजबूर कर दिया है। साधु-सन्यासियों की टोली से एक बाबा ऐसे हैं, जिनकी जटाओं में अगर ट्रंप फँस जाए, तो उनका निकल पाना नामुमकिन समझिये, महाकुंभ के रास्ते जटाधारी बाबा एंड ट्रंप की कहानी क्या कहती है। आईये आपको बताते हैं।

13 जनवरी से लेकर 26 फरवरी तक, ये समय आपको अपने दिमाग़ और डायरी..दोनों जगह नोट कर लेना चाहिए क्योंकि यही वो मौक़ा है। जब आप हिंदुत्व की गहराई को समझ सकेंगे। संतों की महिमा को जान सकेंगे। अमृत समान ज्ञान को हासिल कर सकेंगे और शाही स्नान के ज़रिये पापों से मुक्ति पा सकेंगे। योगी बाबा की भाषा में बोले तो, ये मौक़ा है। आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक समागम का जिसे देखने की चाह सात समंदर बैठे अमेरिका में भी है। तभी तो अमेरिका से भी साधु-सन्यासियों का जमावड़ा प्रयागराज की ओर बढ़ रहा है। इन सबके बीच अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी महाकुंभ में आने का न्यौता भेजा जा चुका है..बक़ायदा मुख्यरूप में उन्हें आमंत्रित किया गया। ऐसे में अगर वो महाकुंभ आते भी है, तो जटाधारी बाबा की जटाओं से बच पाना उनके लिए असंभव होगा। दरअसल संगम नगरी से जटाधारी बाबा की चर्चा सात समंदर पार तक हो रही है। 7 फ़ीट लंबे केश जटाधारी बाबा को फैमस कर रहे हैं। 

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ये हैं आवाहन अखाड़े के महंत मंगलानंद सरस्वती नागा महाराज, जिनकी लंबी जटाएँ उन्हें अन्य नागा सन्यासियों से अलग बनाती है। ऐसा नहीं है कि ये जटाएँ रातों रात उग गई हैं बल्कि इसके लिए बाबा को 30 सालों का तप करना पड़ा। जटाधारी बाबा की जटाएँ खुलते ही ज़मीन को छूती हैं और जब यही जटाएँ बंधती है, तो सिर का ताज बन जाती है। अब सवाल उठता है कि जटाधारी बाबा अपनी इन्हीं जटाओं का रखरखाव कैसे कर पाते हैं तो इसके लिए आप ये जान लें कि ना ही कोई शैम्पू और ना ही कोई कंडीश्नर सिर्फ़ मुल्तानी मुट्टी और भस्म लगाकर ही जटाधारी बाबा अपने जटाओं को दिन पर दिन बड़ा करते जा रहे हैं…हालाँकि इतनी लंबी जटाएँ रखने के पीछे का तर्क भी देते हैं…बताते हैं कि शिव गण की पहचान ही जटाओं से होती हैं। अब यहाँ गौर करने वाली बात ये कि इन्ही जटाओं की चर्चा अमेरिका तक में हैं..ऐसे में अगर जटाधारी बाबा का सामना ट्रंप से हो जाए, तो उनकी इन्हीं मज़बूत जटाओं से ट्रंप का निकल पानानामुमकिन समझिये, मतलब ये कि जटाधारी बाबा के इस विचित्र व्यक्तित्व को ट्रंप कभी भूला नहीं पायेंगे।

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