2 या 3 फरवरी? इस दिन मनाई जाएगी बसंत पंचमी 2025, जानें सही तारीख और पूजा का शुभ समय
बसंत पंचमी 2025 का पर्व इस साल 2 फरवरी को मनाया जाएगा। यह दिन मां सरस्वती की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन पीले वस्त्र पहनना, मां सरस्वती की पूजा करना और पीले रंग का भोग चढ़ाना अत्यंत शुभ होता है।
30 Jan 2025
(
Updated:
11 Dec 2025
01:15 AM
)
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बसंत पंचमी, जिसे सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है, भारत में एक प्रमुख त्योहार है जो ज्ञान, संगीत, कला और विज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है, जो इस वर्ष 2025 में 2 फरवरी को पड़ रहा है।
बसंत पंचमी की तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का आरंभ 2 फरवरी 2025 को सुबह 9 बजकर 14 मिनट पर होगा, और इसका समापन 3 फरवरी 2025 को सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, बसंत पंचमी का पर्व 2 फरवरी 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 9 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा, जिसमें कुल 5 घंटे 26 मिनट का समय मिलेगा।
बसंत पंचमी का महत्व
बसंत पंचमी का दिन विशेष रूप से छात्रों और शिक्षार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिन, स्कूल और कॉलेजों में देवी सरस्वती का आशीर्वाद पाने के लिए विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। कई ज्योतिषी बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त के रूप में मानते हैं, जो इसे विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त बनाता है। यह विश्वास सरस्वती पूजा के महत्व को बढ़ाता है, जिससे पूरा दिन पूजा और अच्छे कामों के लिए शुभ हो जाता है।
सरस्वती पूजा की विधि
बसंत पंचमी के दिन, प्रातःकाल स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करें, क्योंकि पीला रंग बसंत ऋतु और समृद्धि का प्रतीक है। पूजा स्थल को स्वच्छ करके, मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पूजा में चंदन, हल्दी, केसर, पीले या सफेद फूल, रोली, अक्षत आदि का उपयोग करें। मां सरस्वती को पीले रंग की मिठाई, जैसे बेसन के लड्डू, केसर रबड़ी, पीले चावल, बूंदी या बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं, क्योंकि ये सभी उन्हें प्रिय हैं। पूजा के अंत में मां सरस्वती की आरती करें और प्रसाद को सभी में वितरित करें।
बसंत पंचमी से जुड़े रोचक तथ्य
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इसे सरस्वती जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
इस दिन को अबूझ मुहूर्त माना जाता है, अर्थात इस दिन बिना किसी मुहूर्त के भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र पहनने और पीले रंग के खाद्य पदार्थों का सेवन करने की परंपरा है, जो बसंत ऋतु के आगमन और फसलों के पकने का प्रतीक है।
बसंत पंचमी का पर्व न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह प्रकृति के साथ हमारे गहरे संबंध को भी दर्शाता है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा करके हम ज्ञान, संगीत और कला के क्षेत्र में उनकी कृपा प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही, बसंत ऋतु के आगमन का स्वागत करते हुए, हम जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार कर सकते हैं।
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