नया सीकरण, नया फॉर्मूला, बिहार की सत्ता में ऐसे होगा बंटवारा… JDU को डिप्टी CM और 15 मंत्री पद, BJP के पास स्पीकर?
नीतीश कुमार के द्वारा राज्यसभा जाने के ऐलान के बाद बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर बैठकें जारी है. हर कोई नई सरकार के गठन में दलों की भागीदारी के बारे में जानना चाहता है. आइए, आपको बताते हैं.
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नीतीश कुमार एक ऐसे राजनेता हैं जो हमेशा अपने फैसलों से चौंकाते रहे हैं. पिछले कुछ सालों में उन्होंने अपने सहयोगियों से लेकर विरोधियों तक, सबको हैरान किया है. वहीं, अब एक बार फिर से नीतीश कुमार चर्चा के केंद्र में है. कारण- उनका राज्यसभा जाने का फैसला.
अब कोई भी नीतीश के इस नए फैसले को भाप नहीं पा रहा है, क्योंकि नीतीश वहीं नेता हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी बहुत प्यारी है. खैर, अब चूंकि नीतीश कुमार ने दिल्ली आने का फैसला कर लिया है, तो बिहार में भी नई सरकार के गठन को लेकर कवायद भी तेज हो गई है. बैठकों का दौड़ जारी है और सवाल कई हैं, जैसे— अब बिहार का अगला सीएम कौन होगा? एक ही डिप्टी सीएम होगा या पिछली बार की तरह दो उपमुख्यमंत्री बनाए जाएंगे? क्या मंत्रीमंडल में भी बदलाव किया जाएगा? ऐसे कई सवाल हैं जिसका जवाब बिहार की जनता भी जानना चाहती है.
नई सरकार में किन दलों की क्या होगी भागीदारी?
जानकारी के अनुसार, बिहार में नई सरकार के गठन में दलों की भागीदारी कुछ इस तरह से हो सकती है. बीजेपी के खाते में मुख्यमंत्री पद के साथ-साथ मंत्रिमंडल के 15 पद आ सकते हैं. जेडीयू से एक डिप्टी सीएम का चुनाव होने की उम्मीद है. ऐसी अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि अब नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को पार्टी की कमान चौंपी जा सकती है, जिसके बाद उन्हें उप-मुख्यमंत्री पद का मुख्य दावेदार भी माना जा रहा है. इसके अलावा, जेडीयू के कोटे से भी 15 मंत्री सरकार में शामिल हो सकते हैं.
अन्य सहयोगी दलों की क्या होगी हिस्सेदारी?
चिराग पासवान की पार्टी LPG(R) को दो मंत्री पद मिल सकते हैं. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा को एक मंत्री पद मिल सकता है और जीतनराम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा से भी एक मंत्री को शामिल किया जा सकता है.
बिहार को कब तक मिलेगा नया मुख्यमंत्री?
बिहार में अगला सीएम कौन होगा, इसे लेकर अभी फाइनल निर्णय नहीं हुआ है, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगले महीने से पहले किसी घोषणा की उम्मीद कम है. वहीं, मौजूदा मुख्यमंत्री का पद 10 अप्रैल को खाली हो जाएगा, क्योंकि 9 अप्रैल को मौजूदा राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा. जानकारी के अनुसार, नीतीश कुमार अपना राजनीतिक ठिकाना पटना ही रखेंगे और केवल संसदीय सत्र के दौरान ही दिल्ली का रुख करेंगे.
नीतीश के फैसले से पार्टी के भीतर गुस्सा
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नीतीश कुमार के इस फैसले से कार्यकर्ताओं भीतर काफी दुख और गुस्सा है. बैठक में सभी प्रतिनिधी अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं. यहां तक कि विपक्ष भी नीतीश कुमार को घेर रहा है. विपक्ष का कहना है कि नीतीश कुमार ने बिहार की जनता के साथ धोखा कर रहे हैं. जाहिर सी बात है, बिहार की जनता ने नीतीश कुमार को वोट देकर चुनाव जिताया है. वे नीतीश को ही मुख्यमंत्री बने रहना देखना चाहते हैं. ऐसे में नीतीश के इस फैसला ने उनके समर्थकों को झटका दिया है.
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