पाकिस्तानी पंजाब की दादागिरी से परेशान हुए सत्ताधारी गठबंधन के सांसद, उठाई बंटवारे की मांग, शहबाज शरीफ की बढ़ी टेंशन

पाकिस्तानी संसद में पंजाब के बंटवारे कर और दो प्रांत बनाने की मांग उठी है. सत्ताधारी गठबंधन के लोग ही जब पीएम के राज्य को तोड़ने की मांग करने लगें तो ये बहुत बड़ी चुनौती की आहट है. इसने शहबाज़ शरीफ की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

Author
22 Jun 2025
( Updated: 07 Dec 2025
08:17 PM )
पाकिस्तानी पंजाब की दादागिरी से परेशान हुए सत्ताधारी गठबंधन के सांसद, उठाई बंटवारे की मांग, शहबाज शरीफ की बढ़ी टेंशन

कहते हैं झूठ के पांव नहीं होते, ये कुछ कदम चलकर दम तोड़ देता है. ये कहावत पाकिस्तान पर सटीक बैठता है. जिस देश की बुनियाद ही क़त्ल-ओ-ग़ारत और झूठ पर पड़ी हो उसे ज्यादा दिन तक भारत विरोध और राष्ट्रवाद के चूरण पर नहीं चलाया जा सकता है. ऑपरेशन सिंदूर में भारत की कार्रवाई के बाद भले पाक आर्मी अपनी जनता को प्रोपेगेंडा और हिंदुओं को खिलाफ एकजुट कर लिया हो लेकिन अब इसकी धीरे-धीरे पोल खुल रही है.

अब पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में पाकिस्तानी पीएम शहबाज़ शरीफ की सरकार को अपने ही सहयोगियों ने घेरना शुरू कर दिया है. शहबाज़ की पार्टी पीएमएल-एन और गठबंधन में शामिल बिलावल भुट्टो जरदारी की पार्टी पीपीपी, दोनों की ओर से दो नए प्रांतों की ज़ोरदार मांग उठी है.

पीपीपी के एक सांसद ने पंजाब को विभाजित कर नया प्रांत बनाने की बात कही, वहीं शहबाज़ सरकार के ही धार्मिक मामलों के मंत्री सरदार मुहम्मद यूसुफ ने खैबर पख्तूनख्वा में ‘हजारा प्रांत’ बनाए जाने की मांग रख दी.

डॉन अखबार के मुताबिक, ये बयान संसद में बजट सत्र के दौरान दिए गए. खास बात ये है कि खैबर पख्तूनख्वा को इमरान खान का राजनीतिक गढ़ माना जाता है, ऐसे में वहां नए प्रांत की मांग उठना सियासी तौर पर और भी मायने रखता है. ये पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान में नए राज्य की मांग उठी हो. पाक में जनसंख्या लगातार बढ़ रही है, डेमोग्राफी बिल्कुल बदल गई लेकिन राज्य उतने के उतने ही रहे.

पाकिस्तान में पंजाब प्रांत की ही बोलती है तूती?

आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान में पांच प्रांत माने जाते हैं. पंजाब, सिंध, खैबर-पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और गिलगिट-बाल्टिस्तान ही ऑपिशियली रूप से प्रांत माने जाते हैं.

इसके अलावा पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) और इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी को केंद्र के अधीन क्षेत्र के रूप में रखा गया है. पंजाब पाकिस्तान का सबसे बड़ा और राजनीतिक रूप से सबसे प्रभावशाली प्रांत है. यहीं से पाकिस्तान की पूरी मशीनरी, आर्मी, अर्थव्यवस्था, ब्यूरोक्रेसी और मीडिया, सब जगह इनका कब्जा है. वहीं सिंध को आर्थिक रूप से सबसे मजबूत माना जाता है, क्योंकि इसमें कराची जैसे बड़े शहर हैं. पाकिस्तान का सबसे बड़ा पोर्ट भी कराची ही है. बलूचिस्तान और खैबर-पख्तूनख्वा को लंबे समय से पाकिस्तान के सबसे अशांत और अस्थिर प्रांतों में गिना जाता है. इनको लेकर हमेशा से विवाद रहा है और

इन दोनों प्रांतों में पहले से ही आज़ादी और अलगाववाद की मांगें उठती रही हैं. अब हालात और बिगड़ सकते हैं क्योंकि खैबर-पख्तूनख्वा को तोड़कर 'हजारा प्रांत' बनाए जाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है. सरकार के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि यह मांग अब खुद सरकारी मंत्री के मुंह से संसद में उठ चुकी है.

पाकिस्तान में नए प्रांतों की मांग से बढ़ी शबहाज की टेंशन

पाकिस्तान में हजारा और दक्षिण पंजाब जैसे नए प्रांतों की मांग कोई नई नहीं है, लेकिन अब ये मांग खुद सरकार के भीतर से तेज़ होती जा रही है. इससे शहबाज़ शरीफ सरकार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. सरदार मुहम्मद यूसुफ, जो शहबाज़ सरकार में धार्मिक मामलों के मंत्री हैं, का कहना है कि छोटे-छोटे प्रांत बनने से इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट तेज़ होगा और लोगों को छोटी-छोटी ज़रूरतों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा. इसके अलावा यूसुफ ने खैबर पख्तूनख्वा की सरकार पर आरोप लगाया कि वह हजारा के लोगों के साथ भेदभाव करती है और हजारा के लोग आज भी शुद्ध पानी जैसी मूल सुविधाओं से वंचित हैं.

वहीं, पीपीपी नेता महमूद ने कहा कि पाकिस्तान का 60% हिस्सा पंजाब में समाया हुआ है. अगर इसे नहीं तोड़ा गया, तो बाकी क्षेत्रों में पंजाब विरोधी आंदोलन तेज़ हो सकता है. उन्होंने पुराने नारे "पंजाब की दादागिरी नहीं चलेगी" की भी याद दिलाई. इसके अलावा आपको याद होगा कि कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान के सिंध प्रांत में पानी को लेकर प्रदर्शन हुआ था जिसमें कहा गया कि सिंध के साथ अन्याय हो रहा है और उनके हिस्से के सिंधु नदी के पानी को पंजाब की ओर मोड़ा जा रहा है. इस प्रदर्शन के दौरान सिंध के गृह मंत्री का घर भी फूंक दिया गया था.

क्या है राजनीतिक चाल?

यह भी पढ़ें

पंजाब में पीएमएल-एन की सरकार है, और यहां पीपीपी अब तक अपनी पकड़ नहीं बना पाई. दूसरी ओर, खैबर-पख्तूनख्वा में पीटीआई का दबदबा है और पीएमएल-एन सत्ता से बाहर है. ऐसे में दोनों पार्टियां, पीएमएल-एन और पीपीपी अपने-अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए नए प्रांतों की मांग को हवा दे रही हैं, ताकि सत्ता की हिस्सेदारी बढ़ाई जा सके. इसका असर बहुत गहरा होगा. दक्षिण पंजाब और हजारा प्रांत की मांग भले ही पुरानी हो, लेकिन जब खुद सरकार के मंत्री और सत्तारूढ़ दल के नेता ही खुलेआम इसकी वकालत करने लगें, तो जाहिर है कि सरकार पर भीतर से दबाव बढ़ने लगा है.

Tags

Advertisement

टिप्पणियाँ 0

Advertisement
Podcast video
Startup का सच बताकर Abhishek Kar ने दे दिया करोड़पति बनने का गुरु मंत्र!
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें