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पहले को-पायलट ने पढ़ी नमाज, फिर कैप्टन पर किया हमला... स्मित ने नेतन्याहू को सुनाई आपबीती, PM मोदी संग इजरायल आने का मिला खास न्योता

कैप्टन स्मित मच्छार ने 174 यात्रियों की जान बचाई. उनकी बहादुरी पर नेतन्याहू ने फोन कर तारीफ की और इजरायल के स्वतंत्रता दिवस के मशाल प्रज्ज्वलन समारोह में शामिल होने का न्योता दिया.

पहले को-पायलट ने पढ़ी नमाज, फिर कैप्टन पर किया हमला... स्मित ने नेतन्याहू को सुनाई आपबीती, PM मोदी संग इजरायल आने का मिला खास न्योता
Image Source: X/@narendramodi (File)/ @almog_cohen08
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फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में सवार 174 यात्रियों की जिंदगी बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की अब पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अस्पताल में इलाज करा रहे कैप्टन स्मित से फोन पर बातचीत की और उनके साहस की जमकर तारीफ की. इस दौरान नेतन्याहू ने उन्हें इजरायल के स्वतंत्रता दिवस पर होने वाले वार्षिक 'टॉर्च लाइटिंग' समारोह में शामिल होने का न्योता भी दिया. इस बातचीत में कैप्टन स्मित ने बताया कि को-पायलट पहले नमाज पढ़ा फिर उनपर जानलेवा हमला किया. 

दरअसल, स्मित मच्छार ने जिस तरह से अपनी हिम्मत और साहस का परिचय देते हुए अपनी ज़िंदगी को दांव पर लगाकर सबकी रक्षा की तो उनका सम्मान होना भी स्वाभाविक है. पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे फोन पर बात करके स्थिति को जाना और हाल चाल लिया, अब इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित से फोन पर बात करके उन्हें भारत समेत पूरी दुनिया का सच्चा हीरो करार दिया. इस चर्चा की सबसे खास बात यह है कि जिस स्वतंत्रता दिवस समारोह के में वार्षिक मशाल प्रज्जवलन का सम्मान आमतौर पर इजरायली नागरिकों को दिया जाता है, लेकिन कैप्टन स्मित की बहादुरी को देखते हुए उन्हें इस समारोह में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है. 

कैप्टन स्मित ने नेतन्याहू को सुनाई आपबीती 

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दुबई के अस्पताल में इलाज के दौरान कैप्टन स्मित ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू को फोन पर पूरी घटना के बारे में बताया. हिंदुस्तान क़ीक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि शुरुआत में सब कुछ बिल्कुल सामान्य था. तभी को-पायलट ने नमाज पढ़ने की बात कही. और पीछे चला गया. कैप्टन स्मित ने धार्मिक सम्मान को ध्यान में रखते हुए पीछे मुड़कर देखने के बजाय अपना ध्यान आगे रखा. कुछ ही मिनट बाद उन्हें अचानक पीछे से चोट लगी. पहले उन्हें लगा कि शायद विमान में कोई समस्या आई है. लेकिन इसके बाद लगातार को-पायलट एक के बाद एक हमला करने लगा. तब उन्हें समझ आया कि हमला विमान पर नहीं, बल्कि खुद उन पर हो रहा है.

कॉकपिट का दरवाजा बना सबसे बड़ी चुनौती

हमले के दौरान कैप्टन स्मित बुरी तरह घायल हो गए थे. उनकी आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा था, लेकिन उस समय उनके सामने सिर्फ एक ही सवाल था कि विमान में मौजूद लोगों की जान कैसे बचाई जाए. कॉकपिट का दरवाजा बाहर से कोड के जरिए खोला जाना था. बाहर मौजूद चालक दल के सदस्य कोड डालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हमलावर को-पायलट उसे ब्लॉक कर रहा था. ऐसे में दरवाजा खोलने का एकमात्र रास्ता अंदर मौजूद 'ट्विस्ट नॉब' था. कैप्टन स्मित ने बताया कि वह फर्श पर गिर चुके थे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी. उन्होंने अपनी बची हुई ताकत जुटाई और हाथ बढ़ाकर दरवाजे के नॉब तक पहुंचे. किसी तरह उसे घुमाकर दरवाजा खोल दिया. दरवाजा खुलते ही बाहर मौजूद सहयोगी तुरंत अंदर पहुंचे और हालात को संभाल लिया.

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नेतन्याहू ने की बहादुरी की तारीफ

इस पूरी घटना में कैप्टन स्मित मच्छार की सूझबूझ और हिम्मत ने बड़ा फर्क पैदा किया. गंभीर खतरे के बावजूद उन्होंने खुद को संभाला और ऐसा कदम उठाया, जिससे विमान में मौजूद यात्रियों को बचाने में मदद मिली. प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित की बहादुरी को सलाम किया. उन्होंने कहा कि वह इजरायल, भारत और पूरी दुनिया के लिए असली हीरो हैं. नेतन्याहू ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इजरायल के अगले स्वतंत्रता दिवस समारोह में 'टॉर्च लाइटिंग' कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया.

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बताते चलें कि घटना के बाद कैप्टन स्मित की बहादुरी सिर्फ एक विमान हादसे को टालने की कहानी नहीं रह गई है. यह उस पल की कहानी बन गई है, जब एक पायलट खुद गंभीर खतरे में होने के बावजूद अपने साथ मौजूद सैकड़ों लोगों की जिंदगी के बारे में सोचता रहा. यही वजह है कि उनकी बहादुरी को लेकर भारत और इजरायल दोनों जगह सम्मान और चर्चा हो रही है. UAE में भारतीय दूतावास की ओर से भी बताया गया है कि कैप्टन स्मित की सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है और वह खतरे से बाहर हैं.

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