मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान के नए प्रस्ताव पर भड़के ट्रंप, बोले- जरूरत पड़ी तो करेंगे स्ट्राइक; जानें पूरा मामला
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ईरान ने युद्धविराम और होर्मुज खाड़ी खोलने का प्रस्ताव दिया, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप इससे संतुष्ट नहीं हैं और फिर से हमले की चेतावनी दी है. ट्रंप ने कहा कि प्रस्ताव की समीक्षा करेंगे, जबकि ईरान ने बदले में हमले न करने की गारंटी मांगी है.
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अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को दो महीने से ज्यादा का वक्त हो चुका है, लेकिन हालात अब भी ठंडे नहीं पड़े हैं. सीजफायर के बावजूद दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी साफ दिख रही है. इस बीच ईरान ने एक नया प्रस्ताव देकर बातचीत की राह खोलने की कोशिश की, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे तुरंत स्वीकार नहीं किया. उल्टा उन्होंने फिर से सैन्य हमलों की चेतावनी देकर माहौल को और गंभीर बना दिया है.
ट्रंप का सख्त रुख
फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने साफ संकेत दिए कि जरूरत पड़ी तो ईरान पर फिर से स्ट्राइक्स शुरू हो सकती हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के प्रस्ताव की समीक्षा की जाएगी. ट्रंप ने मौजूदा नाकेबंदी को ‘दोस्ताना’ बताते हुए कहा कि इसे कोई चुनौती नहीं दे रहा है, जिससे साफ है कि अमेरिका अपने दबाव की रणनीति को जारी रखना चाहता है.
ईरान का नया प्रस्ताव क्या है?
दरअसल, ईरान की तरफ से जो प्रस्ताव सामने आया है, उसमें तीन अहम बातें शामिल हैं. पहली, तुरंत युद्धविराम हो और अमेरिका व इजरायल यह गारंटी दें कि आगे कोई हमला नहीं करेंगे. दूसरी, ईरान होर्मुज खाड़ी को खोलने के लिए तैयार है, बशर्ते अमेरिका अपनी नाकेबंदी हटाए. तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि परमाणु मुद्दे पर बातचीत को फिलहाल टाल दिया जाए और माहौल सामान्य होने के बाद इस पर अलग से चर्चा हो.
परमाणु मुद्दे पर ईरान का रुख
ईरान का कहना है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए चला रहा है और उसे यूरेनियम समृद्ध करने का अधिकार मिलना चाहिए. हालांकि, वह कुछ समय के लिए इस प्रक्रिया को रोकने पर भी विचार कर सकता है. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रस्ताव उनकी तरफ से एक बड़ा लचीला कदम है, ताकि पहले युद्ध को रोका जा सके और हालात को स्थिर किया जा सके. लेकिन सवाल यह है कि ट्रंप इस प्रस्ताव से संतुष्ट क्यों नहीं हैं. दरअसल, अमेरिका शुरू से ही इस बात पर अड़ा हुआ है कि जब तक ईरान के परमाणु हथियार बनाने की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं होती, तब तक कोई स्थायी समझौता संभव नहीं है. ट्रंप ने भी यही संकेत दिया कि ईरान कुछ ऐसी शर्तें रख रहा है, जिन पर वह सहमत नहीं हो सकते. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि असल आपत्ति किस बात पर है.
कैसे हैं मौजूदा हालात?
फिलहाल स्थिति यह है कि चार हफ्तों से जंगबंदी जरूर लागू है, लेकिन जमीन पर तनाव बना हुआ है. दोनों देशों की तरफ से नाकेबंदी जारी है और इसका असर वैश्विक बाजार पर भी पड़ रहा है. तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है. हालाँकि बीच-बचाव की कोशिशें भी जारी हैं. पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच संवाद शुरू कराने की पहल की है, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है. बातचीत के अगले दौर की कोई तारीख तय नहीं हुई है, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है.
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बहरहाल, हालात ऐसे मोड़ पर खड़े हैं जहां एक तरफ बातचीत की उम्मीद जिंदा है, तो दूसरी तरफ फिर से हमलों का खतरा भी मंडरा रहा है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या ट्रंप ईरान के प्रस्ताव को मंजूरी देंगे या फिर दुनिया एक बार फिर बड़े टकराव की ओर बढ़ेगी.
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