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गैस बुकिंग में नया नियम लागू, FIFO सिस्टम से बदली पूरी व्यवस्था, अब इस तरह मिलेगा सिलेंडर

LPG Crisis: इस समस्या को संभालने के लिए पेट्रोलियम कंपनियों ने एक नई व्यवस्था लागू की है. जिससे गैस का सही तरीके से वितरण हो सके और किसी तरह की गड़बड़ी या कालाबाजारी न हो.

Image Source: Social Media
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LPG Booking Rules Update: ईरान -इजराइल वॉर के चलते इन दिनों एलपीजी ( LPG ) गैस सिलेंडर  की कमी ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. इसी समस्या को संभालने के लिए पेट्रोलियम कंपनियों ने एक नई व्यवस्था लागू की है. जिससे गैस का सही तरीके से वितरण हो सके और किसी तरह की गड़बड़ी या कालाबाजारी न हो. अब सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ है कि ''पहले आओ और पहले पाओ'' यानी की FIFO (FIRST IN FIRST OUT ) सिस्टम लागू कर दिया गया है. इसका मतलब है कि जिसने पहले गैस सिलिंडर बुक किया है, उसे पहले ही सिलेंडरमिलेगा. जब तक पुरानी बुकिंग  पूरी नहीं हो जाती , तब तक नई बुकिंग वालों को इंतजार करना पड़ेगा. आइए जानते है LPG कि किल्लत में क्या हुए नए बदलाव.....
 
गैस एजेंसियों पर भी सख्ती

नई व्यवस्था के तहत गैस एजेंसियों को भी काफी नियमों का पालन करना होगा. अब उन्हें रोजाना की डिलीवरी की सूची अपने काउंटर पर लगानी होगी, ताकि हर उपभोक्ता को यह साफ दिख सके कि किस तारीख की बुकिंग वाले लोगों को गैस दी जा रही है. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लोग बेवजह एजेंसी पर जाकर तुरंत सिलेंडर की मांग नहीं करेंगे. इसके अलावा, एजेंसी मालिकों को अब सिर्फ डेढ़ दिन का ही स्टॉक रखने की अनुमति दी गई है. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि कोई भी एजेंसी ज्यादा गैस जमा करके कालाबाजारी न कर सके. साथ ही, अब “तुरंत बुकिंग पर तुरंत डिलीवरी” की सुविधा भी बंद कर दी गई है. यानी अब हर किसी को अपनी बारी का इंतजार करना ही पड़ेगा.

कॉमर्शियल गैस महंगी, जेब पर असर

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एक और बड़ी खबर यह है कि कॉमर्शियल एलपीजी सिलिंडर के दाम में 218 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है. इसका सीधा असर छोटे व्यापारियों, होटल-ढाबों और दुकानदारों पर पड़ेगा. इससे खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं, जो आम लोगों की जेब पर असर डालेगा.

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किसानों के लिए डीजल खरीद पर नजर

सिर्फ गैस ही नहीं, डीजल की खरीद पर भी अब निगरानी बढ़ा दी गई है. खासकर गेहूं की कटाई के समय किसान ज्यादा मात्रा में डीजल खरीदते हैं, इसलिए अब पेट्रोल पंपों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे किसानों का पूरा रिकॉर्ड रखें - जैसे नाम, पता और फोन नंबर. अगर कोई व्यक्ति डीजल का भंडारण करता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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स्कूलों में मिड-डे मील पर असर

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इस गैस किल्लत का असर अब स्कूलों तक भी पहुंच गया है. कई सरकारी और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में गैस सिलिंडर समय पर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे मिड-डे मील बनाने में दिक्कत हो रही है. कुछ जगहों पर रसोइयों को मजबूरी में लकड़ी या पारंपरिक चूल्हों का सहारा लेना पड़ रहा है. जिले में हजारों स्कूल इस योजना के तहत चलते हैं, और अगर गैस की आपूर्ति ऐसे ही बाधित रही, तो बच्चों के भोजन और पोषण पर सीधा असर पड़ेगा. इस स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने अधिकारियों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द गैस एजेंसियों को निर्देश दें, ताकि स्कूलों में गैस की सप्लाई बिना रुकावट जारी रह सके.

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