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CGHS Scheme Update: अब 10 लाख तक का मेडिकल क्लेम कर सकेंगे केंद्रीय कर्मचारी, जानिए पूरा प्रोसेस और नया अपडेट

CGHS Scheme Update: अब मंत्रालयों और विभागों के प्रमुख 10 लाख रुपये तक के मेडिकल बिल को बिना Integrated Finance Division (IFD) की मंजूरी के पास कर सकेंगे. पहले यह सीमा 5 लाख रुपये थी. यानी अब जरूरत पड़ने पर दोगुनी राशि तक का बिल सीधे मंजूर किया जा सकेगा.

Image Source: Social Media

CGHS Scheme Update: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए एक अच्छी खबर आई है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) के तहत मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति यानी रीइंबर्समेंट की अधिकतम सीमा बढ़ा दी है. अब मंत्रालयों और विभागों के प्रमुख 10 लाख रुपये तक के मेडिकल बिल को बिना Integrated Finance Division (IFD) की मंजूरी के पास कर सकेंगे. पहले यह सीमा 5 लाख रुपये थी. यानी अब जरूरत पड़ने पर दोगुनी राशि तक का बिल सीधे मंजूर किया जा सकेगा.

सरकार का मानना है कि इस फैसले से इलाज के बाद बिल पास होने में कम समय लगेगा. पहले बड़ी राशि के मामलों में अतिरिक्त मंजूरी की प्रक्रिया के कारण देरी हो जाती थी, जिससे कर्मचारियों और पेंशनरों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था. अब यह प्रक्रिया आसान और तेज होगी.

CGHS रेट वाले मामलों में भी बढ़ी सीमा

केवल सामान्य मामलों में ही नहीं, बल्कि उन मामलों में भी सीमा बढ़ाई गई है जहां किसी तरह की छूट नहीं दी जाती और भुगतान सिर्फ तय CGHS रेट के अनुसार किया जाता है. पहले ऐसे मामलों में अधिकतम सीमा 2 लाख रुपये थी. अब इसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है.
इसका मतलब यह है कि अगर इलाज CGHS की तय दरों पर हुआ है और नियमों का पूरा पालन किया गया है, तो अब 5 लाख रुपये तक का बिल आसानी से निपटाया जा सकेगा. इससे उन मरीजों को खास फायदा होगा जिन्हें गंभीर बीमारी या बड़ी सर्जरी के कारण ज्यादा खर्च उठाना पड़ता है.

सरकार ने क्या कहा?

स्वास्थ्य मंत्रालय ने 16 फरवरी 2026 को जारी एक आधिकारिक ज्ञापन में बताया कि पूरी समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया है. मंत्रालय का कहना है कि मेडिकल खर्च लगातार बढ़ रहे हैं और कई मामलों में 5 लाख रुपये की पुरानी सीमा पर्याप्त नहीं थी. इसलिए इसे बढ़ाकर 10 लाख रुपये करना जरूरी समझा गया.
हालांकि, सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि यह सुविधा तय नियमों और शर्तों के अनुसार ही मिलेगी. यानी सीमा बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि नियमों में ढील दी जाएगी.

किन शर्तों पर मिलेगा फायदा?

10 लाख रुपये तक के मेडिकल क्लेम को मंजूरी देने के लिए दो मुख्य शर्तें रखी गई हैं. पहली, CGHS या CS(MA) नियमों में किसी भी तरह की छूट नहीं दी जाएगी. यानी सभी दस्तावेज पूरे होने चाहिए और इलाज अधिकृत अस्पताल या मान्य प्रक्रिया के तहत ही हुआ होना चाहिए.
दूसरी शर्त यह है कि भुगतान केवल तय CGHS या CS(MA) रेट के अनुसार ही किया जाएगा. अगर अस्पताल ने तय दर से ज्यादा राशि ली है, तो अतिरिक्त रकम का भुगतान सरकार नहीं करेगी. क्लेम केवल रेट लिस्ट के हिसाब से ही पास होगा.

कर्मचारियों और पेंशनरों को कैसे होगा फायदा?

इस फैसले से मेडिकल बिल पास होने की प्रक्रिया तेज होगी और कागजी कार्रवाई कम होगी. बड़ी बीमारी या आपात स्थिति में लोगों को अपने पैसे के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा.खासकर पेंशनरों के लिए यह राहत की बात है, क्योंकि अक्सर उनकी आय सीमित होती है और इलाज का खर्च भारी पड़ता है.
सरकार का उद्देश्य है कि कर्मचारियों और पेंशनरों को समय पर आर्थिक सहायता मिले और उन्हें इलाज के दौरान वित्तीय चिंता का सामना न करना पड़े. यह फैसला केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है.

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