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न दुकान, न बड़ा निवेश... बाइक पर ही खोल लिया पंक्चर सेंटर, मंगलुरु के शख्स का अनोखा जुगाड़ वायरल
कर्नाटक के मंगलुरु में एक शख्स ने अपनी बाइक को ही चलता-फिरता पंक्चर सर्विस सेंटर बना दिया है. एयर कंप्रेसर और जरूरी टूल्स से लैस यह बाइक रास्ते में फंसे लोगों को मौके पर ही पंक्चर की सुविधा दे रही है.
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कहते हैं कि जरूरत ही आविष्कार की जननी होती है. जब किसी समस्या का सामना करना पड़ता है, तो कई बार उसी से कमाई और दूसरों की मदद करने का नया रास्ता भी निकल आता है. कर्नाटक के मंगलुरु से सामने आया एक ऐसा ही अनोखा आइडिया इन दिनों सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है. यहां एक शख्स ने अपनी मोटरसाइकिल को ही चलता-फिरता पंक्चर सर्विस सेंटर बना दिया है. उसका यह देसी जुगाड़ लोगों को पसंद आ रहा है.
बाइक पर ही तैयार कर लिया पंक्चर बनाने का पूरा इंतजाम
आमतौर पर सड़क पर चलते समय गाड़ी का टायर पंक्चर हो जाए, तो चालक की परेशानी बढ़ जाती है. खासकर सुनसान रास्ते या रात के समय आसपास कोई मैकेनिक न मिले, तो वाहन को घसीटकर ले जाना भी मुश्किल हो जाता है. मंगलुरु के इस राइडर-मैकेनिक ने इसी समस्या का समाधान खोजा है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में उसकी मोटरसाइकिल पर एयर कंप्रेसर, पंक्चर ठीक करने के जरूरी उपकरण, टूल्स और लाइट जैसी चीजें व्यवस्थित तरीके से लगी दिखाई देती हैं. यानी जरूरत पड़ने पर उसे किसी दुकान तक पहुंचने की जरूरत नहीं पड़ती. वह अपनी बाइक से सीधे उस जगह पहुंच सकता है, जहां किसी की गाड़ी का टायर खराब हुआ हो. इससे वाहन चालक को मौके पर ही मदद मिल सकती है और उसका समय भी बचता है.
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बड़े शहरों में भी शुरू हो सकता है यह बिजनेस
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इस वीडियो की चर्चा केवल अनोखे जुगाड़ तक सीमित नहीं है. इसके साथ एक कारोबारी अवसर की बात भी सामने आई है. पोस्ट साझा करने वाले यूजर ने दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, मुंबई, हैदराबाद और जयपुर जैसे शहरों में इस तरह की मोबाइल पंक्चर सर्विस शुरू करने का प्रस्ताव दिया है. दावा किया गया है कि इच्छुक लोगों को बिना बाइक में निवेश किए फ्रेंचाइजी मॉडल के तहत स्कूटर उपलब्ध कराए जा सकते हैं. हालांकि, इस ऑफर की शर्तों और व्यावसायिक व्यवस्था की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है. फिर भी यह विचार दिखाता है कि छोटी जरूरतों को समझकर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं.
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सोशल मीडिया पर लोग कर रहे हैं तारीफ
वीडियो सामने आने के बाद यूजर्स इस शख्स की मेहनत और सोच की सराहना कर रहे हैं. कई लोगों का कहना है कि हाईवे या रात के समय ऐसी सुविधा बेहद उपयोगी साबित हो सकती है. कुछ यूजर्स ने इसे असली आत्मनिर्भरता और भारतीय जुगाड़ का उदाहरण बताया है. दरअसल, इस पहल की खासियत सिर्फ बाइक पर सामान बांधकर घूमना नहीं है, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की परेशानी को समझकर उसका व्यावहारिक हल निकालना है. सही योजना, जरूरी उपकरण और भरोसेमंद सेवा के साथ ऐसा मॉडल कई शहरों में उपयोगी साबित हो सकता है.
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बताते चलें कि मंगलुरु के इस शख्स का आइडिया यही संदेश देता है कि बड़ा कारोबार शुरू करने के लिए हमेशा बड़े निवेश की जरूरत नहीं होती. कभी-कभी एक छोटी सी समस्या पर नजर डालना ही नए रास्ते खोल देता है.