Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

जो लोग ड्रग्स को रोकने में नाकाम रहे, वे अब पंजाब के 'युद्ध नशेआं विरुद्ध' से परेशान हैं: अमन अरोड़ा

अमन अरोड़ा ने कहा कि चुनौती के आकार को देखते हुए, राजनीतिक नेताओं को गांव के रिप्रेजेंटेटिव्स पर दी गई ज़िम्मेदारियों को समझने की ज़रूरत है. उन्होंने आगे कहा, अभी के हालात देखिए. 13,500 गांव हैं. जहां भी ऐसी स्थिति बनती है, एक तरफ कोई नशा तस्करी में शामिल होता है और दूसरी तरफ पंचायत होती है.

Image Credits: Punjab Information Department
Loading Ad...

आम आदमी पार्टी (आप ) ने सोमवार को सवाल किया कि विपक्षी नेता रवनीत सिंह बिट्टू, प्रताप सिंह बाजवा और बिक्रम सिंह मजीठिया एक ऐसे व्यक्ति का बचाव करने के लिए जल्दबाजी में हैं, जिसके खिलाफ 2018 से एनडीपीएस आबकारी और बलात्कार जैसे 9 केस दर्ज हैं और जिसे 4 केस में दोषी ठहराया जा चुका है. इस बीच, नमोल की ज़मीनी हकीकत पर विपक्ष चुप है, जहां दो पंचायतें, गुरुद्वारा कमेटियां, किसान संगठन और गांववाले ड्रग्स की बिक्री के खिलाफ एकजुट हो गए हैं.

‘ड्रग्स पर किस तरह का राजनीतिक विवाद खड़ा किया गया है’

आप  ने कहा कि पिछली अकाली दल, कांग्रेस और भाजपा  सरकारों ने पैसे के बदले नशा तस्करों को संरक्षण दिया और पंजाब के युवाओं को ड्रग्स की ओर धकेला, जबकि भगवंत मान सरकार ने अपने 'युद्ध नशेआं विरुद्ध' के ज़रिए उस राजनीतिक गठबंधन को तोड़ दिया है और नशा तस्करों की सप्लाई लाइन तक पैसे का फ्लो रोक दिया है. पार्टी ने कहा कि विपक्ष का रिएक्शन इस कार्रवाई पर उनके दर्द को दिखाता है और अपने नेताओं को चुनौती दी कि वे लाश पर राजनीति करने के बजाय ज़मीनी स्तर पर आकर अपने दावों को दोहराएं.

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, आप  पंजाब के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा, "पिछले 10-12 दिनों में, आपने देखा होगा और आपके चैनलों ने भी दिखाया होगा कि पंजाब के गांवों में, खासकर हमारे जिले में, किस तरह की घटनाएं हुई हैं, और ड्रग्स पर किस तरह का राजनीतिक विवाद खड़ा किया गया है." 

Loading Ad...

‘पंजाब का भी नुकसान होता है’

Loading Ad...

आप  पंजाब प्रधान ने कहा, "हम इस बात से पूरी तरह सहमत हैं कि जब भी किसी की जान जाती है, तो यह सिर्फ़ उस व्यक्ति के घर या परिवार का नुकसान नहीं होता, बल्कि पूरे समाज का नुकसान होता है. लेकिन जब राजनीतिक पार्टियों के लोग, राजनीतिक लीडर सच छिपाकर अपने राजनीतिक फायदे के लिए घटिया राजनीति करते हैं, तो समाज का भी नुकसान होता है, पंजाब का भी नुकसान होता है और पंजाब का नाम भी बदनाम होता है. यही हम आज देख रहे हैं."

नमोल की घटना का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "आपने देखा होगा कि कल संगरूर ज़िले में ही नमोल गाँव के एक नौजवान जग्गा सिंह ने डीसी  ऑफ़िस के बाहर कोई ज़हरीली चीज़ निगल ली और बाद में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. लेकिन देखिए कल शाम से लेकर आज तक किस तरह की गंदी राजनीति हो रही है. यह इस बात का ताज़ा उदाहरण है कि कैसे इस घटना का इस्तेमाल पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है."

अमन अरोड़ा ने कहा, “नमोल गांव मेरे चुनाव क्षेत्र सुनाम में है और सुनाम के पास है. गांव तो एक है, लेकिन पंचायतें दो हैं. दोनों पंचायतों, पूरे गांव, सभी गुरुद्वारा कमेटियों और सभी किसान संगठनों ने मिलकर फैसला किया कि गांव में नशों को नहीं बिकने दिया जाएगा. सबने तय किया कि हमें एक साथ आकर हिम्मत दिखानी होगी और इस मुद्दे पर मिलकर काम करना होगा.”

Loading Ad...

उन्होंने कहा, “दोनों पंचायतों ने मिलकर प्रस्ताव पास किया कि वे गांव में ड्रग्स नहीं बिकने देंगे. यह पूरे गांव, पंचायतों, गुरुद्वारा कमेटियों और किसान संगठनों का मिलकर लिया गया फैसला था.”

7 सितंबर की घटना के बारे में बताते हुए मंत्री ने कहा, “7 तारीख को पंचायत के सदस्य और सरपंच एक साथ बैठे थे. जैसा कि मुझे बताया गया है, जग्गा सिंह वहां आया और बोला, ‘मेरी तलाशी लो.’ उसने उससे कहा, ‘भाई, तुम जाओ, तुम्हारी तलाशी लेने की कोई ज़रूरत नहीं है, पूरा गांव जानता है.’ थोड़ी दूर जाने के बाद उसने बहुत बुरी भाषा का इस्तेमाल करते हुए उनकी मां-बहनों को गालियां दीं. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच मामूली बहस हो गई.”

उन्होंने कहा, “इसके बाद जग्गा सिंह और पंचायत की तरफ से दोनों पक्षों की तरफ से चीमा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई. मामले की अभी जांच चल रही है.”

Loading Ad...

‘मेरी राय में जायज नहीं है’

12 सितंबर की घटना को याद करते हुए अमन अरोड़ा ने कहा, “12 तारीख को वह बोतल लेकर आया और धमकी दी कि अगर सरपंच और पंचायत के खिलाफ उसकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह आत्महत्या कर लेगा और इसके लिए वह खुद जिम्मेदार होगा. इस तरह किसी पर दबाव डालना अपने आप में खुद पर दबाव डालने का तरीका है.”

उन्होंने कहा, "सरपंच एक चुना हुआ प्रतिनिधि होता है. एक चुने हुए प्रतिनिधि पर यह कहकर दबाव डालना कि आप आत्महत्या कर लेंगे और उसका नाम लिया जाएगा, मेरी राय में जायज नहीं है."

Loading Ad...

डीसी  ऑफिस के बाहर हुई घटना के बारे में अमन अरोड़ा ने कहा, "इसके बाद कल की घटना हुई जब उन्होंने डीसी  ऑफिस के बाहर कुछ ज़हरीला निगल लिया. उनके परिवार का कोई भी सदस्य उनके साथ नहीं था. डीसी  ऑफिस के बाहर मौके पर पुलिस वाले मौजूद थे. पुलिस उन्हें पहले सिविल अस्पताल ले गई. फिर उन्हें सिविल अस्पताल से, शायद रविवार होने की वजह से और सभी डॉक्टर और सुविधाएँ उपलब्ध न होने की वजह से, प्राइवेट उम्मीद अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया. वहाँ उनकी हालत स्थिर हो गई और उनका इलाज किया गया. जब वह खतरे से बाहर हो गए, तो उन्हें राजिंद्र अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया."

अमन अरोड़ा ने इस घटना के इर्द-गिर्द बनाई जा रही राजनीतिक कहानी पर सवाल उठाए. "अब कल से चल रही राजनीति को देखिए. जग्गा सिंह के खिलाफ नौ केस रजिस्टर हुए हैं. नौ केस. ये केस क्या हैं? ड्रग्स से जुड़े केस. और ये आज रजिस्टर हुए केस नहीं हैं. ये 2018 के हैं. 6 अप्रैल 2018, 2019-20, 2017-18, फिर 2020, 2021 और इस साल जनवरी में भी केस रजिस्टर हुआ था."

उन्होंने कहा, "ये नौ केस क्या हैं? इन नौ केस में से चार में सज़ा हो चुकी है. इनमें ड्रग्स और शराब से जुड़े केस शामिल हैं. इस व्यक्ति के खिलाफ बलात्कार का केस भी रजिस्टर हुआ है."

Loading Ad...

अमन अरोड़ा ने सोशल मीडिया पर नेताओं के बयानों पर सवाल उठाया. "और अब कल शाम से आ रहे ट्वीट्स को देखिए. नेताओं के ट्वीट्स आ रहे हैं. मैं आज आपके सामने सिर्फ इसलिए आया हूं क्योंकि मैं दिखाना चाहता हूं कि ये राजनीतिक पार्टियां और उनके नेता किस हद तक निचले लेवल की राजनीति पर उतर आए हैं."

‘नेशनल लेवल के लीडर्स समेत अपने लीडर्स को सूचित किया’

उन्होंने कहा, "शुरू में हमारे लोकल राजनीतिक लीडर्स ने बयान दिए. उन्होंने स्टेट और नेशनल लेवल के लीडर्स समेत अपने लीडर्स को सूचित किया. फिर अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का ट्वीट आया जो कथित नशा तस्कर के समर्थन में और पंचायत के खिलाफ था. तरुण चुघ ने ट्वीट किया कि कथित नशा तस्कर नशे के खिलाफ आवाज उठा रहा था."

Loading Ad...

आप  पंजाब प्रधान ने कहा, "सचिन पायलट ने ट्वीट किया कि जग्गा सिंह नशों के खिलाफ आवाज उठा रहा था और पंजाब पुलिस कुछ नहीं कर रही थी. अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, प्रताप सिंह बाजवा, केवल सिंह ढिल्लों, रवनीत सिंह बिट्टू और विजय इंदर सिंगला सभी ने कहा कि जग्गा सिंह नशे रोकने के लिए काम कर रहा था जबकि पंचायत और पुलिस नशा तस्करी को बढ़ावा दे रही थी. इसके बाद बिक्रम मजीठिया ने भी यही बात कही. आमतौर पर जब बिक्रम मजीठिया ड्रग्स के बारे में बात करते हैं, तो यह अच्छा नहीं लगता, लेकिन वह ऐसा करते हैं.

अमन अरोड़ा ने कहा, "आपके अकाली दल के चुनाव क्षेत्र इंचार्ज विनरजीत सिंह गोल्डी हैं. वह क्या कह रहे हैं? उनका कहना है कि जग्गा सिंह, जिसे गांव में 'जग्गा ब्लैकिया' के नाम से जाना जाता है, ड्रग्स बेचता है और वे गांव के साथ खड़े हैं."

अमन अरोड़ा ने विपक्षी नेताओं से ज़िम्मेदारी लेने की अपील की. उन्होंने कहा, "मेरी इन नेताओं और इन पार्टियों से बस इतनी प्रार्थना है कि सिर्फ़ अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए, इतनी नीचे की राजनीति पर मत उतरो कि जिस आग पर तुम अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हो, उससे पंजाब में आग लग जाए."

Loading Ad...

अमन अरोड़ा ने कहा, "इन सभी पार्टियों और इन सभी नेताओं के लिए यह बहुत शर्मनाक है कि ज़मीनी हकीकत जाने बिना, वे सिर्फ़ पंजाब सरकार और हमें बदनाम करने के लिए ट्वीट कर रहे हैं, जबकि ज़मीनी हकीकत बिल्कुल अलग है."

बयान जारी करने वाले नेताओं को चुनौती देते हुए कैबिनेट मंत्री ने कहा, "मैं इन सभी नेताओं से, जिनके नाम मैंने लिए हैं, प्रार्थना करता हूं कि अगर आप अपने ट्वीट पर कायम हैं, तो नमोल गांव में आकर लोगों के सामने यही बात कहें. आकर कहें कि जग्गा सिंह ड्रग्स की बिक्री रोक रहा है और गांव और पंचायत इसे बढ़ावा दे रहे हैं. अगर हिम्मत है, तो आकर कहें." 

‘मैं इस तरीके की कड़ी निंदा करता हूं’

Loading Ad...

उन्होंने कहा, “गांव वाले ऐसी बातों को पूरी तरह से मना कर देंगे. इसलिए, मैं उनसे ज़िम्मेदारी वाली राजनीति करने की रिक्वेस्ट करता हूं. यह घटिया राजनीति शर्मनाक और निंदनीय है.” अमन अरोड़ा ने कहा कि राजनीतिक नेताओं को या तो अपने दावे साबित करने चाहिए या यह मानना चाहिए कि उन्होंने लोगों को गुमराह किया है. उन्होंने कहा, “मैं इस तरीके की कड़ी निंदा करता हूं.” “या तो इन लोगों को यह साबित करना चाहिए कि उनके ट्वीट सही हैं, या उन्हें अपनी गलती माननी चाहिए और जिस तरह से वे लोगों को गुमराह कर रहे हैं, उसके लिए पंजाब से माफी मांगें.”

किस राजनीतिक पार्टी ने जागरुकता मुहिम शुरू की?

सरकार की पूरी नशा विरोधी व्यापक रणनीति के बारे में बात करते हुए, अमन अरोड़ा ने कहा, “अब गांवों के हालात देखिए. सरकार ने तय किया है कि हम हर गांव और हर वार्ड में विलेज डिफेंस कमेटियां (वीडीसी) बनाएंगे. उन्होंने पूछा, “हमने पंजाब को ड्रग्स से बचाने के लिए 'युद्ध नशेआं विरुद्ध' मुहिम शुरू की है. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि हमने ड्रग्स को पूरी तरह खत्म कर दिया है. लेकिन हमारी कोशिशों में कमी कहां है? किस राजनीतिक पार्टी की सरकार ने विलेज डिफेंस कमेटियां बनाईं? किस राजनीतिक पार्टी की सरकार ने नशों को विरुद्ध जंग छेड़ी? किस राजनीतिक पार्टी ने जागरुकता मुहिम शुरू की?” उन्होंने सवाल किया.

Loading Ad...

अमन अरोड़ा ने कहा, "जो लोग ड्रग्स बेचते थे, वे आज हमसे सवाल कर रहे हैं. सरकार ने तय किया है कि विलेज डिफेंस कमेटियां बनाई जाएंगी, क्योंकि अगर गांव में कोई सबसे ज़्यादा ज़िम्मेदारी से काम कर सकता है, तो वह पंचायत है. पंचायत ज़मीनी स्तर पर लोगों की सरकार है."

वीडीसी  के ढांचे के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, "सरपंच वीडीसी का चेयरमैन होगा. वह सरपंच अकाली दल, कांग्रेस, भाजपा , आम आदमी पार्टी, लेफ्ट पार्टियों का हो सकता है या इंडिपेंडेंट भी हो सकता है. राजनीतिक जुड़ाव के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता."

‘राजनीतिक नेता तुरंत ट्वीट करना शुरू कर देते हैं’

अमन अरोड़ा ने कहा कि चुनौती के आकार को देखते हुए, राजनीतिक नेताओं को गांव के रिप्रेजेंटेटिव्स पर दी गई ज़िम्मेदारियों को समझने की ज़रूरत है. उन्होंने आगे कहा, “अभी के हालात देखिए. 13,500 गांव हैं. जहां भी ऐसी स्थिति बनती है, एक तरफ कोई नशा तस्करी में शामिल होता है और दूसरी तरफ पंचायत होती है. राजनीतिक नेता तुरंत ट्वीट करना शुरू कर देते हैं. सरपंच और पंचायत को क्या करना चाहिए? क्या उन्हें नशा तस्करी के बारे में पुलिस को बताना चाहिए या नहीं? उन्हें एक्शन लेना चाहिए या नहीं? मैं इन लोगों से यह सवाल पूछना चाहता हूं.

Loading Ad...

“सरकार ने उन्हें वीडीसी  का चेयरमैन बनाया है, चाहे वे किसी भी पार्टी के हों. हम उनसे कहते हैं: आपको गांव में ठीकरी पहरे लगाने होंगे.” अमन अरोड़ा ने कहा कि आपको लोगों में जागरूकता लानी होगी. अगर कोई ड्रग्स बेच रहा है या बेचने में मदद कर रहा है, तो आपको पुलिस में शिकायत दर्ज करवानी करनी होगी.”

उन्होंने कहा कि यह ज़िम्मेदारी गांव के चुने हुए प्रतिनिधियों को नशा बेचने वालों के दबाव में ला सकती है. अमन अरोड़ा ने कहा, “जब सरपंच पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे, तो नशा बेचने में शामिल लोग स्वाभाविक रूप से उनके दुश्मन बन जाएंगे. फिर कोई कुछ निगल जाता है या कुछ करता है, वीडियो बनाता है और कुछ राजनीतिक लीडर तुरंत उस वीडियो को ट्विटर पर डाल देते हैं. अचानक, पूरे देश को बताया जाता है कि सरकार खुद पंजाब में ड्रग्स बेच रही है. यह मज़ाकिया है मज़ाकिया. इन नेताओं को शर्म आनी चाहिए.”

‘सब लोग एक साथ आएं और पंजाब से ड्रग्स को खत्म करें’

Loading Ad...

अमन अरोड़ा ने कहा कि सरकार, आम आदमी पार्टी और पुलिस अपने मकसद को लेकर साफ हैं. अमन अरोड़ा ने कहा, “आज बहुत साफ शब्दों में, सरकार की तरफ से, आम आदमी पार्टी की तरफ से और सरकार के एक हिस्से के तौर पर, मैं कहना चाहता हूं कि हमारा इरादा बिल्कुल साफ है. हम चाहते हैं कि सब लोग एक साथ आएं और पंजाब से ड्रग्स को खत्म करें.”

अमन अरोड़ा ने कहा, “लेकिन इतनी घटिया राजनीति का क्या मतलब है? मैं यह नहीं कह रहा कि सब लोग ऐसा ही सोचेंगे, लेकिन मान लीजिए कोई यह सोचने लगे कि मेरे खिलाफ केस दर्ज हैं, पुलिस मुझ पर दबाव डाल रही है, सरपंच मुझ पर दबाव डाल रहा है. अगर मैंने कुछ निगल लिया और फिर पूरी अकाली, कांग्रेस और भाजपा  लीडरशिप मेरे पीछे पड़ गई, तो मैं हीरो बन जाऊंगा और मुझे तारीफ मिलेगी. फिर हम क्या करेंगे? सरकार कैसे चलेगी? हम ड्रग्स कैसे खत्म करेंगे?".

अमन अरोड़ा ने एक बार फिर सभी राजनीतिक पार्टियों से ऐसी राजनीति से बचने की अपील की. उन्होंने कहा, "मेरी सभी से अपील और रिक्वेस्ट है कि इस घटिया राजनीति से बचें. और अगर आपने जो कहा है, उसमें आप सच हैं, तो ट्वीट करने वाले सभी लोगों को नमोल गांव में आकर वहां भी यही बात कहनी चाहिए. आकर लोगों के सामने कहना चाहिए. फिर आप देखेंगे कि लोग आपको कैसे जवाब देते हैं. वह बिल्कुल अलग सीन होगा,"..

Loading Ad...

‘ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई सबकी मिली-जुली ज़िम्मेदारी है’

अमन अरोड़ा ने कहा, "ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई सबकी मिली-जुली ज़िम्मेदारी है. हमें गांवों, पंचायतों, पुलिस और समाज के ड्रग्स के खतरे से लड़ने के इरादे को राजनीतिक फायदे की वजह से कमजोर नहीं होने देना चाहिए. पंजाब को ज़िम्मेदार राजनीति और मिली-जुली कार्रवाई की ज़रूरत है, न कि संवेदनशील घटनाओं का राजनीतिक फायदा उठाने की."

कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने क्या कहा

Loading Ad...

इस बीच, कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, "किसी दुखद घटना को राजनीतिक तमाशा बनाने से पहले, विपक्ष के नेताओं को नमोल गांव की ज़मीनी हकीकत का सामना करने की हिम्मत दिखानी चाहिए. जिस आदमी का वे बचाव कर रहे हैं, उस पर गांववाले ही नशा तस्कर होने का आरोप लगा रहे हैं, जिसके खिलाफ चीमा और पटियाला पुलिस थानों में करीब 9 एफआईआर दर्ज हैं. पूरा गांव ड्रग्स के खिलाफ एकजुट है और नमोल को नशा-मुक्त बनाने की लड़ाई में साथ खड़ा है. इसलिए विपक्ष के नेताओं के लिए सवाल आसान है: आप किसके साथ हैं? उन गांववालों के साथ जो ड्रग्स की समस्या के खिलाफ एकजुट हैं? या एक कथित नशा तस्कर के साथ?"

 क्या पूरे गांव की एक साथ आवाज़ सुनी जाएगी?

कैबिनेट मंत्री रवजोत सिंह ने कहा, "राजनीति को एक तरफ रख दें, तो नमोल गांव के मामले को तथ्यों के ज़रिए समझने की ज़रूरत है. गांव वालों का कहना है कि वे पहले ही नशा बेचने वालों के बॉयकॉट का एक संयुक्त प्रस्ताव पास कर चुके हैं, गांव की रखवाली कर रहे हैं और मान सरकार के ड्रग्स के खिलाफ़ मुहिम को समर्थन  कर रहे हैं. दूसरी तरफ़, जिस आदमी के समर्थन  में विपक्ष बयान और वीडियो जारी कर रहे हैं, उसके खिलाफ़ दर्ज केस के फैक्ट्स भी पेश करना ज़रूरी है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस आदमी के खिलाफ़ ड्रग्स से जुड़े केस में करीब एक दर्जन एफआईआर दर्ज होने की खबरें हैं. सवाल यह है कि क्या पूरे गांव की एक साथ आवाज़ सुनी जाएगी, या सिर्फ़ एक तरफ़ की बात पर फोकस करके राजनीति की जाएगी? नमोल वालों की प्रेस कॉन्फ्रेंस का वीडियो भी मौजूद है. पहले ज़मीनी हकीकत सुनो, फिर अपने विचार पेश करो."

‘पहले ज़मीनी हकीकत और गांववालों का पक्ष भी सुनना चाहिए’

Loading Ad...

यह भी पढ़ें

कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुंडिया ने कहा, “एक लाश पर राजनीति करने के बजाय, विरोधी पार्टियों को ज़मीनी हकीकत को समझने और सुनने की ज़रूरत है. नमोल गांव के लोगों का दावा है कि जिस आदमी को विरोधी ‘व्हिसलब्लोअर’ बता रहे हैं, उसके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज हैं और उसका नाम ड्रग्स से जुड़े मामलों में शामिल है. इसलिए, इन विरोधी पार्टियों का सीधा सवाल है: आप किसके साथ खड़े हैं — एक नशा तस्कर और नशेड़ी के दावों के साथ, या पूरे नमोल गांव के साथ, जो ड्रग्स के खिलाफ एकजुट है? गांववालों के मुताबिक, उन्होंने एक संयुक्त प्रस्ताव पास किया, ठीकरी पहरा लगाया, और ड्रग्स को फैलने से रोकने की सरकार की कोशिशों में उसके साथ खड़े होने का फैसला किया. राजनीतिक बयान देने से पहले ज़मीनी हकीकत और गांववालों का पक्ष भी सुनना चाहिए.”

LIVE
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...