CM योगी की राह पर बंगाल की सुवेंदु सरकार... उद्योगों के लिए बनेगा लैंड बैंक, जमीन देने वाले किसानों को मिलेंगे शेयर
पश्चिम बंगाल में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी सरकार नई जमीन नीति लाने की तैयारी में है. इसके तहत उद्योगों को जमीन उपलब्ध कराने के लिए सीधे खरीद और लैंड-पूलिंग मॉडल अपनाया जाएगा. सरकार का लक्ष्य किसानों की सहमति से जमीन जुटाकर निवेशकों को बेहतर सुविधाएं देना है.
Follow Us:
पश्चिम बंगाल में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जमीन उपलब्ध कराने की नई योजना तैयार की है. मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही वह देश के बड़े निवेशकों को बंगाल में उद्योग स्थापित करने के लिए आकर्षित करने में जुटे हैं. इसी कड़ी में उनकी सरकार अब उत्तर प्रदेश, हरियाणा और आंध्र प्रदेश में अपनाए जा रहे लैंड-पूलिंग मॉडल की तर्ज पर नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है.
गुरुवार को औद्योगिक प्रोत्साहन नीति की घोषणा करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार उद्योगों के लिए दो अलग-अलग तरीकों से जमीन की व्यवस्था करेगी. इसके तहत जरूरत के मुताबिक किसानों से सीधे जमीन खरीदी जाएगी. वहीं, दूसरी व्यवस्था के रूप में लैंड-पूलिंग के जरिए अलग-अलग भूखंडों को मिलाकर एक बड़ा लैंड बैंक तैयार किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने साफ किया कि उनकी सरकार उद्योगपतियों को जमीन की व्यवस्था खुद करने के लिए नहीं छोड़ेगी. साथ ही, किसानों की जमीन जबरन अधिग्रहित करने की नीति भी नहीं अपनाई जाएगी. सरकार का प्रयास होगा कि जमीन मालिकों की सहमति से जमीन उपलब्ध कराई जाए और निवेशकों को उद्योग लगाने के लिए जरूरी सुविधाएं मिल सकें.
लैंड-पूलिंग के जरिए किसानों और उद्योगों के बीच संतुलन बनाने की तैयारी
लैंड-पूलिंग मॉडल में जमीन मालिक अपनी मर्जी से अपनी जमीन सरकार को विकास कार्यों के लिए सौंपते हैं. इसके बाद सरकार उस जमीन पर सड़क, बिजली और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाएं विकसित करती है. विकास की प्रक्रिया पूरी होने पर जमीन का एक निर्धारित हिस्सा उसके मूल मालिक को वापस कर दिया जाता है. इस तरह किसानों को विकसित जमीन का लाभ मिलता है और उद्योगों के लिए बड़े भूखंड तैयार करना भी आसान हो जाता है. राज्य सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में जमीन को लेकर पहले अपनाई गई नीतियों से औद्योगिक विकास प्रभावित हुआ. उनके अनुसार, तृणमूल कांग्रेस की पिछली सरकार ने जमीन अधिग्रहण के मामलों में काफी सतर्क रुख अपनाया, जबकि वामपंथी शासन के दौरान उद्योगों के लिए जमीन लेने को लेकर जबरन अधिग्रहण के आरोप लगे थे. अब बीजेपी सरकार इन दोनों तरीकों से अलग रास्ता अपनाते हुए ऐसा मॉडल लाना चाहती है, जिसमें किसानों की सहमति और उद्योगों की जरूरतों के बीच संतुलन कायम किया जा सके.
यह भी पढ़े: AAP से निष्कासित को BJP ने लगाया गले, रेप के आरोपी पठानमाजरा के साथ बीजेपी नेताओं ने साझा किया मंच
तत्काल जमीन उपलब्ध कराने के लिए सीधे खरीद का विकल्प
लैंड-पूलिंग के माध्यम से जमीन का बड़ा बैंक तैयार करने में सरकार को कुछ समय लग सकता है. ऐसे में निवेशकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने तत्काल जमीन उपलब्ध कराने का विकल्प भी रखा है. इसके तहत जिन कंपनियों को जल्द उद्योग स्थापित करना है, उनके लिए किसानों से सीधे जमीन खरीदने की योजना बनाई गई है. हालांकि, इस प्रक्रिया में सरकार के सामने कुछ चुनौतियां भी आ सकती हैं. बड़े उद्योगों को एक ही स्थान पर काफी जमीन की जरूरत होती है, लेकिन अलग-अलग मालिकों की जमीन होने के कारण सभी भूखंडों को एक साथ जुटाना आसान नहीं होगा. परियोजना के दायरे में आने वाले कुछ किसान अपनी जमीन बेचने के लिए तैयार न हों, ऐसी स्थिति भी पैदा हो सकती है.
जमीन मालिकों को मिलेगा उचित मुआवजा
राज्य सरकार की नई योजना के तहत अपनी जमीन बेचने के लिए सहमति देने वाले किसानों और अन्य मालिकों को 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून में निर्धारित मुआवजे के आधार पर भुगतान किया जाएगा. अधिकारियों के मुताबिक, इस कानून में जमीन के बाजार मूल्य के आधार पर अधिकतम चार गुना तक मुआवजे का प्रावधान है. इसके अलावा, जमीन पर मौजूद मकान या अन्य निर्माण की कीमत का आकलन करके उसका अलग से भुगतान भी किया जाएगा. सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से जमीन मालिकों को बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिलेगी. बंगाल में राष्ट्रीय राजमार्गों और रेलवे परियोजनाओं के लिए भी पहले इसी तरह के मुआवजा प्रावधानों के तहत जमीन ली जा चुकी है
लंबे समय से खाली पड़े औद्योगिक भूखंडों को वापस लेगी राज्य सरकार
पश्चिम बंगाल सरकार अब उन औद्योगिक जमीनों का भी हिसाब लेने की तैयारी में है, जिन्हें वर्षों पहले उद्योग स्थापित करने के उद्देश्य से निवेशकों को लीज पर दिया गया था, लेकिन अब तक वहां कोई काम शुरू नहीं हुआ. सरकार का मानना है कि औद्योगिक इस्तेमाल के लिए आवंटित जमीन को लंबे समय तक खाली रखना उचित नहीं है. ऐसी जमीन का उपयोग दूसरे निवेशकों और नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए किया जा सकता है.
यह भी पढ़ें
बताते चलें कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस संबंध में निवेशकों को तीन महीने का समय देने की बात कही है. उनके मुताबिक, जिन कंपनियों ने आवंटित भूखंडों पर अब तक औद्योगिक गतिविधियां शुरू नहीं की हैं, उन्हें तय समयसीमा के भीतर काम शुरू करना होगा. यदि वे ऐसा नहीं कर पाती हैं, तो उन्हें जमीन सरकार को वापस सौंपनी होगी.