'रामद्रोहियों को बर्दाश्त नहीं हो रहा अयोध्या का वैभव...', महंत दिग्विजयनाथ की पुण्यतिथि पर बोले CM योगी; कालनेमियों से किया सावधान
महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं पुण्यतिथि पर सीएम योगी ने कहा कि सनातन धर्मावलंबी आज के कालनेमियों से सावधान रहें. हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं, भ्रम या संशय नहीं होना चाहिए, यदि 140 करोड़ भारतवासी साथ चलें, तो दुनिया की कोई ताकत सामने ठहर नहीं पाएगी.
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गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1949 में अयोध्या स्थित श्री रामजन्मभूमि पर रामलला का प्रकटीकरण श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध हुआ. आज जब अयोध्या स्थित भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बन गया है तो रामद्रोहियों को अयोध्या का वैभव बर्दाश्त नहीं हो रहा है. सभी रामभक्तों, सनातन धर्मावलंबियों को आज के कालनेमियों से सावधान रहना होगा. हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, इसमें किसी को किसी प्रकार का भ्रम या संशय नहीं होना चाहिए.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार (आश्विन कृष्ण तृतीया) को गोरखनाथ मंदिर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं तथा राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह के अंतर्गत महंत दिग्विजयनाथ की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि अयोध्या में भव्य मंदिर, काशी में बाबा विश्वनाथ का भव्य धाम, विंध्याचल में मां विंध्यवासिनी धाम का वैभव, प्रयागराज के दिव्य कुंभ और वृंदावन के वैष्णव कुंभ को देखकर सनातन से चिढ़ने वाले दुष्प्रचार करेंगे, भ्रम पैदा करेंगे. सभी सनातनियों को इसके लिए सतर्क और जागरूक रहना होगा. ये रामद्रोही व सनातनद्रोही आज के दौर के कालनेमि हैं. रामायण कालखंड में जब रामभक्त हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने जा रहे थे तब कालनेमि ने छद्म रूप में उन्हें रोकने की कोशिश की थी. हनुमान जी ने उसे पहचान लिया था. वर्तमान दौर में भी रामभक्तों, सनातन धर्मावलंबियों को आज के कालनेमियों से सावधान रहना होगा. हम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, इसमें किसी प्रकार का भ्रम या संशय नहीं होना चाहिए. अयोध्या व काशी में आई भव्यता सही दिशा में चलने का ही परिणाम है.
वैष्णव कुंभ पर बांके बिहारी और राधारानी की कृपा
सीएम योगी ने 2019 में प्रयागराज के भव्य एवं दिव्य कुंभ आयोजन के बाद वृंदावन में वैष्णव कुंभ के भव्य आयोजन का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जब यह आयोजन हुआ तो उस समय कोरोना का प्रकोप था. किंतु, बांके बिहारी लाल तथा राधारानी की कृपा से इस आयोजन में कोरोना बाल भी बांका नहीं कर पाया. आध्यात्मिक शक्ति ऐसी ही होती है.
किसी पंथ-जाति में भेदभाव नहीं करती गोरक्षपीठ
मुख्यमंत्री ने शैव परंपरा वाली गोरक्षपीठ को संपूर्ण सनातन के लिए समर्पित पीठ बताते हुए कहा कि यह किसी पंथ, संप्रदाय, व्यक्ति या जाति में कोई भेदभाव नहीं करती. किसी पंथ या संप्रदाय की विशिष्ट उपासना पद्धति हो सकती है, लेकिन सबका कल्याण वृहद सनातन धर्म में ही होता है. सनातन की किसी भी शाखा के व्यक्ति को गोरक्षपीठ में वही सम्मान मिलता है, जो उन्हें अपनी पावन परंपरा में मिलता होगा.
अलग गति से चलना बनेगा दुर्गति का कारण
सीएम योगी ने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम को साकार करने के लिए सभी पंथों, संप्रदायों को एक भाव से, एक स्वर में, एक गति से, एक साथ आगे बढ़ना होगा. यदि 140 करोड़ भारतवासियों में एक साथ चलने का सामर्थ्य हो जाए तो दुनिया की कोई भी ताकत हमारे सामने ठहर नहीं पाएगी. लेकिन, अलग स्वर से बोलना व अलग गति से चलना, दुर्गति का कारण बनेगा.
दूरदर्शी होते हैं संतों-महापुरुषों के कार्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों व महापुरुषों को जानने और उनके बारे में पढ़ने से हमेशा नई प्रेरणा मिलती है. ये लोग केवल वर्तमान को नहीं जीते, बल्कि उनके कार्य दूरदर्शी होते हैं. उनके कार्य भविष्य की सुदृढ़ नींव के रूप में भावी जीवन को सुखद और उज्ज्वल बनाते हैं. सामान्य मनुष्य अपने लिए सोचता है, जबकि महापुरुष समूचे समाज और राष्ट्र कल्याण की भावना रखते हैं. लगभग 95 वर्ष पहले जब देश गुलाम था, साधन व संसाधनों का अभाव था, तब दिग्विजयनाथ जी ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की. उन्होंने स्वदेश, स्वधर्म और स्वाभिमान के आदर्श महाराणा प्रताप के नाम पर शिक्षा के प्रकल्प का नामकरण किया. यूपी में पहला राज्य विश्वविद्यालय गोरखपुर में बना और शिक्षा परिषद के दो कॉलेज देकर दिग्विजयनाथ जी महाराज ने उसकी नींव को सुदृढ़ करने का काम किया. उन्हें श्रेय लेने की कोई चाह नहीं थी. तब उन्होंने कहा था कि गोरक्षपीठ हिंदू और लोक कल्याण की पीठ है. इसकी संपत्ति लोकोपयोगी कार्य के लिए ही है.
महंत जी के कार्य आज भी अनुकरणीय
शिक्षा क्षेत्र में महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज के योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश गुलाम था, तब उन्होंने बालिका महाविद्यालय की स्थापना कर दी थी. संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना की. उनका मानना था कि भारत को उसकी परंपरा और विरासत के अनुसार आगे बढ़ाना है. इस निमित्त उन्होंने पीठ के महंत और सांसद के रूप में जो प्रयास किए, वह आज भी अनुकरणीय हैं. एमपी शिक्षा परिषद की 50 से अधिक संस्थाएं आज उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ने का संकल्प ले रही हैं. सीएम ने संस्थाओं का आह्वान किया कि वे सफलता प्राप्ति के लिए संस्थापकों के आदर्शों को कार्यशैली का हिस्सा बनाएं.
असाधारण होते हैं संतों के कार्य: स्वामी राजेंद्रदास
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए रेवासाधाम वृंदावन से पधारे श्रीमद्जगद्गुरु द्वाराचार्य अग्रपीठाधीश्वर एवं मलूकपीठाधीश्वर स्वामी श्री राजेंद्रदास देवाचार्य जी महाराज ने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ जी महाराज और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्यस्मृति को नमन करते हुए उन्हें वास्तविक संत बताया. उन्होंने कहा कि संत असाधारण होते हैं और इसलिए उनके द्वारा किए गए सभी कार्य भी असाधारण होते हैं. परमात्मा की कृपा से यदि धरती पर संत, सद्गुरु, ऋषि, महात्मा प्रकट नहीं होते तो मनुष्यता का बोध भी नहीं होता. गोरक्षपीठ अत्यंत पूज्य स्थान है क्योंकि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी के पावन श्रीचरणों के स्पर्श का लाभ इस भूमि को मिला है. यह भूमि महान मनीषियों के चरण रज से अलंकृत है.
नाथपंथ की परंपरा के महान वाहक थे दिग्विजयनाथ जी: बालकनाथ
इस अवसर पर मस्तनाथ पीठ अस्थल बोहर के महंत और राजस्थान विधानसभा के सदस्य बालकनाथ जी महाराज ने कहा कि नाथ परंपरा ने सदैव लोक कल्याण की भावना से समाज को एकजुट रखने का कार्य किया. महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज इसी परंपरा के महान वाहक थे. वास्तविक संत वही है जो शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अनेक जनकल्याणकारी संस्थाओं के माध्यम से लोगों का कल्याण करता है. इसी भाव को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजय नाथ जी महाराज और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज ने चरितार्थ किया. शिक्षा का विकास ही वास्तविक विकास है और गोरक्षपीठ ने सदैव राष्ट्रीयतापरक शिक्षा के प्रसार को आगे बढ़ाया है.
लोक कल्याण के प्रति समर्पित रहे दिग्विजयनाथ जी महाराज
श्रद्धांजलि सभा में श्रीरामजानकी मंदिर वाराणसी से पधारे डॉ. रामकमलदास जी वेदांती महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की साधना लोक और राष्ट्र कल्याण के प्रति समर्पित थी. समाज और राष्ट्र हित में चैतन्य पीढ़ियों के निर्माण के लिए उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की नींव रखी थी. अयोध्या से पधारे जगद्गुरु स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में भी राष्ट्रीयतापरक मूल्यों और सनातन मानबिंदुओं को प्रतिष्ठित करने का अभियान संकल्पबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया. काशी से पधारे जगद्गुरु श्री विष्णुस्वामी सम्प्रदायाचार्य श्री संतोषाचार्य जी महाराज 'सतुआ बाबा' ने कहा कि गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज ने धर्म, अध्यात्म के साथ ही शिक्षा के माध्यम से समाज को एकसूत्र में जोड़ने का काम किया. श्रद्धांजलि सभा को आदिशक्ति मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय बलरामपुर के कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह, महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद, गोरखपुर के सदस्य एवं पूर्व कुलपति प्रो. विजय कृष्ण सिंह ने भी संबोधित किया.
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शिक्षा परिषद की संस्थाओं के प्रमुखों ने भी दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं की तरफ से संस्था प्रमुखों ने महंत दिग्विजयनाथ जी और महंत अवेद्यनाथ जी को श्रद्धांजलि दी. इस क्रम में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर, आयुर्वेद कॉलेज, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेज तथा महायोगी गोरखनाथ चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज बालापार की तरफ से कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. भूपेश कुमार गोयल, गुरु श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय गोरखनाथ की तरफ से निदेशक डॉ. हिमांशु दीक्षित, महंत दिग्विजयनाथ आयुर्वेद चिकित्सालय गोरखनाथ की तरफ से डॉ. डीपी सिंह, दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज सिविल लाइंस की तरफ से डॉ. शुभ्रांशु शेखर सिंह, महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज जंगल धूसड़, महंत अवेद्यनाथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, योगीराज बाबा गम्भीरनाथ निशुल्क सिलाई कढ़ाई प्रशिक्षण केंद्र, राष्ट्रसंत महंत अवेद्यनाथ निशुल्क कम्प्यूटर प्रशिक्षण केंद्र तथा योगीराज बाबा गंभीरनाथ सेवाश्रम समिति जंगल धूसड़ की तरफ से डॉ. विजय कुमार चौधरी, महाराणा प्रताप महिला पीजी कॉलेज रमदत्तपुर व महाराणा प्रताप कन्या इंटर कॉलेज रमदत्तपुर की तरफ से प्राचार्या डॉ. सीमा श्रीवास्तव, श्री गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोरखनाथ, श्री गोरक्षनाथ संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गोरखनाथ, महायोगी गोरक्षनाथ योग संस्थान गोरखनाथ मंदिर, गुरु श्री गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ, मैदागिन, वाराणसी, आदिशक्ति मां पाटेश्वरी पब्लिक स्कूल भवनियापुर तुलसीपुर तथा मां पाटेश्वरी विद्यापीठ नन्दमहरी, बलरामपुर की तरफ से गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ के प्राचार्य डॉ. अरविंद चतुर्वेदी, दिग्विजयनाथ एलटी प्रशिक्षण (बीएड पाठ्यक्रम) महाविद्यालय सिविल लाइंस की तरफ से डॉ. अभिलाषा कौशिक, महाराणा प्रताप पॉलिटेक्निक गोरखनाथ, महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गोरखनाथ तथा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की तरफ से बीएन वर्मा, महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज सिविल लाइंस की तरफ से प्रधानाचार्य डॉ. अरुण कुमार सिंह, प्रताप आश्रम गोलघर की तरफ से अभय सिंह, महाराणा प्रताप बालिका इंटर कॉलेज सिविल लाइंस तथा महाराणा प्रताप चिल्ड्रेन एकेडमी सिविल लाइंस की तरफ से राधारानी पांडेय, महाराणा प्रताप सीनियर सेकेंड्री स्कूल मंगला देवी मंदिर बेतियाहाता की तरफ से रंजना सिंह, महाराणा प्रताप कृषक इंटर कॉलेज जंगल धूसढ़ की तरफ से डॉ. व्यासमुनि मिश्र, महाराणा प्रताप मीराबाई महिला छात्रावास, सिविल लाइंस तथा दिग्विजयनाथ महिला छात्रावास सिविल लाइंस की तरफ से डॉ. शशिप्रभा सिंह, गुरु गोरखनाथ विद्यापीठ, भरोहिया की तरफ से हरिकेश त्रिपाठी, दिग्विजयनाथ इंटर कॉलेज चौकमाफी की तरफ से संजय कुमार चौरसिया, महायोगी गोरखनाथ कृषि विज्ञान केंद्र चौकमाफी की तरफ से डॉ. अजीत कुमार श्रीवास्तव, गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ महाविद्यालय चौक बाजार, दिग्विजयनाथ इंटर कॉलेज चौक बाजार तथा दिग्विजयनाथ बालिका इण्टरमीडिएट कॉलेज चौक बाजार महराजगंज की तरफ से राकेश तिवारी तथा दुल्हिन जगन्नाथ कुंअरि इण्टरमीडिएट कॉलेज टेकुआटार, कुशीनगर की तरफ से अखिलेंद्र सिंह ने श्रद्धांजलि अर्पित की.
सीएम ने किया ‘श्री हनुमत्कथा पूजनम’ पुस्तक का विमोचन
इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ संस्कृत विद्यापीठ के पूर्व प्राचार्य डॉ. रामनरेश पांडेय की पुस्तक ‘श्री हनुमत्कथापूजनम’ का विमोचन भी किया. श्रद्धांजलि सभा में अभ्यागतों का स्वागत महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष, वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश मोहन सरकार और संचालन डॉ. श्रीभगवान सिंह ने किया. कार्यक्रम में महाराणा प्रताप बालिका इंटर कॉलेज सिविल लाइंस की छात्राओं ने सरस्वती वंदना तथा श्रद्धांजलि गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति की. वैदिक मंगलाचरण डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी, गोरक्ष अष्टक पाठ मृत्युंजय उपाध्याय एवं गौरव तिवारी, दिग्विजय स्तोत्र पाठ डॉ. अभिषेक पांडेय ने किया.
श्रद्धांजलि सभा में इनकी भी रही प्रमुख उपस्थिति
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