योगी सरकार में आजमगढ़ पुलिस का मानवीय चेहरा, 8 घंटे के रेस्क्यू के बाद बचाईं 2 मासूम; अब भविष्य भी संवारेगी
आजमगढ़ रेस्क्यू मिशन के बाद यूपी पुलिस ने दो मासूम बच्चियों के सुरक्षित भविष्य की जिम्मेदारी उठाई. एसएसपी ने एक महीने और एक पुलिसकर्मी ने एक दिन का वेतन बच्चियों के नाम एफडी कराने का ऐलान किया.
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योगी सरकार में उत्तर प्रदेश पुलिस की पेशेवर दक्षता के साथ उसका मानवीय चेहरा भी सामने आया. आजमगढ़ के बड़े रेस्क्यू मिशन में पुलिस ने करीब 7-8 घंटे चले संवेदनशील ऑपरेशन के बाद दो मासूम बच्चियों की जान बचाई. अब पुलिस परिवार उनके सुरक्षित भविष्य के लिए भी आगे आया है. एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने अपने एक महीने और पुलिसकर्मी ने एक दिन का वेतन बच्चियों के भविष्य के लिए देने का एलान किया है. यह राशि दोनों बच्चियों के नाम एफडी के रूप में जमा कराई जाएगी. वहीं डीजीपी राजीव कृष्ण ने आजमगढ़ पुलिस की सूझबूझ भरी कार्रवाई और मानवीय पहलू की सराहना की है.
शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य में भी सहयोग
यूपी पुलिस के मुताबिक, घटना में अरविंद, उनकी पत्नी और 9 वर्षीय पुत्र की मृत्यु के बाद परिवार में वृद्ध माता और दो बच्चियां रह गई हैं. दोनों बच्चियां फिलहाल अपने परिजनों के साथ स्वस्थ और सकुशल हैं. पुलिस उनके शिक्षा और पालन-पोषण में हरसंभव सहयोग कर रही है. घटना से हुए मानसिक आघात को देखते हुए 11 वर्षीय बच्ची के लिए चाइल्ड साइकेट्रिस्ट से परामर्श और आवश्यक मनोवैज्ञानिक सहयोग की व्यवस्था भी की जा रही है.
🚔 #Azamgarh | शम्भूपुर हत्याकांड
अनाथ हुईं दोनों मासूम बेटियां, आजमगढ़ पुलिस परिवार बना सहारा ❤️
• SSP आजमगढ़ डॉ0 अनिल कुमार देंगे अपना 01 माह का वेतन, जबकि जनपद के समस्त पुलिसकर्मी देंगे 01 दिन का वेतन—दोनों बच्चियों के पालन-पोषण एवं शिक्षा-दीक्षा के लिए।
• करीब 07 घंटे तक… pic.twitter.com/1zeIGkcPVC— AZAMGARH POLICE (@azamgarhpolice) September 25, 2026Advertisement
मृतकों के परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ
पुलिस के मुताबिक घटना में जान गंवाने वाले धर्मेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा के परिजनों को पात्रतानुसार सरकारी सहायता दिलाने के लिए एसएसपी ने जिलाधिकारी से बात की. पुलिस आवश्यक जानकारी और बैंक खातों का विवरण लेकर जिला प्रशासन के माध्यम से सहायता दिलाने में सहयोग करेगी. दोनों परिवारों को राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत पात्रतानुसार आर्थिक सहायता दिलाने की कार्रवाई भी की जा रही है. इसके साथ ही दोनों बच्चियों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत पात्रतानुसार सहायता दिलाने व वृद्ध माता को वृद्धावस्था पेंशन और अन्य पात्र सदस्यों को संबंधित कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए जिला प्रशासन से समन्वय किया गया है.
हत्याओं के बाद करीब 8 घंटे तक बच्चों के कैद कर बैठा था अरविंद
यूपी पुलिस के मुताबिक 22/23 सितंबर 2026 की रात आजमगढ़ के थाना आहरौला क्षेत्रांतर्गत ग्राम शम्भूपुर में तीन व्यक्तियों की हत्या के बाद आरोपी अरविंद अपने तीन बच्चों एवं लाइसेंसी रिवॉल्वर के साथ एक कमरे में बंद हो गया था. बच्चों की जान को खतरा देखते हुए पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन की रणनीति तैयार की. करीब 7–8 घंटे तक लगातार बातचीत के बाद आरोपी को आत्मसमर्पण करने व बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने के लिए कहा गया. इस दौरान आपात स्थिति के लिए एटीएस भी मौके पर मौजूद थी। इसी बीच देर रात कमरे के अंदर गोली चलने की आवाज आई, जिसे सुनते ही बच्चों की जान पर बचाने के लिए एसएसपी आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार, एसओजी प्रभारी संजय सिंह एवं आरक्षी प्रदीप दरवाजा तोड़कर कमरे में गए. पुलिस को देखते ही आरोपी ने फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने दोनों बच्चियों को किसी तरह सकुशल बाहर निकाला. हालांकि 9 वर्षीय शौर्य को उसके पिता द्वारा चलाई गई गोली गई थ. पुलिस ने उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. पोस्टमार्टम एवं बैलिस्टिक रिपोर्ट से भी पुष्टि हुई कि बच्चे को उसके पिता की रिवॉल्वर से चलाई गई गोली लगी थी.
डीजीपी ने की आजमगढ़ पुलिस की सराहना
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डीजीपी राजीव कृष्ण ने आजमगढ़ पुलिस द्वारा दो मासूम बच्चियों को सुरक्षित बचाने और घटना के बाद प्रभावित परिवारों को मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की सराहना की है. उन्होंने कहा कि आजमगढ़ पुलिस ने कठिन परिस्थितियों में धैर्य, साहस और कुशल फील्ड क्राफ्ट का परिचय देने के साथ प्रभावित परिवारों के प्रति मानवीय संवेदनशीलता भी दिखाई है. पुलिस का दायित्व केवल अपराध पर नियंत्रण और नागरिकों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि संकट के समय में जरूरतमंदों के साथ खड़े रहना और उन्हें दोबारा सामान्य जीवन की ओर बढ़ने में सहयोग देना भी है.