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TMC में 'ऑपरेशन बगावत'! ममता बनर्जी की पार्टी दो फाड़ होने के कगार पर, 60 विधायक कर सकते हैं बड़ा खेल
पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद पार्टी में टूट की अटकलें तेज हैं और दावा किया जा रहा है कि बड़ी संख्या में विधायक ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में जा सकते हैं. हालांकि, इस पर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार टीएमसी प्रमुख के लिए सिर्फ एक चुनावी हारनहीं, बल्कि अब सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गई है. राज्य में सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद लिए जा रहे लगातार कड़े फैसलों ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर हलचल बढ़ा दी है. इस बीच पार्टी के अंदर असंतोष और बगावत की खबरें तेज हो गई हैं. बीते दिनों करीब 20 सांसद और चार दर्जन से अधिक विधायक पार्टी नेतृत्य से दूरी बनाये जाने की खबर सामने आई थी, जबकि बड़ी संख्या में पार्षद भी इस्तीफा दे चुके हैं. इसी बीच ममता बनर्जी की टीएमसी को लेकर राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. अटकलें लगाई जा रही हैं कि पार्टी दो गुटों में बंट सकती है और करीब 60 विधायक ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में खड़े होने की तैयारी कर रहे हैं. हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को बड़ी संख्या में विधायक एक साथ आकर पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर को समर्थन पत्र सौंप सकते हैं. यदि यह कदम उठाया जाता है, तो पार्टी के भीतर साफ़तौर पर विभाजन देखने को मिल सकता है, जिसमें एक गुट के पास लगभग 60 विधायक और दूसरे के पास करीब 20 विधायक रह जाएंगे. ऐसी स्थिति में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे से विधानसभा में विपक्ष का दर्जा भी छिन सकता है. एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित नए गुट को 80 में से करीब 60 टीएमसी विधायकों का समर्थन मिलने का दावा किया जा रहा है. गुट से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मान्यता के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार कर लिए गए हैं और वे बुधवार को विधानसभा स्पीकर को समर्थन पत्र सौंपेंगे. उनका कहना है कि वास्तविक टीएमसी उनके साथ है. जानकारी के मुताबिक, इस नए गुट के अधिकांश विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता मानने और उनकी उम्मीदवारी का समर्थन करने के पक्ष में हैं.
पार्टी विधायकों से मिले ऋतब्रत बनर्जी
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पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री तापस रॉय ने मंगलवार को संकेत दिया कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर महाराष्ट्र की तरह राजनीतिक विभाजन की स्थिति बनती दिखाई दे रही है. उनका कहना था कि पार्टी में समय-समय पर ऐसे लोगों को भी शामिल किया गया, जिनका राजनीति से गहरा जुड़ाव नहीं था. रॉय के मुताबिक, इसी वजह से अब संगठन के अंदर मौजूद मतभेद और असंतोष खुलकर सामने आने लगे हैं. इस बीच विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान ऋतब्रत बनर्जी ने स्वीकार किया कि उन्होंने विधायक हॉस्टल में कुछ विधायकों से मुलाकात की थी और उनके साथ अनौपचारिक चर्चा भी की थी. हालांकि, उन्होंने अपने साथ 50 से अधिक विधायकों के समर्थन में आने संबंधी दावों पर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया. बनर्जी ने कहा कि वह परिस्थितियों के अनुसार 'एक-एक दिन आगे बढ़ने' की नीति पर काम कर रहे हैं.
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नेता प्रतिपक्ष के लिए नहीं पारित हुआ औपचारिक प्रस्ताव
ऋतब्रत बनर्जी ने यह भी दावा किया कि शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता चुनने के लिए कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था. उनके अनुसार, जिस दस्तावेज पर उनसे हस्ताक्षर करवाए गए थे, वह केवल उपस्थिति दर्ज करने के उद्देश्य से था. जानकारी देते चलें कि तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए ऋतब्रत बनर्जी समेत दो विधायकों को संगठन से निष्कासित कर दिया था.
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TMC के पहले प्रदर्शन में नहीं पहुंचे सांसद और विधायक
समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद ममता बनर्जी ने मंगलवार को पहली बार बड़े स्तर पर राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन करने की कोशिश की. इसके लिए कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित वाई-चैनल पर एक धरना कार्यक्रम आयोजित किया गया. हालांकि, कार्यक्रम में अपेक्षा से कम भीड़ दिखाई दी और कई सांसदों तथा विधायकों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया. धरने के लिए वाई-चैनल बस टर्मिनस के पास विशेष मंच तैयार किया गया था. इस दौरान चंद्रिमा भट्टाचार्य, शोभनदेब चट्टोपाध्याय, डेरेक ओ'ब्रायन और फिरहाद हकीम सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता ममता बनर्जी के साथ मंच पर मौजूद रहे. इसके बावजूद बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों के कार्यक्रम से दूर रहने को लेकर सवाल उठने लगे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति पार्टी के भीतर चल रही असहमति और नाराजगी की अटकलों को और मजबूत कर सकती है.
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बहरहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में टीएमसी के भीतर जारी सियासी हलचल किस दिशा में जाती है. फिलहाल पार्टी में टूट की अटकलें तेज हैं, लेकिन असली तस्वीर तब साफ होगी जब विधायकों का रुख और नेतृत्व की अगली रणनीति सामने आएगी.