दिल्ली को जाम मुक्त बनाने की MHA ने कर ली बड़ी तैयारी, गृह सचिव की अगुवाई में बनी हाईपावर कमेटी --

दिल्ली में बढ़ते ट्रैफिक जाम को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में हाईपावर कमेटी बनाई गई है, जो जाम कम करने के लिए ठोस सुझाव देगी और उन्हें लागू भी करेगी.

दिल्ली को जाम मुक्त बनाने की MHA ने कर ली बड़ी तैयारी, गृह सचिव की अगुवाई में बनी हाईपावर कमेटी --
Amit Shah (File Photo)

देश की राजधानी दिल्ली में ट्रैफिक जाम अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि बड़ी प्रशासनिक चुनौती बन चुका है. रोज़ाना लाखों लोग घंटों सड़कों पर फंसे रहते हैं. ऑफिस पहुंचने की जल्दी हो या स्कूल जाने की चिंता, जाम ने आम जिंदगी की रफ्तार धीमी कर दी है. इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में एक हाईपावर कमेटी का गठन किया है.

गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार यह कमेटी ट्रैफिक जाम की समस्या का ठोस समाधान तलाशेगी और सुझावों को लागू कराने की जिम्मेदारी भी निभाएगी. जानकारी के मुताबिक कमेटी की पहली बैठक 26 फरवरी को गृह मंत्रालय में होगी. इससे पहले सितंबर 2018 में भी ऐसी ही एक कमेटी बनाई गई थी, लेकिन बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या ने समस्या को और गंभीर बना दिया है.

केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों चिंतित

दिल्ली में ट्रैफिक जाम को लेकर सिर्फ ट्रैफिक पुलिस या दिल्ली सरकार ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार भी चिंतित है. सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के दावे किए जाते रहे हैं, मेट्रो नेटवर्क का विस्तार हुआ है, डीटीसी बसों की संख्या बढ़ाई गई है, लेकिन सड़कों पर निजी गाड़ियों की तादाद लगातार बढ़ रही है. यही कारण है कि जाम कम होने के बजाय कई इलाकों में और भी बढ़ गया है. विशेषज्ञ मानते हैं कि जाम केवल समय की बर्बादी नहीं है. इससे ईंधन की खपत बढ़ती है, प्रदूषण में इजाफा होता है और लोगों का मानसिक तनाव भी बढ़ता है. लंबे समय तक जाम में फंसे रहना स्वास्थ्य पर भी असर डालता है.

इन मुद्दों पर काम करेगी कमेटी

  • नई हाईपावर कमेटी चार बड़े बिंदुओं पर फोकस करेगी.
  • पहला, यातायात में गतिशीलता लाने के लिए सड़कों की डिजाइन को बेहतर बनाना.
  • दूसरा, सार्वजनिक परिवहन को और मजबूत करना तथा इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना.
  • तीसरा, मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को एकीकृत करना ताकि बस, मेट्रो और अन्य साधनों के बीच बेहतर तालमेल हो सके.
  • चौथा, पार्किंग व्यवस्था में सुधार करना और ऑनलाइन पेमेंट जैसी सुविधाओं को बढ़ावा देना.

सरकार ने इन कदमों का मकसद सिर्फ जाम हटाना नहीं, बल्कि राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था को आधुनिक और व्यवस्थित बनाना है.

दिल्ली सरकार के प्रयास भी जारी

दिल्ली सरकार भी जाम से निपटने के लिए कई कदम उठा रही है. मल्टीलेवल पार्किंग का निर्माण, संकरी सड़कों पर छोटी बसों का संचालन, डीटीसी बेड़े का विस्तार और मेट्रो नेटवर्क बढ़ाना ऐसे प्रयास हैं जिनसे राहत की उम्मीद की जा रही है. इसके अलावा अवैध पार्किंग पर सख्ती और सड़कों को चौड़ा करने जैसे काम भी किए जा रहे हैं. हालांकि फ्लाईओवर और एक्सप्रेसवे बनने के बाद भी जाम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. इससे साफ है कि समस्या केवल इंफ्रास्ट्रक्चर की नहीं, बल्कि ट्रैफिक प्रबंधन और व्यवहारिक बदलाव की भी है.

बताते चलें कि नई हाईपावर कमेटी से उम्मीद है कि वह व्यावहारिक और दीर्घकालिक समाधान लेकर आएगी. यदि सुझाए गए कदम प्रभावी तरीके से लागू होते हैं, तो दिल्ली की सड़कों पर राहत मिल सकती है. राजधानी की रफ्तार थमी हुई है, लेकिन अब नजरें इस कमेटी पर टिकी हैं. क्या यह पहल दिल्ली को जाम से मुक्ति दिला पाएगी, यह आने वाला समय ही बताएगा.

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