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‘तुम्हारे जैसे 1000 पति रख सकती हूं…’ पत्नी की टिप्पणी को उकसावे वाली मानकर कोर्ट ने घटाई 'हत्यारे' पति की सजा

इस मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अननिंद्र कुमार सिंह की बेंच ने की. बेंच ने कहा, पत्नी की इस तरह की टिप्पणी दिखाती है कि पति की कोई वैल्यू नहीं है.

Image Source- Canva/Representative Photo
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MP High Court Big Verdict: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पत्नी की हत्या मामले में पति की सजा एक टिप्पणी के आधार पर कम कर दी है. ये टिप्पणी हत्या से पहले पत्नी की ओर से की गई थी. जिसे कोर्ट ने उकसावे वाली माना. 

पत्नी ने पति के लिए कहा था, ‘तुम्हारे जैसे 1000 पति रख सकती हूं’ कोर्ट ने इसे उकसावे वाली माना. जिसके कारण तैश में आकर पति ने पत्नी की हत्या कर दी. दरअसल, ट्रायल कोर्ट ने पत्नी की हत्या के आरोप में पति को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पत्नी की टिप्पणी को आधार मानते हुए सजा को कम कर दिया. 

कोर्ट ने क्या कहा? 

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इस मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अननिंद्र कुमार सिंह की बेंच ने की. सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा, पत्नी की इस तरह की टिप्पणी दिखाती है कि पति की कोई वैल्यू नहीं है. यह न सिर्फ पति बल्कि उसके इंसानी अस्तित्व के लिए भी खतरा है. माना गया कि ऐसी टिप्पणी सुनकर पति ने आपा खो दिया और घटना को अंजाम दिया. हाई कोर्ट ने पति की सजा को बदलकर सात साल के सश्रम कारावास में बदल दी. 

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क्या है पूरा मामला? 

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के चौरई इलाके के शिवा और उसकी वाइफ किरण के बीच 18-19 जुलाई 2025 की रात झगड़ा हुआ था. आरोप है कि झगड़े के दौरान किरण ने अपने पति को कहा था, ‘तुम्हारे जैसे 1000 पति रख सकती हूं.’ इसके बाद शिवा ने गुस्से में पत्थर उठाकर अपनी पत्नी के ऊपर दे मारा और उसकी मौत हो गई.  

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मामला कोर्ट में पहुंचा तो शिवा की तरफ से पेश वकील ने पक्ष रखते हुए कहा कि शिवा के खिलाफ भरोसे लायक सबूत नहीं हैं.  जो सबूत मिले हैं उनमें भी विरोधाभास है. वकील ने ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द करने की मांग की थी. 

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि शिवा ने अपनी पत्नी को चोट पहुंचाई थी जिससे उसकी मौत हो गई, लेकिन ये सब अचानक हुए झगड़े के कारण हुआ. कोर्ट ने कहा कि यह कहीं से भी साबित नहीं होता कि आरोपी ने पत्नी की हत्या की पहले से कोई योजना बनाई थी. 

कोर्ट में यह भी बताया गया कि हत्या के बाद शिवा ने खुद घर पर इस घटना की जानकारी दी थी. इस बात पर कोर्ट ने गौर करते हुए कहा, आरोपी अपनी पत्नी की हत्या के इरादे से वहां गया होता तो वह घटना को अंजाम देने के बाद फरार हो जाता. 

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बेंच ने कहा कि आरोपी का इरादा हत्या का होता तो पुलिस या पत्नी के रिश्तेदारों को जानकारी नहीं देता. सुनवाई के दौरान जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अननिंद्र कुमार सिंह की बेंच ने सु्प्रीम कोर्ट के फैसले का भी जिक्र किया. जिसके अनुसार, अगर कोई शख्स अचानक उकसावे के चलते खुद पर से नियंत्रण खो देता है तो अपराध का आंकलन उसी आधार पर होना चाहिए. /u 

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कोर्ट ने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में यह भी गौर करने वाली बात है कि आरोपी ने पत्नी पर बार-बार पत्थर से हमला नहीं किया. घटनास्थल पर कई पत्थर थे ऐसे में जब पत्नी गिरी तो नीचे मौजूद पत्थरों से भी उसे ज्यादा चोट लग सकती है. बहरहाल इस मामले में आरोपी शिवा की उम्रकैद को कोर्ट ने सात साल की सजा में बदल दिया. जिसमें सबसे बड़ा आधार पत्नी की टिप्पणी बनी. 

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