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हरियाणा सरकार की सख्ती, निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम, बस्ते का वजन भी तय

Haryana: अभी हाल ही में अभिभावकों से लगातार शिकायतें आ रही थीं कि निजी स्कूल अपने स्कूल की किताबें, वर्दी और अन्य सामग्रियों की जबरन खरीदारी करवा रहे हैं. कई स्कूल अभिभावकों पर महंगी किताबों का दबाव बना रहे हैं, जो ना तो एनसीईआरटी द्वारा मान्य हैं और ना ही सीबीएसई के नियमों के तहत. इसके साथ ही, स्कूलों द्वारा जिन किताबों को बच्चों को खरीदने के लिए कहा जा रहा है, वह भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप नहीं हैं.

Image Source: Canva/ Nayab Saini Tweet
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Haryana: हरियाणा सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया हैं. अब शिक्षा विभाग ने स्पष्ट दिशा - निर्देश जारी किए हैं , जिनके तहत अभिभावकों पर किताबें और वर्दी खरीदने के लिए दबाव डालने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्यवाई की जाएगी.  इसके आलावा, स्कूली बच्चों के बस्ते के वजन को लेकर भी नई गाइडलाइन्स आई हैं, जिनसे बच्चों को बस्ते के भारी बोझ से राहत मिल सकेगी. 

निजी स्कूलों की मनमानी पर कड़ी कार्रवाई

अभी हाल ही में अभिभावकों से लगातार शिकायतें आ रही थीं कि निजी स्कूल अपने स्कूल की किताबें, वर्दी और अन्य सामग्रियों की जबरन खरीदारी करवा रहे हैं. कई स्कूल अभिभावकों पर महंगी किताबों का दबाव बना रहे हैं, जो ना तो एनसीईआरटी द्वारा मान्य हैं और ना ही सीबीएसई के नियमों के तहत. इसके साथ ही, स्कूलों द्वारा जिन किताबों को बच्चों को खरीदने के लिए कहा जा रहा है, वह भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप नहीं हैं.
शिक्षा विभाग ने इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे निजी स्कूलों की इस मनमानी को तुरंत रोकें. किसी भी स्कूल को अभिभावकों पर दबाव बनाने की इजाजत नहीं दी जाएगी. अगर किसी स्कूल ने नियमों का उल्लंघन किया, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी.

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बच्चों के बस्ते का वजन अब नियंत्रित किया जाएगा

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हरियाणा सरकार ने बच्चों के बस्ते का वजन भी कम करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. पहली से दूसरी कक्षा तक के बच्चों के बस्ते का वजन अब 1.5 किलोग्राम से अधिक नहीं हो सकता. यह कदम बच्चों की सेहत और उनके मानसिक विकास को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है. भारी बस्ता बच्चों के लिए शारीरिक और मानसिक दोनों ही दृष्टि से नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए इस निर्णय से बच्चों को राहत मिलेगी.

पुराने और अप्रासंगिक किताबों का इस्तेमाल रोका जाएगा

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शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने यह भी पाया कि कई स्कूल पुराने और अप्रासंगिक किताबों का इस्तेमाल बच्चों से करवा रहे हैं. इसके कारण अभिभावकों पर हर साल एक नया आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है. कुछ स्कूल तो बच्चों को पुरानी किताबों का इस्तेमाल करने से भी मना कर रहे हैं, जिससे अभिभावकों को नई किताबें खरीदनी पड़ती हैं. इस प्रकार की शरारतें अब नहीं चलने वाली हैं और विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि केवल उन किताबों का इस्तेमाल किया जाएगा, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत और एनसीईआरटी द्वारा स्वीकृत हों.

हेल्पलाइन नंबर से लें शिकायत की सुविधा

अब यदि किसी अभिभावक को स्कूल की तरफ से कोई भी शर्त या दबाव महसूस होता है, तो वे आसानी से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. शिक्षा विभाग ने इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 0172-5049801 जारी किया है, जिस पर सुबह 9 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक अपनी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. यह कदम अभिभावकों को उनकी समस्याओं का समाधान जल्दी और सुलभ तरीके से दिलाने के लिए उठाया गया है.'

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दिल्ली सरकार का भी सख्त कदम

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दिल्ली सरकार ने भी इस मुद्दे पर एक कदम आगे बढ़ते हुए निजी स्कूलों को किताबें और वर्दी खरीदने के लिए किसी एक खास दुकानदार से दबाव बनाने से मना किया है.. अब दिल्ली के निजी स्कूलों को कम से कम पांच विक्रेताओं के नाम, पते और फोन नंबर देना होंगे, जहां से अभिभावक अपनी पसंद से किताबें और वर्दी खरीद सकते हैं. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अभिभावकों को किसी एक विक्रेता पर निर्भर नहीं रहना पड़े और उन्हें बाजार में अन्य विकल्प भी मिल सकें.

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